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धरती से आकाश तक छाए पंडित जसराज भी होंगे साहित्य आजतक 2019 के मंच पर

भारतीय शास्त्रीय संगीत के ऐसे सितारे, जिनकी शोहरत केवल इस धरती पर ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भी गूंज रही, वही पंडित जसराज होंगे साहित्य आजतक के मंच पर

संगीत मार्तंड पंडित जसराज [फाइल फोटो] संगीत मार्तंड पंडित जसराज [फाइल फोटो]
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 5:08 PM IST

नई दिल्लीः वह भारतीय शास्त्रीय संगीत के ऐसे सितारे हैं जिनकी शोहरत केवल इस धरती पर ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भी गूंज रही. उनके नाम पर अंतरिक्ष के एक ग्रह का नाम रखा जा चुका है. हम बात कर रहे हैं पंडित जसराज की, जो साहित्य आजतक 2019 के मंच पर होंगे.

सुरों के सरताज, सुरीले संत, रागों के रसिया और पद्म भूषण, पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से अलंकृत संगीत मार्तण्ड पंडित जसराज के सुरीली आवाज़ के कायल भारत ही नहीं अपितु दुनियाभर के लोग हैं. साहित्य आजतक के मंच पर पंडित जसराज अपनी उपलब्धियों, अपनी साधना और जीवन अनुभवों जैसे विषय पर आपसे मुखातिब होंगे.

28 जनवरी 1930 हरियाणा के हिसार ज़िले में पंडित जसराज एक ऐसे परिवार में पैदा हुए, जिनके पुरखों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को न केवल जिंदा रखा अपितु उसे पाल पोष कर वट वृक्ष के समान इतना बड़ा कर दिया कि उसके नाम का डंका पूरे दुनिया में बजता हैं.

मेवाती घराने के सबसे चमकते सितारे संगीत के सूर्य जसराज की आवाज़ साढ़े तीन सप्तकों में एक विशिष्ट पहचान रखती है. मुर्कियां, गमक, मींड और छूट की तानें उनकी गायकी की ख़ासियत हैं. उनके सुरों का जादू कृष्ण की मुरली की तरह है. जो सुनता है, वह अपनी सुध-बुध बिसरा कर उनके संगीत रस में खो जाता हैं.

साहित्य आजतक सुर, कला, साहित्य और संस्कृति का महाकुंभ यों ही नहीं है. पंडित जी मंच पर होंगे तो उनके सुरों की धुन का गूंजना स्वाभाविक है. संगीत के रसिक उन्हें रसराज कहते हैं. उनके मुंह से राग भैरव में ‘मेरो अल्लाह मेहरबान’ सुनते हुए लगता है कि ईश्वर और अल्लाह के बीच धर्म की दीवार टूट गई हो, और यह जगत परमात्मा में एकाकार हो गया है.

पंडित जसराज ने अपनी जादुई आवाज़ में फ़िल्म 1920 का यह गाना ‘वादा तुमसे है वादा’ भी गाया था, जिसमें उनकी सुरीली आवाज़ ने आज की युवा पीढ़ी को मदहोश कर दिया था.

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साहित्य आजतक के मंच की शोभा बढ़ाने वाले पंडित जसराज के गायन में पाया जाने वाला उच्चारण मेवाती घराने की 'ख़याल' शैली की ख़ासियत को झलकाता है. उन्होंने बाबा श्याम मनोहर गोस्वामी महाराज के साथ 'हवेली संगीत' की कई नई बंदिशों की रचना भी की है.

इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने जब पंडित जसराज के नाम पर एक ग्रह का नाम रखा, तो यह भारत और ख़ासतौर से शास्त्रीय संगीत जगत के लिए गौरव की बात बनी. धरती से आकाश तक चमक रहे  ‘पंडित जसराज’ को सुनिए 'साहित्य आजतक 2019 ' के मंच पर.

तो देर किस बात की है, सोचिए नहीं, साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019 ' का रजिस्ट्रेशन है बिल्कुल मुफ्त. साहित्य का यह जलसा हर साल की तरह इस साल भी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 1 नवंबर से 3 नवंबर को लगने जा रहा है.

साहित्य आजतक 2019 के लिए फ्री रजिस्ट्रेशन की शुरुआत हो चुकी है. जल्दी ही यहां दिए लिंक साहित्य आजतक 2019 पर क्लिक करें, और रजिस्ट्रेशन करा लें या फिर हमें 8512007007 नंबर पर मिस्ड काल करें.

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