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कहा जाता है कि बाइक रेसिंग लड़कियों के लिए नहीं होती है, लेकिन इस बात को बेंगलुरू की रहने वाली ऐश्वर्या पिसाय ने गलत साबित कर दिखाया. ऐश्वर्या को अब लोग बाइक राइडर के नाम से जानते हैं. 22 साल की ऐश्वर्या के लिए एक बाइक राइडर बनने का सफर इतना आसान नहीं था. हमारे समाज में जब भी कोई लड़की कुछ अलग करने की सोचती है, तो समाज उसमें जरूर दखल देता है.
वहीं ऐश्वर्या को जब लगा कि वह एक बाइक राइडर बन सकती हैं, तो लोगों ने काफी कुछ कहना शुरू कर दिया. जैसे- बाइक रेसिंग लड़कों का शौक है. वहीं अगर रेसिंग के दौरान उन्हें चोट लग गई तो उनका भविष्य बिगड़ जाएगा. लेकिन हुनर और बुलंद इरादों को कौन रोक पाया है. लोग कहते चले गए और ऐश्वर्या आगे बढ़ती गई.
...जब शुरू किया बाइक चलाना
ऐश्वर्या ने 18 साल की उम्र में बाइक चलाना सीखा. उनके मुताबिक, बाइक चलाना उनके लिए सांस लेने जितना ही जरूरी है. अपने इस शौक के चलते ऐश्वर्या एक रेस में अपनी कॉलर बोन को भी चोटिल कर चुकी हैं, लेकिन वह रुकी नहीं.
...जब निकाला गया घर से
एक वेबसाइट के अनुसार जब 12वीं कक्षा में जब वह फेल हो गईं, तब उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था. इसके बाद वह अपनी मां के साथ रहने लगीं. मां ने ऐश्वर्या का पूरा साथ दिया. जिसके बाद उन्होंने काम और पढ़ाई, दोनों को जारी रखा. वह हर वीकेंड, अपने सीनियर्स के साथ बेंगलुरु के आस-पास घूमने जाने लगीं. इनमें से ज्यादातर ट्रिप्स बाइक पर ही होती थीं और इस दौरान ही उन्होंने बाइक चलाना सीख लिया.
...पैसे जुटा कर खरीदी बाइक
अब बाइक राइडर बनना था, तो खुद की बाइक होनी भी बहुत जरूरी थी. इसके लिए ऐश्वर्या ने पैसे इकट्ठा करना शुरू किया ताकि वह अपनी खुद की बाइक खरीद सकें. उन्होंने ड्यूक 200 बाइक खरीदी और फिर वह रेगुलर बाइक राइडिंग करने लगीं. ऐश्वर्या बताती हैं कि जब वह बाइक पर निकलती थीं, तब लोग उन्हें बड़ी हैरानी के साथ देखते थे.
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....रेसिंग करियर का टर्निंग पॉइंट
ऐश्वर्या ने एमटीवी के ‘चेज द मॉनसून’ प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने कच्छ के रण से चेरापूंजी तक की यात्रा 24 दिनों में पूरी की. ऐश्वर्या की इस सफलता के बाद उनके दोस्तों ने उन्हें बढ़ावा देना शुरू किया और उन्हें ट्रेंनिग लेने की सलाह दी. दोस्तों का साथ मिलने के बाद ऐश्वर्या ने रेसिंग स्कूलों पर रिसर्च करना शुरू किया और आखिरकार एक रेसिंग स्कूल से उन्होंने अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी.
ट्रेंनिग का एक साल गुजर गया और फिर उन्होंने अपनी पहली रेस में हिस्सा लिया, जिसमें उन्हें बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. वह मानती हैं कि यही उनके रेसिंग करियर का टर्निंग पॉइंट था. जिस दिन वह फेल हुईं, उस दिन से उन्होंने अपनी ट्रेनिंग को और भी गंभीरता से लेना शुरू किया. उन्होंने अपने कोच जीवा रेड्डी से उन्हें और कड़ी ट्रेनिंग देने के लिए कहा.
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इसके अगले ही दिन ऐश्वर्या ने जिम जॉइन कर लिया और वह हर वीकेंड रेसिंग ट्रैक पर प्रैक्टिस के लिए जाने लगीं. वहीं कोच के साथ-साथ उनकी मां ने भी ऐश्वर्या का खूब साथ निभाया. ऐश्वर्या ने 4 चैंपियनशिप्स (रेड द हिमालय 2017, दक्षिण डेयर 2017, इंडियन नैशनल रैली चैंपियनशिप और टीवीएस आपाचे लेडीज वन मेक चैंपियनशिप 2017) की विमिंज कैटेगरी में खिताब अपने नाम किया.
10 साल से पैरालाइज्ड हैं प्रिंसिपल, घर से चलाती हैं स्कूल
ये खिताब अपने नाम हासिल करना किसी सपने से कम नहीं थी. घर में जो लोग उनके खिलाफ थे. वह आज उनकी वाहवाही करते हैं. आज रेसिंग ट्रैक पर घंटों की प्रैक्टिस ने ऐश्वर्या को बेहतर बनाया है. उन्होंने बताया कि वह रोज कई घंटे अपनी फिटनेस पर खर्च करती हैं, जिसमें जिम जाना और मेडिटेशन आदि शामिल रहता है. ऐश्वर्या इस बात पर खास जोर देती हां कि महिलाएं, पुरुषों से कहीं भी कम नहीं है.