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योगी सरकार के एक साल में ही सूबे में फीका पड़ने लगा भगवा का सियासी रंग

पिछले साल 19 मार्च को योगी सरकार ने यूपी में कामकाज संभाला था. आज इस सरकार के एक साल पूरे हो गए. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में जिस मोदी लहर पर सवार हो 14 साल के सत्ता के वनवास को खत्म किया था, वो एक साल में ही मंद पड़ने लगी है.

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 7:38 AM IST

पिछले साल 19 मार्च को योगी सरकार ने यूपी में कामकाज संभाला था. आज इस सरकार के एक साल पूरे हो गए. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में जिस मोदी लहर पर सवार हो 14 साल के सत्ता के वनवास को खत्म किया था, वो एक साल में ही मंद पड़ने लगी है. इस एक साल में पहले नगर निकाय चुनाव में मेरठ और अलीगढ़ जैसी बीजेपी की परंपरागत नगर निगम सीट पर मात मिली और अब दो हाईप्रोफाइल सीट भी हाथ से निकल गई. लोकसभा उपचुनाव में फूलपुर और गोरखपुर में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

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2014 और 2017 के नतीजे

बता दें कि बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव में सूबे की 80 संसदीय सीट में 71 पर जीत दर्ज की थी. हाल ही में उपचुनाव में हार के साथ ही दो सीटें घट गई हैं. इसी तरह 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की कुल 403 सीटों में 311 पर अकेले जीत दर्ज की थी. वहीं सहयोगी दलों ने 13 सीटें जीतीं, जिन्हें मिलाकर 324 सीटों होती है.

वहीं विपक्षी दलों का पूरी तरह सफाया हो गया था. लोकसभा में कांग्रेस को 2, सपा को 5 सीटें मिली थी और बसपा का खाता तक नहीं खुला था. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 7, बसपा को 19 और सपा को 47 सीटें मिली थीं.

मेरठ और अलीगढ़ में हार

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विधानसभा चुनाव के बाद योगी की पहली अग्निपरीक्षा नगर निकाय चुनाव बना. सीएम योगी सहित उनकी पूरी कैबिनेट ने जमकर प्रचार किया. इसके बावजूद मेरठ और अलीगढ़ नगर निगम सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा. इन दोनों सीटों पर बीएसपी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की. अलीगढ़ नगर निगम सीट पर पिछले 22 साल से बीजेपी का कब्जा था. मेरठ की सीट पर बीजेपी का 15 साल से कब्जा था. इसके बावजूद योगी के सत्ता में रहने के बाद भी बीजेपी बचा नहीं सकी.

शहरी मतदाताओं पर बीजेपी की पकड़ कमजोर

सूबे की नगर पालिका की 198 सीट में से बीजेपी सिर्फ 67 जीत सकी, जबकि सपा 45, बीएसपी 27, कांग्रेस 9 और 42 पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते. इसी तरह नगर पंचायत की कुल 438 सीटों में से बीजेपी को 100, सपा 83, बीएसपी 45, कांग्रेस 17, निर्दलीय 181 और 10 सीटों पर अन्य ने जीत दर्ज की. बता दें कि शहरी वोट मतदाता को बीजेपी का मूल वोटर माना जाता है. ऐसे में नगर पालिका और नगर पंचायत में सपा और बसपा का जीतना बीजेपी के लिए चिंता का सबब है.

बीजेपी के दुर्ग में दरार

गोरखपुर लोकसभा सीट जो बीजेपी के पास पिछले 30 साल से थी, उपचुनाव में पार्टी ने खो दिया है. ये सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुद की थी. योगी ने पिछले पांच संसदीय चुनाव से लगातार जीत दर्ज की थी. ऐसे में गोरखपुर सीट हारने से बीजेपी नेताओं की नींद उड़ी हुई है.

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गोरखपुर की तरह ही फूलपुर सीट भी बीजेपी हार गई. यह सीट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की थी. फुलपुर सीट इलाहाबाद से लगी हुई है.

चार मंत्री नहीं बचा सके फूलपुर

मौजूदा योगी सरकार में इलाहाबाद के चार कैबिनेट मंत्री हैं. इसके बावजूद यह सीट बीजेपी जीत नहीं सकी, जबकि आजादी के बाद पहली बार मोदी लहर में 2014 में बीजेपी ने फूलपुर सीट पर जीत का खाता खोला था. उपचुनाव में बीजेपी इस सीट को बरकरार नहीं रख सकी. दोनों सीटों पर सपा उम्मीदवार ने बसपा के समर्थन से जीत दर्ज की है. इस जीत के बाद सपा सहित विपक्ष के हौसले बुलंद हो गए हैं, वहीं बीजेपी पस्त नजर आ रही है. इस उप चुनाव में जीत के साथ ही सपा को एक नया विजयी फॉर्मूला मिल गया है.

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