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चमत्कारिक है पतंजलि की सफलता की कहानी, 8 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार

पतंजलि अभी करीब 14 साल पहले गठित कंपनी है और इसने भारत के एफएमसीजी क्षेत्र में दशकों से जमे आईटीसी, हिंदुस्तान लीवर, डाबर जैसी दिग्गज देसी-विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है. पतंजलि के उत्पादों में टूथपेस्ट, साबुन, आटा, नूडल्स, परिधान से लेकर दवाइयां तक शामिल हैं.

पिछले एक दशक में पतंजलि का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा है पिछले एक दशक में पतंजलि का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा है
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2020,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

  • पिछले एक दशक में पतंजलि का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा है
  • ​उसने कई देसी-विदेशी FMCG कंपनियों को तगड़ी चुनौती दी है

पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोना संक्रमण की दवा खोज लेने का दावा किया है. इससे कंपनी को बड़ा कारोबार मिलने की उम्मीद है. वास्तव में पिछले दशकों की बात की जाए तो पतंजलि की कारोबारी सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं है. इसका कारोबार 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है.

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असल में यह चमत्कारिक इस वजह से माना जाता है क्योंकि पतंजलि अभी करीब 14 साल पहले गठित कंपनी है और इसने भारत के एफएमसीजी क्षेत्र में दशकों से जमे आईटीसी, हिंदुस्तान लीवर, डाबर जैसी दिग्गज देसी-विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है.

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कितना है कारोबार

योग गुरु बाबा रामदेव के मार्गदर्शन और आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में चलने वाले पतंजलि ने वित्त वर्ष 2018-19 में 8,330 करोड़ रुपये का कारोबार किया था. हालांकि इसके पहले 2016-17 में पतंजलि 10,561 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ अपने शिखर पर पहुंच थी. पतंजलि के उत्पादों में टूथपेस्ट, साबुन, आटा, नूडल्स, परिधान से लेकर दवाइयां तक शामिल हैं.

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना साल 2006 में की गई और स्थापना के बाद से इसने जो तेज रफ्तार पकड़ी उसने लोगों को चकित कर दिया. बाबा रामदेव की अपनी योग गुरु की प्रतिष्ठा और स्वेदशी और आयुर्वेद के भरोसे की वजह से पतंजलि के उत्पादों को लोगों हाथोहाथ लिया. यह देश की सबसे तेजी से बढ़ने वाली फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफएमसीजी कंपनी बन गई. इसका मुख्यालय हरिद्वार में है और कई शहरों में इसके प्लांट हैं.

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हाल के वर्षों में हिंदुस्तान लीवर, डाबर, आईटीसी जैसी दूसरी दिग्गज कंपनियों ने भी आयुर्वेद के ब्रांड्स की जबरदस्त ब्रांडिंग की है जिसकी वजह से पतंजलि के कारोबारी रफ्तार में थोड़ी कमी आ गई. पतंजलि के बहुत से स्टोर बंद भी हुए हैं. पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने यह स्वीकार किया था कि आगे का रास्ता इतना आसान नहीं है. बिजनेस टुडे को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'अगले चरण का ग्रोथ इतना आसान नहीं होगा. हमें इसके लिए अपना सप्लाई चेन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत करना होगा. पहले 5000 करोड़ कारोबार तक हमारा पहुंचाना आर्गेनिक ग्रोथ के रूप में था क्योंकि हमारे उत्पाद सीधे उन लोगों तक पहुंचते थे जो हमें जानते थे. अब हमें कठोर मेहनत करनी होगी.'

वित्त वर्ष 2019-20 में 25 हजार करोड़ के कारोबार का दावा

पतंजलि ने अभी वित्त वर्ष 2019-20 के नतीजे जारी नहीं किए हैं, लेकिन कुछ महीने पहले कंपनी ने यह दावा किया था कि 2019-20 में 25,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करेगी.

असल में पतंजलि ने हाल ही में कर्ज में डूबी रुचि सोया का अधिग्रहण किया है. इसके बाद बाबा रामदेव ने कहा था कि कंपनी मार्च 2020 को खत्म होने वित्त वर्ष में 25,000 करोड़ का ज्वाइंट टर्नओवर प्राप्त करेगी, जिसमें करीब 12,000 करोड़ का योगदान पतंजलि ग्रुप की ओर से और 13,000 करोड़ का योगदान रुचि सोया की ओर से होगा.

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