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गहलोत की असली जीत 101 नहीं, 125 विधायकों के वोट हासिल करने से होगी

राजस्थान में पिछले एक महीने से दो धड़ों में बंटी कांग्रेस फिर से एक साथ खड़ी नजर आ रही है. शुक्रवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान सीएम गहलोत की असल जीत सदन में 101 विधायकों के वोट से बहुमत परीक्षण पास करने से नहीं बल्कि 125 विधायकों के वोट हासिल करके अपनी सियासी ताकत दिखाने से होगी.

अशोक गहलोत, सचिन पायलट अशोक गहलोत, सचिन पायलट
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 9:19 AM IST

  • राजस्थान में विधानसभा सत्र आज से हो रहा शुरू
  • फ्लोर टेस्ट में CM गहलोत दिखाएंगे अपनी ताकत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे सियासी संघर्ष का अंत हो गया है. राजस्थान में पिछले एक महीने से दो धड़ों में बंटी कांग्रेस फिर से एक साथ खड़ी नजर आ रही है. शुक्रवार को विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें विश्वास मत प्रस्ताव लाया जा सकता है. फ्लोर टेस्ट के दौरान सीएम गहलोत की असल जीत सदन में 101 विधायकों के वोट से बहुमत परीक्षण पास करने से नहीं बल्कि 125 विधायकों के वोट हासिल करके अपनी सियासी ताकत दिखाने से होगी.

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कांग्रेस विधायक दल की बैठक में गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि 19 विधायकों के बिना भी वह विधानसभा में बहुमत साबित कर देते, लेकिन वह खुशी नहीं मिलती. गहलोत ने सीधे तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सचिन पायलट खेमे के बिना बहुमत पास करने की ताकत रखते हैं और उनको इतने विधायकों का समर्थन हासिल था कि वो सदन में बहुमत साबित कर सकते हैं.

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विधानसभा कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा स्पीकर विश्वास मत प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव पर व्यवस्था दे सकते हैं. सदन में विश्वास मत पर बहस के बाद फ्लोर टेस्ट हो सकता है. ऐसे में गहलोत के अपने दम पर बहुमत परीक्षण पास करने के दावे की असल परीक्षा विधानसभा सत्र में फ्लोर टेस्ट के दौरान तब होगी, अगर वो 125 या फिर उससे ज्यादा विधायकों के वोट का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहते हैं.

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राजस्थान विधानसभा में कुल संख्या 200 है. 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 100 सीटें जीतीं. इसके बाद एक सीट उपचुनाव में जीती और फिर बसपा के छह विधायक भी कांग्रेस में शामिल हो गए. इस लिहाज से कांग्रेस की मौजूदा संख्या 107 हो गई है. वहीं, बीजेपी के 72 और तीन उसके सहयोगी आरएलपी के विधायक हैं. इसके अलावा 13 निर्दलीय, दो बीटीपी, 2 सीपीएम और एक विधायक आरएलडी का है.

सचिन पायलट सहित 19 कांग्रेसी और तीन निर्दलीय विधायकों के बगावत के बाद भी अशोक गहलोत कैंप का दावा रहा है कि उनके पास 102 विधायकों का समर्थन है. अब सचिन पायलट खेमे की घर वापसी हो गई है और गहलोत के साथ सारे गिले शिकवे दूर हो गए हैं. ऐसे में गहलोत-पायलट खेमा अब जब एक साथ है तो सदन में कांग्रेस सरकार को बहुमत परीक्षण में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है, लेकिन गहलोत के लिए असल परीक्षा जरूर है.

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हालांकि, कांग्रेस में शामिल हुए बसपा के 6 विधायकों के लिए एक बार फिर से व्हिप जारी किया गया. बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने व्हिप के जरिए विधायकों को हिदायत दी है कि वे सदन में विश्वास मत के दौरान और दूसरी कार्यवाही में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ अपना वोट दें. विधायकों को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन किया तो कार्रवाई होगी. विधायकों को संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2 (1)(B) के तहत अयोग्यता की कार्यवाही की चेतावनी दी गई है.

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वहीं, गहलोत ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कहा कि हम खुद विश्वास मत लेकर आएंगे, वह विधानसभा अध्यक्ष के पास है. बीजेपी वाले अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ रहे हैं, विधानसभा अध्यक्ष देखेंगे कि कैसे क्या किया जाएगा. गहलोत ने इस मौके पर अपना सिक्का भी मनवाया और कहा कि इसी तरह से बीजेपी ने गुजरात में 14 विधायकों का इस्तीफा करवा दिया था, लेकिन उसके बाद भी हमने अहमद पटेल का चुनाव जितवा दिया था. एक बार फिर पूरा देश देखेगा कि किस तरह से हमने बीजेपी की चाल को असफल किया है.

अशोक गहलोत की विधानसभा सत्र में फ्लोर टेस्ट के दौरान अब असल परीक्षा बहुमत पास करने की नहीं बल्कि 125 या उससे ज्यादा विधायकों के वोट हासिल करके होगी. बीजेपी और उसके सहयोगी आरएलपी के तीन विधायक बहुमत परीक्षण के दौरान गहलोत सरकार के खिलाफ वोट करेंगे. बसपा के व्हिप के बाद भी गहलोत अगर पायलट खेमे के विधायकों के साथ-साथ सभी निर्दलीय और अन्य विधायकों के साथ 125 का समर्थन जुटाने में कामयाब रहते हैं तभी जाकर वो असल राजनीतिक जादूगर कहलाए जाएंगे.

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