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हरियाणा पंचायत चुनाव स्थगित, सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पंचायत चुनाव को तत्काल स्थगित करने के आदेश दिए हैं. मंगलवार को इस ओर आदेश देते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है. साथ ही स्पष्ट किया कि अदालत के फैसले के बाद निर्वाचन आयोग नए सिरे से चुनाव की घोषाणा करेगा.

नई दिल्ली स्थि‍त सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली स्थि‍त सुप्रीम कोर्ट
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2015,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पंचायत चुनाव को तत्काल स्थगित करने के आदेश दिए हैं. मंगलवार को इस ओर आदेश देते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है. साथ ही स्पष्ट किया कि अदालत के फैसले के बाद निर्वाचन आयोग नए सिरे से चुनाव की घोषाणा करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पंचायत चुनाव को लेकर पंचायती राज कानून में किए गए बदलाव पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणि‍क योग्यता के नियम पर अदालत के फैसले के बाद ही चुनाव हो सकता है. जबकि हरियाणा सरकार ने अदालत में कहा कि शैक्षणि‍क योग्यता के नियम को वापस नहीं लिया जाएगा.

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गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को ही कोर्ट ने राज्य सरकार से चुनाव को चार हफ्तों के लिए स्थगित या फिर शैक्षणि‍क योग्यता के नियम को वापस लेने की बात की थी. सोमवार को केंद्र सराकर ने भी कोर्ट से कहा कि चुनाव को लेकर नामांकन शुरू हो चुका है और दूसरी चुनावी प्रक्रिया भी चल रही हैं, ऐसे में रोक हटाई जानी चाहिए.

कहां फंसा है पेच
राज्य सरकार की ओर से नियमों में संशोधन पर पंचायत चुनाव लड़ने के लिए चार शर्तें लागू की गई थीं. इसमें महिलाओं और एससी वर्ग के लिए शैक्षिक योग्यता 8वीं और बाकी सभी के लिए 10वीं पास कर दिया गया है.

सोमवार को अदालत ने कहा कि इस नियम से राज्य की 50 फीसदी आबादी चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएगी. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, 'आजादी के 65 साल से अधि‍क समय बीतने के बावजूद अगर राज्य की 50 फीसदी आबादी अशि‍क्षि‍त है तो नाकामी है. क्या हम एक विकासशील देश का हिस्सा हैं?'

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और क्या कुछ है नए कानून में
सरकार की ओर से नियमों में जो संशोधन किए गए हैं, उनमें पर्चा भरने से पहले घर में टॉयलेट होना, सहकारी बैंक का लोन और बिजली बिल समेत सभी सरकारी देनदारियों का भुगतान निपटाना व 10 साल की सजा के प्रावधान वाले मामलों में प्रत्याशी का चार्जशीटेड न होना शामिल है. 21 साल बाद हरियाणा पंचायतीराज एक्ट-1994 में यह पहला संशोधन किया गया था.

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