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अश्वेत शख्स की मौत के खिलाफ पूरे अमेरिका में प्रदर्शन, गवर्नर ने नेशनल गार्ड को बुलाया

जॉर्जिया के गवर्नर ने शनिवार को आपात स्थिति की घोषणा की है. मिनीपोलिस और आसपास के शहरों में नेशनल गार्ड के 500 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है. यह कदम, डेट्रॉयट में एक व्यक्ति को गोली मारे जाने के बाद उठाया गया है.

प्रदर्शकारियों को शांत करने के लिए एनजी की तैनाती (प्रतीकात्मक फोटो) प्रदर्शकारियों को शांत करने के लिए एनजी की तैनाती (प्रतीकात्मक फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2020,
  • अपडेटेड 1:09 PM IST

  • नेशनल गार्ड के 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात
  • अटलांटा में पुलिस वाहन पर हमला

अमेरिका के मिनीपोलिस में अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन के बीच कई इलाकों में नेशनल गार्ड की तैनाती की गई है. जॉर्जिया के गवर्नर ने शनिवार को आपात स्थिति की घोषणा की है. मिनीपोलिस और आसपास के शहरों में नेशनल गार्ड के 500 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है. यह कदम, डेट्रॉयट में एक व्यक्ति को गोली मारे जाने, अटलांटा में पुलिस वाहन पर हमला होने और न्यूयॉर्क पुलिस के साथ झड़प होने और अमेरिका के अन्य शहरों में हिंसा फैलने के बाद उठाया गया है.

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गवर्नर ब्रायन केम्प ने ट्वीट किया कि नेशनल गार्ड के 500 सदस्यों को 'अटलांटा में जान और माल की रक्षा' करने के लिए तत्काल तैनात किया जाएगा. उन्होंने बताया कि वह अटलांटा के मेयर के अनुरोध पर यह कदम उठा रहे हैं.

इससे पहले गवर्नर ने स्वीकार किया कि अव्यवस्था को रोकने के लिए उनके पास पर्याप्त सुरक्षाकर्मी नहीं हैं. इसलिए यह अशांति अन्य शहरों में भी फैली. वाल्ज ने कहा, 'हमारे पास (सुरक्षाकर्मियों की पर्याप्त) संख्या नहीं है. हम स्थिति को काबू में करने के लिए लोगों को गिरफ्तार भी नहीं कर सकते हैं.'

वाल्ज ने कहा कि वह सुरक्षाकर्मियों की कुल संख्या 1,700 करने के लिए 1,000 से अधिक गार्ड सदस्यों को जुटाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और संघीय सैन्य पुलिस की संभावित पेशकश पर विचार कर रहे हैं. हालांकि इतनी संख्या को भी उन्होंने पर्याप्त नहीं माना है.

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इस बीच, पेंटागन ने शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर सेना को बहुत कम समय के नोटिस पर सैन्य पुलिस इकाइयों को जाने के लिये तैयार रहने का आदेश दिया. अशांति का नया दौर मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज के शुक्रवार को दिए उस बयान के बाद शुरू हुआ जब उन्होंने कहा था कि वह पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर कार्रवाई करेंगे.

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क्यों उबल रहा है अमेरिका?

वजह है 46 साल के एक अश्वेत नागरिक की पुलिस कस्टडी में मौत. उनका नाम जॉर्ज फ्लॉयड था. जॉर्ज अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के थे. ये घटना सोमवार को मिनीपोलिस शहर में हुई. घटना को लेकर लोगों का गुस्सा तब बढ़ने लगा जब एक वीडियो में देखा गया कि सड़क पर गिरे जॉर्ज के गले को गोरे पुलिस वाले ने घुटने से दबा रखा है. इस दौरान जॉर्ज कहते हैं कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. आखिरकार जॉर्ज की मौत हो जाती है.

जॉर्ज की मौत ने अमेरिका में एक बार फिर से काले और गोरे की बहस छेड़ दी है. अमेरिका में लंबे वक्त से अश्वेत लोग प्रताड़ना और पूर्वाग्रह के शिकार होते रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद 4 पुलिस वालों को नौकरी से हटा दिया गया और जांच का ऐलान कर दिया गया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पुलिस वालों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए.

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घटना को लेकर मिनीपोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने कहा कि अगर जॉर्ज श्वेत होते तो आज जिंदा होते. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि 2020 के अमेरिका में ऐसी घटना सामान्य नहीं होनी चाहिए.

घटना के कई रोज बाद जॉर्ज के गले को घुटना से दबाने वाले पुलिस अधिकारी पर थर्ड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया. लेकिन जॉर्ज के लिए न्याय की मांग करते लोग सड़कों पर उतर आए. अमेरिका के करीब एक दर्जन शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. मिनिसोटा राज्य में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया. राज्य में इमरजेंसी का ऐलान करना पड़ा.

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पुलिस के मुताबिक, जॉर्ज पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 20 डॉलर (करीब 1500 रुपये) के फर्जी नोट के जरिए एक दुकान से खरीदारी की कोशिश की. पुलिस का कहना था कि उन्होंने गिरफ्तारी का शारीरिक रूप से विरोध किया इसके बाद बल प्रयोग किया गया.

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