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अगर परमाणु युद्ध हुआ तो एक हफ्ते में ही मारे जाएंगे दो करोड़ दस लाख लोग

मान लें कि अगर दोनों देश जंग में कूद पड़ते हैं और फिर कहीं भारत-पाक के पीच परमाणु जंग शुरू हो गई तो क्या होगा? तस्वीर भयानक होगी. एक हफ्ते में ही दो करोड़ दस लाख लोग मारे जाएंगे.

आधी दुनिया के दो अरब लोग सिर्फ भूख से मर जाएंगे. आधी दुनिया के दो अरब लोग सिर्फ भूख से मर जाएंगे.
शम्स ताहिर खान/अभि‍षेक आनंद
  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 6:34 AM IST

भारत-पाक दोनों तरफ तनाव बराबर बना हुआ है. मगर फिलहाल ऐसा भी नहीं कि दोनों देश खुद को जंग में झोंक दें. पर मान लें कि अगर दोनों देश जंग में कूद पड़ते हैं और फिर कहीं भारत-पाक के पीच परमाणु जंग शुरू हो गई तो क्या होगा? तस्वीर भयानक होगी. एक हफ्ते में ही दो करोड़ दस लाख लोग मारे जाएंगे. आधे से ज्याद लोग बम की तपिश से झुलस जाएंगे.

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जो लोग बचेंगे वो रेडिएशन से मारे जाएंगे. दुनिया की आधी ओजोन परत बर्बाद हो जाएगी. आधी दुनिया से सर्दी-गर्मी का मौसम ही खत्म हो जाएगा. दुनिया को परमाणु सर्दी तबाह कर देगी. वनस्पतियों और पेड़-पौधों का निशान तक मिट जाएगा. आधी दुनिया के दो अरब लोग सिर्फ भूख से मर जाएंगे.

आधी दुनिया आएगी चपेट में
बात सिर्फ हिंदुस्तान और पाकिस्तान की नहीं है. दांव पर आधी दुनिया है. जी हां. अगर गलती से भारत-पाकिस्तान के बीच जंग होती है और उस जंग में दोनों देश अपने सिर्फ आधे परमाणु बम का ही बटन दबा दें तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तो एक झटके में ही दो करोड़ दस लाख लोग मारे जाएंगे. मगर इसका असर ना सिर्फ बाकी पड़ोसी मुल्कों बल्कि आधी दुनिया को भी झेलना पड़ेगा.

भारत और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं उनमें से हर बम हिरोशिमा पर गिराए गए 15 किलोटन वाले बम के बराबर हैं. ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इसकी गर्मी, तपिश और रेडिएशन लोगों को मारेगी. उसके बाद भी जो बच जाएंगे उनके लिए जीना इतना आसान नहीं होगा. भोपाल गैस त्रासदी के तीस साल बाद आज तीसरी पीढ़ी भी बीमार पैदा हो रही है. फिर ये तो परमाणु बम है. अंदाजा लगाइए इसका असर कितना लंबा और खतरनाक होगा.

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तिल-तिल कर मरेंगे लोग
बमों के रेडिएशन का असर लोगों को सिर्फ तड़पाएगा ही नहीं बल्कि बाकी दूसरे तरीकों और नतीजों से भी उन्हें तिल-तिल कर मारेगा. वैज्ञानिकों की मानें तो इतने रेडिएशन से वायुमंडल में ओजोन परत बर्बाद हो जाएगी. अब वायुमंडल से ओजोन परत के गायब होने या बर्बाद होने का मतलब ये है कि हवा से वो गैस ही खत्म हो जाएगी जो मौसम को बदलती है. यानी आधी दुनिया में सर्दी-गर्मी के मौसम का सिलसिला ही बंद हो जाएगा.

ऐसे में बहुत मुमकिन है कि इस जंग के बाद ऐसी भयानक सर्दी पड़े कि दुनिया से वेजीटेशन यानी पेड़-पौधों का नामो-निशान ही मिट जाए. ऐसे में इंसानों की हालत क्या होगी ये समझा जा सकता है. इस वजह से लगभग 2 अरब लोग भूख से मारे जाएंगे. ये आंकड़े 2013 में भौतिक वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने परमाणु युद्ध रोकने के लिए किए गए एक अध्ययन के बाद जारी किए थे.

