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...तो उत्तर प्रदेश में बसेंगे मिनी जापान और मिनी साउथ कोरिया!

लॉकडाउन के बीच कैसी है उत्तर प्रदेश में इंडस्ट्री की हालत? चीन से आने वाली विदेशी कंपनियों को किस तरह से आकर्षित करेगा यूपी? इन तमाम मसलों पर aajtak.in ने यूपी के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना से विस्तार से बात की. गौरतलब है कि कोरोना संकट की वजह से चीन से दुनिया की कई प्रमुख कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन से बाहर ले जाने की तैयारी कर रही हैं.

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना
दिनेश अग्रहरि
  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2020,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

  • चीन से जा रही कंपनियों को लुभाने के लिए एक्टिव हुई यूपी सरकार
  • औद्योगिक विकास मंत्री का दावा-उद्योगों में शुरू हो गया 85% काम
  • लौटे प्रवासी मजदूरों की मैपिंग जारी, यहीं काम देने की होगी कोशिश

कोरोना संकट की वजह से चीन से दुनिया की कई प्रमुख कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बाहर ले जाने की तैयारी कर रही हैं. ये भारत में आएं तो इनका ठिकाना यूपी हो, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार स​क्रिय हो गई है. लॉकडाउन के बीच कैसी है यूपी में इंडस्ट्री की हालत? चीन से आने वाली विदेशी कंपनियों को कैसे आकर्षित करेगा यूपी? इन सवालों पर aajtak.in ने यूपी के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना से बात की.

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यूपी की इंडस्ट्री में करीब 84 फीसदी उत्पादन शुरू

सतीश महाना ने बताया कि उत्तर प्रदेश की इंडस्ट्री में करीब 85 फीसदी उत्पादन शुरू हो गया है और उम्मीद है कि जल्द ही बाकी का काम भी शुरू होगा यानी हालात सामान्य हो जाएंगे. उनके मुताबिक 'फरवरी में जितनी इंडस्ट्री चल रही थीं उस समय इंडस्ट्रियल फीडर पर बिजली की खपत 8630 मेगावॉट थी, अप्रैल में यह 3198 मेगावॉट यानी लगभग 35 फीसदी रह गई, तब फर्टिलाइजर और गन्ना मिलें जैसी बहुत जरूरी यूनिट ही चल रही थी. अब 21 मई को फिर 71,60 मेगावॉट खपत हो गई यानी हम बिजली की खपत के आधार पर यह कह सकते हैं कि 84 फीसदी इंडस्ट्री चलने लगी है, हम यह मान सकते हैं कि लेबर और कंटेनमेंट जोन तथा सप्लाई चेन बंद होने की वजह से बाकी 15-16 फीसदी उत्पादन नहीं हो रहा, लेकिन वह भी लाइन पर आ जाएगा. कंज्यूमर मार्केट बंद था. सरकार पूरे देश में बाजार खोलने की कोशिश कर रही है. इनके खुलने के बाद बाकी 16 फीसदी भी शुरू हो जाएंगे. यानी हालात नॉर्मल हो जाएंगे.' उन्होंने कहा कि कानपुर जैसे कई शहरों में लेबर वापसी की समस्या नहीं है.'

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बाहर से आने वाले मजदूरों को काम देने के लिए की जा रही मैपिंग

मुंबई और अन्य शहरों से जो लेबर आए हैं उनको राज्य में ही काम देने के लिए सरकार क्या कर रही है? इस सवाल पर महाना ने कहा, 'जो बाहर से आए हैं अभी उनकी सबसे बड़ी चाह अपने घर पहुंचने की है. हम मैंपिंग कर रहे हैं और यह देख रहे हैं कि वे क्या काम करते थे. उनसे एक फॉर्म भरा रहे हैं. इंडस्ट्री और लेबर डिपार्टमेंट ने मिलकर एक पोर्टल बनाया है, इस पोर्टल के द्वारा मजदूर को यह पता चलेगा कि उसके लायक काम कहां मिल रहा है और एम्प्लॉयर यह देख सकेगा कि उसकी जरूरत का व्यक्ति या लेबर कौन है, जिसे वह काम दे सकते हैं.'

