
सांसद की ओर से कहा गया है कि रविशंकर प्रसाद ने बीजेपी की ओर से शनिवार को 3 बजे किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में छत्रपति शिवाजी का जिक्र करते हुए बार-बार सिर्फ शिवाजी-शिवाजी बोला, जो छत्रपति शिवाजी के लिए आदरयुक्त नहीं है. सांसद ने इसी बात पर आपत्ति जताई है. संभाजी छत्रपति शिवाजी के वंशज हैं.
माफी मांगने की बात के बाद रविशंकर प्रसाद ने एक ट्वीट भी किया है. केंद्रीय मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा है कि छत्रपति शिवाजी महाराज हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं. भारत की पीढ़ियां हमेशा उन्हें याद रखेंगी.
सांसद की ओर से जारी किए गए पत्र के विषय में लिखा गया है कि तमाम शिवभक्तों की माफी मांगने हेतु. पत्र में कहा गया है कि अपने पत्रकार वार्ता में रविशंकर प्रसाद ने छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र केवल शिवाजी-शिवाजी किया. इससे महाराष्ट्र के शिवभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं.
पत्र में कहा गया है कि आप जैसे जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री को पता होना चाहिेए कि महाराज के नाम का उच्चारण कैसे करना चाहिए. वैसे भी आजकल की राजनीति और राजनेताओं से छत्रपति शिवाजी महाराज का और उनके विचारों से कोई संबंध नहीं है.
जल्द से जल्द मांगें माफी
पत्र में कहा गया है कि आप (रविशंकर प्रसाद) एक जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री हैं. आप जो कहेंगे, लोग उसी का अनुपालन करेंगे. छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का उच्चारण आदरुक्त हो ऐसी स्वाभाविक अपेक्षा आपसे है. कुछ दिनों पहले अमिताभ बच्चन ने भी ऐसी गलती की थी. लोगों ने उन्हें माफी मांगने पर मजबूर किया था. उन्होंने माफी मांगकर शिवभक्तों की भावना का आदर किया था. मेरा आपसे अनुरोध है कि जल्द से जल्द माफी मांगकर हम सभी शिवभक्तों की भावनाओं का आदर करें.
क्या है मामला?
बीजेपी सांसद संभाजी छत्रपति, छत्रपति शिवाजी के वंशज हैं. दरअसल महाराष्ट्र में बीजेपी के एनसीपी के एक धड़े के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद विपक्ष के चौतरफा हमले के बीच पार्टी ने भी दोपहर बाद प्रेस वार्ता कर इसका जवाब दिया था.
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भाजपा मुख्यालय में रविशंकर कहा था कि रविशंकर प्रसाद ने कहा कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की विरासत की बात कर रहे हैं, उनसे मैं बस इतना कहूंगा कि सत्ता के लिए अपने विचारों से समझौता करने वाले तो कम से कम छत्रपति शिवाजी की बात न करें. जो आदरणीय बाला साहब ठाकरे के आदर्शो को जीवित नहीं रख सके, उनके विषय में कुछ नहीं कहना है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि अब कहा जा रहा है कि लोकतंत्र की हत्या की हो गई है. जब शिवसेना स्वार्थ भाव से प्रेरित होकर अपनी 30 साल की दोस्ती तोड़कर अपने घोर विरोधियों का दामन थाम ले तो ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है क्या?