
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और अमेठी से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दर्ज हुए रेप केस के बाद उनकी नींद उड़ गई हैं. इस मामले में गिरफ्तारी से रोक के लिए एक तरफ जहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, वहीं सोमवार को सीएम अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई रैली में वह रो पड़े. उन्होंने अपने उपर लगे सभी आरोप बेबूनियाद बताते हुए कहा कि उन्होने फंसाया जा रहा है. आइए जानते हैं इस रेप केस के बारे में...
- रेप पीड़िता के मुताबिक, साल 2014 में नौकरी और प्लॉट दिलान के बहाने उसे गायत्री प्रसाद प्रजापति ने लखनऊ स्थित गौतमपल्ली आवास पर बुलाया. वहां चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया. इसके बाद वह अपना सुध-बुध खो बैठी. बेहोशी की हालत में मंत्री और उसके सहयोगी ने रेप किया था. इसका अश्लील वीडियो बनाते हुए तस्वीरें भी ली गई थीं.
- पीड़िता का यह भी आरोप है कि अश्लील वीडियो और तस्वीरों के जरिए गायत्री प्रसाद प्रजापति और उनके सहयोगी साल 2016 तक उसे और उसकी बेटी को हवस का शिकार बनाते रहे. इससे तंग आकर उसने 7 अक्टूबर 2016 को थाने में तहरीर दी, लेकिन उस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी. इसके बाद पीड़िता सूबे के आलाधिकारियों से भी मिली थी.
- पुलिस से जब पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला, तो उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. लेकिन वहां उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया. इसके बाद भी पीड़िता हार नहीं मानी. वह सुप्रीम कोर्ट के दर पर पहुंची. सुप्रीम कोर्ट ने गायत्री प्रसाद प्रजापति को जोरदार झटका देते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि इस मामले में केस दर्ज करके तेजी से जांच की जाए.
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ पुलिस ने समाजवादी पार्टी नेता गायत्री प्रजापति और उनके सहयोगियों अशोक तिवारी, पिंटू सिंह, विकास शर्मा, चंद्रपाल, रूपेश और आशीष शुक्ला के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 376डी, 511, 504, 506 और पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज किया है. यूपी सरकार को इस मामले में आठ हफ्ते में रिपोर्ट भी पेश करना है.
- आईपीसी की धारा- 376 के तहत रेप का केस दर्ज होता है. इस मामले में आरोपी को दस साल से आजीवन कारावास तक मिल सकता है. धारा- 376 डी के तहत गैंगरेप का केस दर्ज होता है, जिसमें आजीवन कारावास होता है. धारा- 511 के तहत अपराध की कोशिश, तो धारा- 504 के तहत किसी को अपमानित करने का केस दर्ज होता है. ऐसे में दो साल की सजा होती है.
- ऐसे मामलों में सबसे अहम पॉक्सो एक्ट होता है. इसके तहत किसी नाबालिग लड़की के साथ यौन अपराध के संबंध में केस दर्ज किया जाता है. नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है. इसमें 7 साल की सजा से लेकर उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान है. निर्भया कांड के बाद से इस कानून को लागू किया गया है.