एडवांटेज यूपी को करेंगे शोकेस

चीन से आने वाली कंपनियों को कैसे आकर्षित किया जाएगा? ये कंपनियां अगर भारत आएं तो यूपी में क्यों आएंगी? इस सवाल पर सतीश महाना ने कहा, 'यह सही बात है कि इसके लिए सभी राज्य प्रतिस्पर्धा करेंगे, लेकिन हमारा फोकस एडवांटेज यूपी पर होगा. हम यूपी के एडवांटेज को शोकेस करेंगे. हमारे पास बहुत बड़ा कंज्यूमर बेस है. हमारे पास डेडिकेटेड कॉरिडोर हैं, फर्टाइल लैंड है, एनसीआर जैसे महत्वपूर्ण राजधानी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा हमारे प्रदेश में है. अगर फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री हमारे पास आए तो कई चीजों की पैदावार यूपी में बहुत अच्छी है, जैसे दूध उत्पादन में हम नंबर वन हैं.'

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कई सुविधाएं भी मिलेंगी

सुविधाएं देने के सवाल पर महाना ने कहा, 'अभी विदेशी निवेश करने वाले कंपनियों की रिफर्बिश्ड मशीनों को निवेश का हिस्सा नहीं माना जाता. हम इस पर विचार कर रहे हैं कि किस तरह से वैल्यूएशन कर रिफर्बिश्ड मशीनों को भी निवेश का हिस्सा माना जाए ताकि विदेशी कंपनियों को कुछ और इंसेन्टिव मिल सके.'

जापान, दक्षिण कोरिया के लिए यूपी में बनेंगे खास क्लस्टर

हाल में जापान सरकार ने 2.2 अरब डॉलर का एक फंड बनाया है जिसका उद्देश्य चीन से हटने वाली जापानी कंपनियों को दूसरे देशों में लोकेट करने में मदद करना है. यूपी सरकार चाहती है कि इस निवेश का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा राज्य में आए. इसके लिए यूपी सरकार हाल में कुछ देशों से डेडिकेटेड निवेश हासिल करने के लिए जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे कई डेस्क बना रही है.

ये डेस्क इन देशों के लोगों से बात कर उनकी जरूरतों पर विचार करेगी. जैसे जापान को 2-3 हजार एकड़ में कैसे टाउनशिप बनाने की सुविधा दी जाए, एक मिनी जापान विकसित करने की बात हो, क्योंकि वे टैक्स छूट से ज्यादा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और अपने कर्मचारियों के लिए अनुकूल माहौल चाहते हैं.'

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यूपी में सबसे ज्यादा MoU कारगर हुए

यूपी सरकार ने पिछले जो इनवेस्टर्स समिट किए थे उनमें 1000 से ज्यादा समझौते (एमओयू) हुए थे. उनमें से​ कितने जमीन पर कारगर हुए, इस सवाल के जवाब में सतीश महाना ने कहा, 'ऐसे लगभग 30 फीसदी एमओयू कारगर हुए हैं. आप दुनिया में एमओयू का औसत देखें तो 12-15 फीसदी से ज्यादा कारगर नहीं होते, लेकिन यूपी सरकार ने इसे 30 फीसदी तक पहुंचाया है और बाकी के लिए भी फॉलोअप कर रहे हैं.'

डिफेंस में FDI बढ़ने का मिलेगा फायदा

सतीश महाना ने कहा, 'केंद्र सरकार ने डिफेंस में एफडीआई की जो सीमा बढ़ाई है, उसका हमें लाभ मिलेगा. हमारे यहां डिफेंस का इंडस्ट्रियल कॉरिडोर है. इसलिए उम्मीद है कि उसमें ज्यादा से ज्यादा निवेश आएगा. डिफेंस के लिए भी फरवरी में करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश का समझौता हुआ था. लेकिन इसके बाद लॉकडाउन आ गया, इस वजह से इसमें अभी कुछ काम नहीं हो पाया है. सरकार का काम है इंडस्ट्री को बुलाना, उनकी समस्याओं को दूर करना जो हम कर रहे हैं. हम भरसक प्रयास कर रहे हैं कि पॉजिटिव डायरेक्शन में हम बढ़ें.'

