Advertisement

उत्तराखंड: खेल मंत्री का दावा- महिला क्रिकेटर्स का हो रहा यौन शोषण

उत्तराखंड के खेल मंत्री अरविन्द पांडेय ने क्रिकेट संघों को चेतावनी दी है कि वो सुधर जाएं. साथ ही ये भी कहा है कि उनके पास सभी संघों के खिलाफ पूरे पुख्ता सबूत हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
रणविजय सिंह
  • देहरादून,
  • 23 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

क्या उत्तराखंड में महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ यौन शोषण हो रहा है? क्या उनके साथ बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं? अगर वाकई खेल मंत्री की बात सत्य है तो देवभूमि के लिए इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता.

उत्तराखंड के खेल मंत्री अरविन्द पांडेय ने क्रिकेट संघों को चेतावनी दी है कि वो सुधर जाएं. साथ ही ये भी कहा है कि उनके पास सभी संघों के खिलाफ पूरे पुख्ता सबूत हैं. खेल मंत्री ये भी कहा कि क्रिकेट संघों से जुड़े कुछ लोग हैं जो खेल के नाम पर महिला क्रिकेट खिलाड़ियों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं. ऐसे लोगों के खि‍लाफ धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा.  

Advertisement

अगर वाकई महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ ऐसा हुआ है या ऐसा हो रहा है तो मंत्री के साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी तुरंत एक्शन लेना चाहिए. क्योंकि खेल जगत के लिए ये घटना किसी काले अध्याय से कम नहीं. जिस देश के प्रधानमंत्री बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा देते हैं, उसी देश में ऐसी घटना शर्मसार करने वाली है.

अगर सबूत हैं तो फिर क्यूं अब तक खामोश है सरकार?

जिस कदर खुलकर खेल मंत्री ने महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण या बलात्कार की बात कही है. साथ ही सबूत की बात भी कही है तो फिर ऐसी क्या वजह है कि कार्रवाई के लिए सिर्फ कहा जा रहा है. अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई.  

मंत्री पद जाए तो जाए पर नही चलने दूंगा गुंडागर्दी

Advertisement

खेल मंत्री ने आजतक से बात करते हुए ये भी साफ़ कर दिया कि मुझे चाहे किसी भी हद तक जाना पड़े, मैं जाऊंगा. मैं उत्तरखंड के भविष्य से किसी को भी खिलवाड़ करने नहीं दूंगा. साथ ही किसी की गुंडागर्दी चलने नहीं दूंगा. अरविन्द पांडेय ने ये भी साफ़ किया कि बेहद अफ़सोस की बात है की कुछ गिरे हुए नीची कैटेगरी के लोगों की वजह से आज उत्तराखंड के होनहार खिलाड़ी उत्तराखंड से न खेलकर किसी अन्य राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं. देश भले ही मेरा हो, लेकिन राज्य का नाम भी रोशन होना चाहिए. इसलिए ये साफ़ कर देता हूं कि अगर मेरे उत्तराखंड के क्रिकेट भविष्य को मैं नहीं निखार पाया तो मुझे खेल मंत्री रहने का भी कोई अधिकार नहीं है. मैं बिना देर किए अपने खेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा.  

आखिर क्यूं हैं ऐसे हालात?

गौरतलब है की पिछले 17 वर्षों से उत्तराखंड में क्रिकेट जगत को अपने ही राज्य में BCCI की मान्यता से वंचित रहना पड़ा. क्योंकि देवभूमि उत्तराखंड में एक नहीं, बल्कि कई ऐसे क्रिकेट संघ हैं, जिन्होंने अपनी अलग से एसोसिएशन बना रखी है. इसकी वजह से आपस में टकराव लगातार पिछले वर्षों में देखने को मिल रहा है. शायद यही वजह है की खेल मंत्री को बाकायदा सख्त रुख अख्तियार करना पड़ा.  

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement