
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नागरिकता संशोधन अधिनियम(CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(NRC) के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(पीएफआई) और स्टूडेंट्स ऑफ इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया(एसआईएमआई) के हाथ होने की बात कही है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हिंसा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(पीएफआई) की भूमिका सामने आ रही है. गृह मंत्रालय सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय करेगा. पीएफआई पर स्टूडेंट्स ऑफ इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया(एसआईएमआई) के साथ संबंध होने सहित कई आरोप लगे हैं.
इसके साथ ही कई राज्यों ने नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है. राज्यों सरकारों के इस बयान पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि संविधान की शपथ लेकर सरकार बनाने वाले गैर संवैधानिक बात कर रहे हैं.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संविधान के 245 धारा में लिखा है कि कुछ विषय पर संसद देश के किसी हिस्से या पूरे देश के लिये कानून बना सकता है. आर्टिकल 19 में लिखा है कि नागरिकता को लेकर कानून संसद बना सकता है . संसद द्वारा बनाया कानून पूरे देश मे लागू होगा. संसद पूरे देश के लिए कानून बना सकता है.
क्या है पीएफआई?
चरमपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का नाम आजकल सुर्खियों में है. उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भड़की हिंसा में पीएफआई का नाम प्रमुखता से सामने आया है. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया 2006 में केरल में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (एनडीएफ) के मुख्य संगठन के रूप में शुरू हुआ था.
केंद्रीय एजेंसियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से साझा किए गए ताजा खुफिया इनपुट और गृह मंत्रालय के मुताबिक, यूपी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ़ और सीतापुर क्षेत्रों में पीएफआई सक्रिय रहा है.
भूमिका की होगी जांच
हाल ही में उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी. नागरिकता संशोधन कानून पर प्रदेश भर में हिंसा में शामिल होने के सबूतों के बाद डीजीपी मुख्यालय ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश गृह विभाग को भेजा था.