
मध्य प्रदेश के वन मंत्री उमेश सिंघार ने अपने विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए पी श्रीवास्तव से फैसले लेने की कई शक्तियां छीन कर उनके मातहत अधिकारियों को सौंप दी हैं. माना जा रहा है कि मंत्री की ओर से उठाया गया ये कदम कथित नर्मदा पौधारोपण घोटाले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जांच की सिफारिश का नतीजा है. ये कथित घोटाला शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री काल के दौरान का बताया गया है.
हालांकि, मंत्री की ओर से लिए गए फैसले के बारे में कहा जा रहा है कि ये 'एग्जीक्यूटिव कंडक्ट रूल्स' के नियम 13(ए) और (बी) के तहत काम के दोबारा बंटवारे के लिए लिया गया. राज्य सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, समझा जाता है कि वन मंत्री उमेश सिंघार ने काम के दोबारा बंटवारे का फैसला श्रीवास्तव की ओर से एक नोटशीट को ब्लॉक करने की कोशिश के बाद लिया. इस नोटशीट में सिंघार ने करोड़ों के नर्मदा पौधारोपण घोटाले में जिम्मेदारी फिक्स करने पर जोर दिया था.
फैसले के बाद छुट्टी पर अतिरिक्त मुख्य सचिव
मंत्री के फैसले के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव ए पी श्रीवास्तव छुट्टी पर चले गए हैं. पौधारोपण घोटाले से जुड़ी फाइल पर मंत्री सिंघार ने सिफारिश की थी कि EOW को शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन वन मंत्री गौरी शंकर शेजवार और वन विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की जानी चाहिए.
सिंघार के मुताबिक, जून 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर शेजवार और वन विभाग के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने नर्मदा नदी के किनारे एक ही दिन में 6 करोड़ पौधे लगाने के नामुमकिन काम के लिए साठगांठ की.
पूर्व सीएम के खिलाफ EOW जांच की मांग
सिंघार ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ EOW जांच के लिए सिफारिश करते हुए कहा कि वो गिनीज बुक रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, लेकिन पौधों को बढ़ने के लिए कुछ वक्त लगता है. उन्होंने एक महीने से कुछ ज्यादा का ही वक्त सरकार के वन और अन्य विभागों को दिया. दूसरे राज्यों से बहुत ऊंची कीमत पर पौधे खरीदे गए.'
चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने मुद्दा उठाया
2018 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने कथित पौधारोपण घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की. कांग्रेस ने चुनाव जीतने के बाद सदन में भी ये मुद्दा उठाया. राज्य के वित्त मंत्री तरुण भनोट ने सदन में कहा था कि सारे संबंधित विभाग कथित घोटाले की जांच करेंगे.राज्य के कृषि और बागबानी विभाग और पंचायत विभाग को अभी जांच शुरू करनी है जिसका वादा सदन में किया गया था.