
'जाने से पहले, एक आखिरी बार मिलना क्यों जरूरी होता है?'
फिल्म इंडस्ट्री में रोज ना जाने कितने कलाकार अपनी किस्मत अजमाने आते हैं. कुछ यही के होकर रह जाते हैं तो कुछ हमेशा अपनी जगह तलाशते रहते हैं. लेकिन बहुत कम ही होते हैं जो जनता के दिल में उतरकर अपने लिए प्यार को जगह दे पाते हैं. ऋषि कपूर बॉलीवुड के उन्हीं एक्टर्स में से एक रहे, जिन्होंने ना सिर्फ अपने बेमिसाल काम से करियर में अपार सफलता पाई बल्कि दर्शकों के दिलों में जगह भी बना ली.
मेरा नाम जोकर में यंग राज कपूर के रोल में ऋषि को पहली बार देखा गया था. बेहद क्यूट, गोल-मटोल, नीली आंखों वाला लड़का जो अपने अटपटे अंदाज से लोगों की नजरों में आया. किसी को नहीं पता था कि तीन साल बाद 1973 में यही लड़का एक बेहतरीन और बेहद रोमांटिक हीरो के रूप में बड़े पर्दे पर छाएगा और जनता को उससे प्यार हो जाएगा. वो बॉलीवुड के लेजेंड हैं, जिन्होंने दर्शकों को सिनेमा का एक अलग रंग परोसा है.
ऋषि कपूर ने अपने करियर की शुरुआत रोमांटिक हीरो के रूप में की थी. उनके लुक्स से लेकर रोमांटिक अंदाज फैन्स के सिर चढ़कर बोलता था. लेकिन मेरे लिए उनकी अग्निपथ के रौफ लाला की छवि उतनी ही खूबसूरत है जितनी अमर अकबर एंथनी के अकबर इलाहाबादी की थी. लगभग 5 दशकों तक चले ऋषि कपूर के करियर में शायद ही ऐसा रोल हो जो उन्होंने बेहतरीन ढंग से ना निभाया हो.
चाहे वो प्रेम रोग का देवधर हो या कर्ज का मोंटी ओबेरॉय या फिर कपूर एंड संस के दादा या मुल्क के मुराद अली मोहम्मद, ऋषि कपूर अपने हर किरदार को जीते थे. उनके रोमांटिक गाने 70 के दशक से लोगों को झुमाते आ रहे हैं. 'एक मैं और एक तू' पर आखिर किसने डांस नहीं किया होगा. 'खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगे' और 'बचना ऐ हसीनों' पर कौन नहीं झूमा होगा. और डफली वाले...गाने को आखिर कौन ही भूल सकता है.
अपने लगभग 50 साल के करियर में ऋषि कपूर ने फैन्स को सदियों याद रखने लायक फिल्में, गाने और किरदार दिए हैं. प्रेम लोग के देवधर जैसा आशिक हर किसी को चाहिए. मुल्क के मुराद अली मोहम्मद का दर्द हम सभी ने ना सिर्फ पर्दे पर देखा बल्कि अपने सीने में महसूस भी किया. जब रौफ लाला ने विजय की जिंदगी में जहर घोला तो हम सब के दिल जले. उनके कॉमिक अवतार ने सभी को हंसाया.
वो ऋषि कपूर थे, जो अपना प्यार, अपना दर्द, अपनी चाहत, अपना मजाक और अपनी नफरत आपके सीने में कुछ ही पल में उतार सकते थे. उनकी आवाज फिल्मों से लेकर असल जिंदगी में भी बुलंद रही. मैं अभी भी उनका कपूर एंड संस का मजाकिया सीन नहीं भूल सकती, ना ही मुल्क का उनका कोर्टरूम का सीन जहां मुराद अली अपने देशप्रेम को साबित करते हैं और ना ही दामिनी में उनका मस्तीभरा अंदाज.
ऋषि कपूर के गुजर जाने की खबर सुनकर फिल्म कपूर एंड संस का वो सीन याद आया था, जहां वे मरने की एक्टिंग करते हैं और फिर उठकर कहते हैं कि अरे मैं अभी जाने वाला नहीं हूं. काश ऐसा सच में होता. वो उठते और कहते अरे मैं तो मजाक कर रहा था. उनका जाना फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ उनके फैन्स का भी नुकसान है. इंडस्ट्री ने एक कलाकार और हम सभी ने बेहतरीन इंसान को खो दिया है...
ऋषि कपूर को यहां दें श्रद्धांजलि
ऋषि साहब आपके काम, आपकी आदकारी, आपके रुतबे और मजाकिया अंदाज को सलाम. आप चाहे जहां भी रहें आपके फैन्स के दिल का एक हिस्सा आपकी यादों से सजा रहेगा...ये मुल्क कभी नहीं भूलेगा अपना बॉबी.