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क्या राहुल गांधी से राफेल सौदे के बारे में फ्रांस के राष्ट्रपति ने झूठ बोला?

इंडिया टुडे-आजतक को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा था कि कॉमर्शियल एग्रीमेंट की बाध्यता की वजह से पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि कौन झूठ बोल रहा है? राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद में झूठ बोला या फ्रांस के राष्ट्रपति ने उनसे झूठ बोला था?

राफेल पर राहुल ने किया मोदी सरकार पर हमला राफेल पर राहुल ने किया मोदी सरकार पर हमला
दिनेश अग्रहरि
  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 3:34 PM IST

लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे के मामले में सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने खुद उन्हें बताया है कि इस सौदे का विवरण गोपनीय रखने की कोई शर्त नहीं है. दूसरी तरफ, इंडिया टुडे-आजतक को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा था कि कॉमर्शियल एग्रीमेंट की बाध्यता की वजह से पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती.

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ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि कौन झूठ बोल रहा है? राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद में झूठ बोला या फ्रांस के राष्ट्रपति ने उनसे झूठ बोला था?

कांग्रस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फ्रांस के साथ हुई राफेल डील का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने यूपीए की डील को रद्द कर फ्रांस से राफेल विमानों को लेकर जो डील की उसकी वजह से राफेल विमान का दाम 1600 करोड़ हो गया. राहुल ने रक्षा मंत्री की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने पहले कहा था कि राफेल विमान सौदे मे निर्धारित कीमत देश को बताएंगी. लेकिन बाद में उन्होंने फ्रांस के साथ इस सौदे को लेकर गोपनीयता का हवाला देते हुए कहा कि वह दाम नहीं बता सकतीं.

राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री पर झूठ बोलने आरोप लगाते हुए कहा, 'मैं स्वयं फ्रांस के राष्ट्रपति से मिला था, जब वे दिल्ली आए थे. इस मुलाकात के दौरान मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति से पूछा कि क्या इस तरह की कोई डील हुई है, जिसमें राफेल के विमानों के दाम गुप्त रखने की बात है? तो फ्रांस के राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि ऐसी कोई डील नहीं है. आप पूरे देश को राफेल के दाम के बारे मे बता सकते हैं.'

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इंडिया टुडे-आजतक से खास बातचीत में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राफेल सौदे के बारे में कहा था, 'यह एक कॉमर्श‍ियल एग्रीमेंट है. हमारे तमाम प्रतिस्पर्धी होते हैं. हम कारोबारी लिहाज से संवेदनशील जानकारियों को साझा नहीं कर सकते, क्योंकि इसका प्रतिस्पर्धी फायदा उठा सकते हैं. प्रतिस्पर्धी कंपनियां तो ऐसी जानका‍रियों पर नजरें गड़ाए रहती हैं. सौदे की कई जानकारियां कारोबारी लिहाज से संवेदनशील हैं. यह कमर्शियल एग्रीमेंट कुछ कंपनियों के हितों से जुड़ा है, लिहाजा इन पर गोपनीयता जायज है. भारत सरकार यदि चाहे तो कुछ जानकारियां साझा कर सकती है, लेकिन उसे भी कारोबारी संवदेनशीलता का ध्यान रखेगा.'

उन्होंने कहा कि वे भारतीय घरेलू राजनीति के पचड़े में नहीं फंसना चाहते. दोनों देश एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और यह सौदा दोनों देशों के लिए यह फायदेमंद है.

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