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बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में शामिल होंगे SC के सभी जज, क्या पिघलेगी मनमुटाव की बर्फ?

मंगलवार शाम सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की नई कार्यसमिति की ओर से बार की पत्रिका का ताजा अंक SCBA Times लॉन्च किया जाएगा. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा समेत सभी जज मौजूद होंगे. इस अवसर पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और वित्त मंत्री अरुण जेटली भी होंगे.

सुप्रीम कोर्ट का विवाद सुप्रीम कोर्ट का विवाद
वंदना भारती/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

मंगलवार शाम सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की नई कार्यसमिति की ओर से पत्रिका का ताजा अंक SCBA Times लॉन्च किया जाएगा. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा समेत सभी जज मौजूद होंगे. इस अवसर पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और वित्त मंत्री अरुण जेटली भी होंगे.

सुप्रीम कोर्ट जजों के बीच मनमुटाव का मुद्दा सामने आने के बाद यह पहला मौका होगा, जहां SC के सभी जज एक मंच पर मौजूद होंगे. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बार एसोसिएशन की नई कार्यसमिति के मंच पर जजों के बीच जमी बर्फ पिघलती है या नहीं.

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क्या था पूरा मामला

दरअसल, जजों के बीच विवाद की असली वजह रोस्टर को लेकर है. चार जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहा कि चीफ जस्ट‍िस कुछ खास मामलों को अपनी पसंद के जजों को सुनवाई के लिए भेजते हैं.

इसे लेकर इन जजों और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच विवाद बहुत पहले से ही चल रहा था. लेकिन 12 जनवरी को इन जजों का मतभेद खुलकर सबके सामने आ गया. हालांकि इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ में इन चार वरिष्ठ जजों का नाम नहीं होना भी मनमुटाव का एक कारण माना जा रहा है. जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जजों में हैं. इन चारों जजों के प्रेस कांफ्रेंस से यह बात स्पष्ट हो गई कि सुप्रीम कोर्ट में जजों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

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सुलह की कोश‍िश

हालांकि जजों के बीच मनमुटाव और विवाद को सुलझाने की कई दफे कोश‍िश की गई. इस काम के कई कुछ जज सामने आए. वहीं बार ने भी प्रयास किया. यहां तक कि बार काउंसिल ने भी कोशिश की. इसके बाद जजों के बीच कभी चाय तो कभी खाने पर मीटिंग का दौर चलता रहा. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. बर्फ ऐसी ठोस जमी है कि पिघलती ही नहीं.

सरकार ने प्रत्यक्ष तौर पर न्यायपालिका के आपसी झंझट में पैर ना फंसाने का रुख साफ कर दिया है. लेकिन संयोग से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के इस मंच पर सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री, पेशे से वकील और सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्य भी मौजूद होंगे. ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि किसी भी पक्ष से शायद कोई संदेश आए, शायद बात बन जाए.

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