MSME को सीधा फायदा मिला

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केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है, लेकिन इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि यह लोन के रूप में ही है और सरकार ने उन्हें कोई सीधा फायदा नहीं पहुंचाया है. इस सवाल के जवाब में सतीश महाना ने कहा, 'जो पीएफ में 24 फीसदी सरकार दे रही है, उसमें 12 फीसदी तो इंडस्ट्री की ही बचत है. 100 रुपये में 12 रुपये इंडस्ट्री को देने पड़ते थे और 12 फीसदी कर्मचारी को. तो अगर 12 फीसदी की यह रकम इंडस्ट्री की जगह सरकार दे रही है तो यह तो सीधे उनको फायदा ही है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने अपने राहत पैकेज में उनके लिए 3 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज देने का ऐलान किया है.'

राज्य सरकार क्या एमएसएमई को कोई अतिरिक्त सहायता दे सकती है? इस सवाल पर महाना ने कहा, 'सरकारों की जो स्थिति है, वह किसी से छिपी नहीं है. सरकार के पास टैक्स से ही रेवेन्यू आता है. दो महीने तक तो राज्य सरकार का रेवेन्यू 10 फीसदी भी नहीं आया, तो हम बड़ी आर्थिक मदद कैसे कर सकते हैं?'

श्रम सुधार थे जरूरी

यूपी सरकार के श्रम सुधारों की आलोचना ट्रेड यूनियन और विपक्ष के लोग कर रहे हैं. ऐसी क्या मजबूरी थी कि सरकार को लॉकडाउन के बीच यह कदम उठाना पड़ा? इस पर प्रदेश के उद्योग मंत्री ने कहा, 'मजदूरों के हितों का संरक्षण करना सरकार और इंडस्ट्री दोनों का काम है. इंडस्ट्री को यह समझना होगा कि मजदूर बचेंगे तो उनका भी सर्वाइवल होगा, इसी तरह से लेबर को भी यह समझना होगा कि अगर इंडस्ट्री रहेगी तो उसे काम मिलेगा. प्रदेश सरकार विदेशी निवेश बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इंडस्ट्री यह चाहती है कि श्रम कानून स्तरीय हों ताकि उनका कारोबार सुचारू तरीके से चल सके. '

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उन्होंने कहा, 'यह कठिन समय है यह सबको स्वीकार करना होगा, चाहे बिजनेसमैन हो, नौकरीपेशा, या कोई और. पहले महीने 95 फीसदी इंडस्ट्री ने तनख्वाह दी, लेकिन धीरे-धीरे यह क्रम घटता गया. इसकी वजह यह है कि इंडस्ट्री को 2-3 महीने तक कोई इनकम नहीं हुई वो सैलरी कैसे देगी? यह हमें भी समझना होगा. मेरे ख्याल से इंडस्ट्री की यह बात जायज है.'

यूपी से प्रतिभाओं का पलायन क्यों नहीं रुकता

यूपी की प्रतिभाएं बेंगलुरू से लेकर सिलिकॉन वैली तक सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में छाई हुई हैं. यूपी सरकार यह कोशिश क्यों नहीं करती कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री यूपी के कानपुर, बनारस, गोरखपुर जैसे छोटे शहरों में आए ताकि यहां के नौजवान को पलायन न करना पड़े? इस सवाल सतीश महाना ने कहा, 'हम तो लगातार कोशिश कर रहे हैं कि यूपी में इंडस्ट्री आए. हमने पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों के लिए ज्यादा इन्सेंटिव दिए, ताकि इन ​इलाकों में भी इंडस्ट्री का ज्यादा से ज्यादा विकास हो. जितना प्रोत्साहन दिया जा सकता है, हम कर रहे हैं, हम ऐसे इलाकों को प्रमोट कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय इंडस्ट्री को ही करना है.'

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