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मंथन: केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा- बीफ खाने वाले पाकिस्तान चले जाएं

मंथन के 12वें सत्र में संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हिस्सा लिया. महाराष्ट्र में बीफ बैन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिसे गाय का मीट खाना हो, वह पाकिस्तान या अरब देशों में चला जाए. अब सत्ता के गलियारे से दलाल गायब हो गए हैं. आज अल्पसंख्यक समाज का कोई भी लड़का आतंकी गतविधियों में हिस्सा नहीं ले रहा है.

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मुकेश कुमार
  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2015,
  • अपडेटेड 8:22 AM IST

मंथन के 12वें सत्र में संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हिस्सा लिया. महाराष्ट्र में बीफ बैन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिसे गाय का मीट खाना हो, वह पाकिस्तान या अरब देशों में चला जाए. अब सत्ता के गलियारे से दलाल गायब हो गए हैं. आज अल्पसंख्यक समाज का कोई भी लड़का आतंकी गतविधियों में हिस्सा नहीं ले रहा है.

AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा आतंकवाद पर मोदी सरकार का दोहरा रवैया है. सरकार अल्पसंख्यकों की बात तो करती है, लेकिन बजट में 561 करोड़ रुपए कम कर दिए गए. बीजेपी में कभी अल्पसंख्यकों को तरहीज नहीं मिली. महाराष्ट्र में बीफ बैन कर दिया गया. इससे करीब पांच लाख मुस्लिम प्रभावित हुए हैं. गरीब मुसलमानों के बारे में मोदी सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

'बीफ खाना हो तो पाकिस्तान चले जाएं'
बीफ बैन पर नकवी ने कहा कि यह एक श्रद्धा और विश्वास का मामला है. उन्होंने कहा, 'यदि कोई बीफ का मीट खाए बिना मर रहा है, तो वह पाकिस्तान या अरब देश चला जाएं. उनकी इस देश में कोई जगह नहीं है. हिन्दुस्तान में गाय का मीट नहीं मिलेगा.' इस पर ओवैसी ने कहा कि गोवा के सीएम बीफ खाते हैं, क्या उनको पाकिस्तान भेज दिया जाए?

इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने नकवी से कहा, 'गोवा के रहने वाले ईसाई और नार्थ ईस्ट के उन लोगों क्या पाकिस्तान भेज दिया जाए, जो बीफ का मीट खाते हैं. नरेंद्र मोदी कहते हैं कि सबका साथ, सबका विकास, लेकिन सरकार में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधि कम है.'

मुस्लिम वोट बैंक के सवाल पर ओवैसी ने कहा, 'मैं मुसलमानों का लीडर नहीं हूं. मैं सिर्फ ये कह रहा हूं कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए बजट क्यों नहीं बढ़ा रही है? हम चाहते हैं कि सच्चर और रंगनाथ मिश्रा कमेटी की सिफारिसें लागूं की जाएं.'

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