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कोपभवन में बैठे सचिन पायलट को मनाने क्यों नहीं पहुंचा कांग्रेस की ओल्ड ब्रिगेड का कोई दिग्गज?

राजस्थान से आकर डिप्टी सीएम सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली में पिछले चार दिनों से बैठे हुए हैं. इसके बावजूद न तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पायलट से बात की और न ही पार्टी का कोई दिग्गज उन्हें मनाने होटल पहुंचा. हालांकि, राहुल गांधी टीम जरूर उन्हें साधने और मनाने की कवायद में जुटी है, वो भी तब सक्रिय हुई जब गहलोत अपनी ताकत दिखाने में सफल रहे.

राजस्थान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट राजस्थान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

  • सचिन पायलट की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से नहीं हुई बात
  • सचिन पायलट को साधने में जुटी कांग्रेस की राहुल टीम
  • प्रियंका गांधी के सामने पायलट को मनाने की चुनौती

राजस्थान में कांग्रेस के वर्चस्व की सियासी जंग के पहले राउंड में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों का समर्थन जुटाकर अपनी सरकार पर मंडराते खतरे को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन राजनीतिक संकट का पूर्ण समाधान नहीं हो सका है. डिप्टी सीएम सचिन पायलट आर-पार के मूड में हैं और उन्होंने अपनी मांगों-शर्तों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है.

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सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली में पिछले चार दिनों से बैठे हुए हैं. इसके बावजूद न तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पायलट से बात की और न ही पार्टी का कोई दिग्गज उन्हें मनाने होटल पहुंचा. हालांकि, राहुल गांधी टीम जरूर उन्हे साधने और मनाने की कवायद में जुटी है, जिनमें प्रियंका गांधी से लेकर रणदीप सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन और अवनीश पांडेय शामिल हैं. इसके बाद भी पायलट अपनी बात पर अड़े हुए हैं और बागी तेवर अपनाने के बाद समझौते को तैयार नहीं हैं.

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूरा मामला अशोक गहलोत और अपने भरोसेमंद अहमद पटेल पर छोड़ दिया है. गहलोत ने सोमवार को जयपुर में करीब 105 विधायकों को अपने आवास पर जुटा कर बहुमत खो देने की अटकलों पर विराम लगा दिया. सरकार बचने के बाद पार्टी को बचाने के लिए राहुल गांधी की टीम सक्रिय हुई. वे सचिन पायलट से बात करने और मनाने की मशक्कत में जुटे.

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सचिन पायलट को साधने के लिए मोर्चा प्रियंका गांधी ने खुद संभाला तो रणदीप सुरजेवाला ने पार्टी फोरम पर बात रखने की सलाह देकर सुलह का रास्ता खोला. वहीं, राजीव सातव कांग्रेस नेतृत्व और पायलट के बीच पुल का काम कर रहे हैं. ये सारे कांग्रेस के युवा नेता हैं और राहुल टीम का अहम हिस्सा माने जाते हैं.

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वरिष्ठ पत्रकार यूसुफ अंसारी कहते हैं कि सचिन पायलट कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य माने जाते हैं. इसीलिए पायलट को मनाने के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेता के बजाय राहुल टीम को ही लगाया गया है. हालांकि, इससे पहले कांग्रेस में जब भी कोई नेता रुठ जाता है तो उसे मनाने के लिए सोनिया गांधी की टीम के लोग गुलाब नबी आजाद, अहमद पटेल, आनंद शर्मा जैसे नेताओं को लगाया जाता था, लेकिन इस बार इन सारे नेताओं की जगह राहुल टीम के सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसका सीधा संकेत है कि आपके नेता हैं और आप ही उन्हें मनाने और समझाने का काम करेंगे.

यूसुफ अंसारी कहते हैं कि सिंधिया के बीजेपी में जाने और मध्य प्रदेश सरकार गिरने के बाद कांग्रेस राजस्थान और सचिन पायलट दोनों को खोना नहीं चाहती है. 2018 में चुनाव के बाद सचिन पायलट को मनाने का काम प्रियंका गांधी ने किया था और एक बार फिर सक्रिय होकर उन्हें को मनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह एक बड़ी चुनौती है. प्रियंका गांधी अब पायलट को पार्टी हित की दुहाई देकर मनाने की कोशिश कर रही हैं. वहीं अशोक गहलोत को भी पार्टी हित के नाम पर कुछ नरम होने को लिए इशारा कर रही हैं. प्रियंका गांधी इस सियासी अग्निपरीक्षा में खरी उतरती हैं तो पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ उनकी छवि में इजाफा होगा बल्कि कांग्रेस में भी भूमिका बढ़ सकती है.

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वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर कहते हैं कि सचिन पायलट के राजनीतिक रवैए से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गहरा झटका लगा है. राजनीति में कदम रखते हुए पायलट को उम्मीद से ज्यादा चीजें कांग्रेस में मिल गईं. पायलट को राजनीति विरासत में मिली है और उन्हें धूप-बरसात में आम कार्यकर्ता की तरह दरी बिछाने से लेकर, पोस्टर चिपकाने, नेताओं की खुशामद करने और रैलियों में भीड़ इकट्ठा करने और तमाम कामों वाला संघर्ष नहीं करना पड़ा है. शायद इसीलिए वह इस बात को नहीं समझ पाए और बागी रुख अख्तियार कर लिया, जिसमें सिर्फ और सिर्फ अपना नुकसान किया है.

शकील अख्तर कहते हैं कि कांग्रेस और राहुल गांधी को जब इन नेताओं की सबसे ज्यादा जरूरत है तो ये अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी में बगावत कर रहे हैं जबकि ज्यादातर विधायक गहलोत के साथ खड़े हैं. इसीलिए कांग्रेस की ओर से पायलट से बात का सिलसिला तब शुरू किया जब गहलोत ने अपनी ताकत और समर्थन दिखा दिया है. इतना ही नहीं कांग्रेस के सीनियर नेताओं के बजाय युवाओं की ही पायलट को मनाने के लिए लगाया गया है.

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