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नए नक्शे पर भारत के पक्ष में बोलने वाली नेपाली सांसद पर एक्शन, पार्टी से निष्कासित

नेपाल की संसद में विवादित नक्शे में संशोधन का प्रस्ताव पास हो गया है. नए नक्शे में भारत के तीनों हिस्से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया है.

सरिता गिरी (फाइल फोटो) सरिता गिरी (फाइल फोटो)
सुजीत झा/गीता मोहन
  • पटना/ नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 9:37 PM IST

  • नक्शे को लेकर शुरू से सरकार के खिलाफ रही हैं सरिता गिरी
  • सांसद को समाजवादी पार्टी (SP) ने पद से निष्कासित किया

नक्शा विवाद पर भारत के पक्ष में बोलने वाली सांसद सरिता गिरी को समाजवादी पार्टी (SP) ने पद से निष्कासित कर दिया है. उनकी संसद सदस्यता भी चली गई है. नक्शा विवाद पर सरिता गिरी शुरुआत से ही नेपाल सरकार का खुलकर विरोध करती रही हैं.

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हाल ही में सरिता गिरी ने खुलेआम संविधान संशोधन का भी विरोध किया था. सरकार द्वारा नए नक्शे को संविधान का हिस्सा बनाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपना अलग से संशोधन प्रस्ताव डालते हुए जनता समाजवादी पार्टी की सांसद सरिता गिरि ने इसे खारिज करने की मांग की थी.

इधर, सरिता गिरी ने कहा कि आधिकारिक निर्णय का पत्र मुझे नहीं मिला है, लेकिन इस फैसले के बारे में मीडिया से जानकारी मिली है. ये मेरे खिलाफ साजिश है. मुझे असंवैधानिक तरीके से निकाला गया है. मैं एक सांसद हूं और सांसद के बारे में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार अकेले उपेंद्र यादव को नहीं है, पार्टी संसदीय दल को निर्णय करना होता है. ये किसके दबाव में निर्णय लिया गया? मैं पार्टी के निर्णय को अदालत में चुनौती दूंगी. पत्र मिलने के बाद कानूनी रास्ता लेने के अलावा मेरे पास कोई और विकल्प नहीं है.

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क्या है पूरा मामला

भारत और नेपाल में सीमा विवाद के कारण रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं. 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से धाराचूला तक बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया था. इसके बाद नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया था. 18 मई को नेपाल ने नया नक्शा जारी किया. इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया.

नेपाल कैबिनेट की बैठक में भूमि संसाधन मंत्रालय ने नेपाल का यह संशोधित नक्शा जारी किया था. बैठक में मौजूद कैबिनेट सदस्यों ने समर्थन किया था. नेपाल के इस कदम से भारत और नेपाल की दोस्ती में दरार आनी शुरू हो गई. भारत ने लगातार इसका कड़ा विरोध किया.

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगाया था. साथ ही दावा किया कि वो अपनी ज़मीन वापस लेकर रहेंगे. 11 जून को नेपाल की कैबिनेट ने 9 लोगों की एक कमिटी का गठन किया. जिस ज़मीन पर नेपाल इतने दिनों से दावा कर रहा है और भारत के साथ विवाद खड़ा कर रहा है. उस ज़मीन पर अपने अधिकार का नेपाल के पास कोई प्रमाण ही नहीं है.

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नक्शे में संशोधन का प्रस्ताव पास

हालांकि नेपाल की संसद में विवादित नक्शे में संशोधन का प्रस्ताव पास हो गया है. नए नक्शे में भारत के तीनों हिस्से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया है. 275 सदस्यों वाली नेपाली संसद में इस विवादित बिल के पक्ष में 258 वोट पड़े थे.

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