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सलाम! एक बच्चे को पढ़ाने के लिए 50 KM दूर जाता है ये शख्स

यह कहानी एक 29 साल के सरकारी टीचर की है, जो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और वो एक बच्चे को पढ़ाने के लिए 50 किलोमीटर दूर से आते हैं.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
मोहित पारीक
  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

ये खबरें काफी आम है सरकारी स्कूल में टीचर्स टाइम से नहीं पहुंच रहे हैं या बच्चों को अच्छे से पढ़ाया नहीं जा रहा है, लेकिन आपको एक ऐसे टीचर की कहानी बता रहे हैं जो एक बच्चे को पढ़ाने के लिए किलोमीटर दूर से आते हैं. यह कहानी एक 29 साल के सरकारी टीचर की है, जो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और वो एक बच्चे को पढ़ाने के लिए 50 किलोमीटर दूर से आते हैं.

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शिक्षक रजनीकांत मेंधे पिछले आठ साल से इस स्कूल में पढ़ा रहे हैं और वो जिस रास्ते से स्कूल आते हैं वो भी बहुत खतरनाक है. उन्हें बच्चे तक पहुंचने में भी काफी वक्त लगता है. उन्होंने टीओआई से कहा है कि एक बार स्कूल की छत से मुझ पर सांप गिर गया था और कुछ दिनों बाद वो मोटरसाइकिल से सांप पर गिर गए थे. उनका कहना है कि अब उन्हें नहीं लगता कि वो तीसरी बार बच पाएंगे. खास बात ये है कि वो इतना लंबा सफर अपनी बाइक से पूरा करते हैं.

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कौन है छात्र?

पिछले दो साल से 8 साल का युवराज ही इस स्कूल में पढ़ाई कर रहा है. युवराज का एक दोस्त भी पिछले साल कोल्हापुर चला गया जिससे स्कूल अब वो अकेला छात्र है.

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कहां है स्कूल

बता दें कि यह स्कूल महाराष्ट्र के भोर में है, जो कि पुणे से 100 किलोमीटर दूर है. वहीं यह स्कूल 1985 में बनाया गया था और कुछ सालों से यहां बिना छत के सिर्फ चार दीवारी ही बची है. इससे पहले स्कूल में 11 छात्र थे, लेकिन कई बच्चों को ने पढ़ाई छोड़ दी. वहीं कई बच्चे मजदूरी करने के लिए गुजरात चले गए हैं.

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गांव के क्या हैं हालात?

इस शिक्षक ने स्कूल की सुविधाएं ठीक करने के लिए काफी काम किया है. स्कूल में ई-लर्निंग की भी कोशिश की गई है. वहीं स्कूल में सौर-ऊर्जा के पैनल दिए गए हैं, जिसे स्कूल में बिजली का काम चलता है.

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