दो हजार गुना ज्यादा इंसानों की जान लेगा युद्ध
वैज्ञानिकों की मानें तो दोनों देशों के बीच एटमी जंग की स्थिति में 2 करोड़ 10 लाख लोगों की मौत तो पहले ही हफ्ते में हो जाएगी. मौतों का ये आंकड़ा दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तादाद के मुकाबले आधी होगी. इतना ही नहीं मौत का ये आंकड़ा हिंदुस्तान में पिछले नौ सालों में आतंकवादी हमलों में मारे गए आम लोग, पुलिस, जवान और सुरक्षा बलों की कुल तादाद से 2 हजार 221 गुना ज्यादा होगी. कहने का मतलब है कि इस वक्त आतंकवादी इंसान और इंसानियत को जितना नुकसान पहुंचा रहे हैं, परमाणु युद्ध उससे 2 हजार गुना ज्यादा इंसानों की जान लेगा.

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परमाणु बमों को लेकर दोनों देशों की तैयारी पाकिस्तान के पास जो 130 परमाणु बम हैं उनमें से 66 फीसदी जमीन से मार करने वाले वैसे बम हैं जिन्हें बैलेस्टिक मिसाइलों से दागा जाता है. जबकि 28 फीसदी परमाणु बम को हवा से गिराया जा सकता है. परमाणु बम से लैस उसके मिसाइल भारत के चारों सबसे बड़े शहर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और चेन्नई पर हमला कर सकते हैं. भारत और पाकिस्तान, दोनों मुल्कों के पास परमाणु बमों की कुल तादाद करीब ढाई सौ के आस-पास है. इनमें से अकेले पाकिस्तान के पास करीब 130 परमाणु बम हैं.

पाकिस्तान के पास मौजूद परमाणु बमों का एक बड़ा हिस्सा यानी 66 फीसदी जमीन से मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइलों से दागे जा सकते हैं. पाकिस्तान के पास ऐसे कुल 86 बैलेस्टिक मिसाइल हैं, जो परमाणु हमले कर सकते हैं. हजरत मोहम्मद के तलवार हत्फ के नाम पर पाकिस्तान के पास जो मीडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल है उससे वो हिंदुस्तान के चार बड़े शहर यानी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और चेन्नई को निशाना बना सकता है. इन मिसाइलों से हिंदुस्तानी सेना के मेजर कमांड्स को भी टार्गेट किया जा सकता है.

एक ही झटके में बड़ी आबादी हो जाएगी खत्म
ठीक इसी तरह 13 सौ किलोमीटर तक मार करनवाले मीडियम रेंज मिसाइलों के जरिए 40 परमाणु बमों का एक ऐसा जखीरा पाकिस्तान के पास मौजूद है, जो दिल्ली के अलावा जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, नागपुर, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों को भी निशाना बना सकता है. बेंगलुरू के ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 12वीं सदी के अफगान शासक मोहम्मद गौरी के नाम से तैयार ये मिसाइल इतने खतरनाक हैं कि एक बड़ी आबादी को एक ही झटके में खत्म कर सकते हैं.

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ठीक इसी तरह शाहीन टू के नाम से पाकिस्तान के पास मौजूद 8 मीडियम रेंज के मिसाइल कोलकाता समेत पूर्वी तट के शहरों पर परमाणु हमले कर सकते हैं. ये 25 सौ किलोमीटर तक मार सकते हैं. जबकि पाकिस्तान के पास गजनवी के नाम से 16 शॉर्ट रेंज मिसाइल भी हैं. 270 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले इन मिसाइलों को उसने लुधियाना, अहमदाबाद और दिल्ली के आस-पास के ठिकानों के लिए रखा हुआ है. पाकिस्तान के पास 60 किलोमीटर के शॉर्ट रेंज वाले नसर मिसाइल भी हैं जिन्हें वो जरूरत के मुताबिक अपनी तरफ बढ़ते हिंदुस्तानी फौज के ऊपर अपनी ही सरजमीन पर गिरा सकता है.

पाकिस्तान के पास 350 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले 8 न्यूक्लीयर क्रूज मिसाइल भी हैं. जबकि अपने पूरे जखीरे के 28 फीसदी परमाणु बमों का इस्तेमाल वह हवाई हमलों में कर सकता है. इसके लिए उसके पास एफ 16 और मिराज जैसे विमान हैं जिनसे वो हवा से 36 परमाणु बम गिरा सकता है.

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