
दिल्ली के मशहूर पांच सितारा होटल ताज मानसिंह की लीज अब टाटा ग्रुप के नाम रिन्यू नहीं होगी. इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ग्रुप की अपील खारिज कर दी है. टाटा ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई थी और कहा था एनडीएमसी होटल का ई-ऑक्शन नहीं कर सकती, क्योंकि होटल की लीज उसके नाम पर है. साथ ही इसे रिन्यू किया जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एनडीएमसी को होटल की नीलामी करने का अधिकार है. टाटा का ताज ग्रुप नीलामी में हिस्सा ले सकेगा और अगर वह नीलामी में होटल चलाने का अधिकार नहीं हासिल कर पाता है, तो उसको 6 महीने में होटल खाली करना होगा. इससे पहले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एनडीएमसी को होटल की लीज टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के नाम रिन्यू करने पर विचार करने को कहा था, लेकिन एनडीएमसी ने लीज रिन्यू करने से मना कर दिया.
टाटा ग्रुप ने ब्रांड बनाने की दी थी दलील
टाटा ग्रुप की दलील थी कि उनकी कंपनी ताज ग्रुप ने ताज मानसिंह को एक ब्रांड बनाने के लिए सालों से लगातार निवेश किया है. लिहाजा इसकी नीलामी एनडीएमसी नहीं कर सकता है. ताज ग्रुप के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे
ने अदालत में कहा था कि एनडीएमसी ने होटल पर महज़ 6 करोड़ निवेश किया था, जबकि ताज ग्रुप ने होटल पर 129 करोड़ खर्च किए और 400 करोड़ रुपये लाइसेंस के तौर पर दिए. ऐसे में एनडीएमसी के साथ हुए
समझौते के मुताबिक ताज की लीज रिन्यू होनी चाहिए. ताज के मुताबिक वह सिर्फ एक लीज होल्डर नहीं, बल्कि ताज ग्रुप ने एनडीएमसी के साथ मिलकर ताज मानसिंह होटल को एक ब्रांड बनाया. इसलिए ताज को कैसे
ई-ऑक्शन में भाग लेने के लिए कहा जा सकता है.