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आपसी लड़ाई के बाद राहुल गांधी ने लगाई मध्य प्रदेश कांग्रेस नेताओं की क्लास

साथ ही मध्य प्रदेश के सियासी अंकगणित और सियासी माहौल के लिहाज को भांपते हुए पार्टी राहुल की बस यात्रा की शुरुआत भी ओंकारेश्वर मंदिर से करने जा रही है.

राहुल गांधी राहुल गांधी

मध्य प्रदेश के रीवा में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया के साथ हुई मारपीट की रिपोर्ट पर राहुल गांधी ने खासी नाराजगी जताई है. मामले की खबर मिलते ही राहुल ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को दिल्ली तलब किया और सख्त हिदायत दे डाली.

सूत्रों की मानें तो तकरीबन डेढ़ घंटे की बैठक में राहुल ने दो टूक कहा कि, दीपक बावरिया बतौर प्रभारी महासचिव मेरे प्रतिनिधि हैं. उनके साथ घटी घटना बर्दाश्त के काबिल नहीं है. आगे से ऐसी घटना ना हो और दोषियों के खिलाफ एक्शन हो. साथ ही नेताओं को हिदायत दी कि आपसी झगड़े भूलकर एकजुट होकर चुनाव लड़ें.

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दरअसल, कांग्रेस प्रभारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्जुन सिंह के बेटे और राज्य के वरिष्ठ नेता अजय सिंह के प्रभाव वाले इलाके में कहा कि कांग्रेस में सिंधिया और कमलनाथ में से ही कोई मुख्यमंत्री बनेगा. इसके बाद कथित तौर पर अजय सिंह के समर्थकों ने दीपक बावरिया के साथ बदसलूकी की. हालांकि, अजय सिंह ने साफ किया कि मेरे समर्थकों ने ऐसा नहीं किया, जिन्होंने किया उन पर एक्शन हो.

बैठक में राज्य की कोर कमेटी के सदस्य कमलनाथ, सिंधिया, दिग्विजय, राजेंद्र सिंह, अजय यादव, अजय सिंह मौजूद थे. बैठक में राहुल के तेवर के बाद दिग्विजय, सिंधिया और कमलनाथ समेत तमाम नेताओं ने मीडिया से दूरी बना ली. आखिर सभी जानते थे कि, इस मुद्दे को कोई तूल नहीं देना चाहता.

बैठक के बाद प्रभारी दीपक बावरिया ने कहा कि, बीजेपी के कुछ पेड वर्कर कांग्रेस में घुस आए हैं, जो पार्टी को बदनाम करने के लिए ऐसी हरकतें करते हैं. पार्टी की प्रदेश इकाई ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन लेने जा रही है.

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इसके अलावा राज्य के राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए दिग्विजय के करीबी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को कोर कमेटी में शामिल किया गया है.

बता दें कि सितंबर में शुरू होने वाली यात्रा का प्लान बनाने की जिम्मेदारी कैम्पेन कमेटी के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी गई है, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को इसका संयोजक बनाया गया है.

कुल मिलाकर 15 साल से राज्य सत्ता से बाहर कांग्रेस इसकी वजह पार्टी नेताओं की आपसी मतभेद को मानती रही है, जिसको थामने की कोशिश राहुल लगातार कर रहे हैं. लेकिन वो थमने का नाम नहीं ले रही.

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