
फर्राटेदार अंग्रेजी और तन पर सजे महंगे कपड़े पहने इस बाला को जो देखता है, देखता ही रह जाता है. छरहरा बदन, तीखे नैन नक्श, गोरा रंग, कद 5 फुट 4 इंच और बेबाक तेवरों से वह कॉलेज जाने वाली किसी लड़की जैसी ही दिखती है.
लेकिन इस हसीन चेहरे के पीछे की सचाई कुछ और ही है. कोई इसे विषकन्या कहता है तो कोई शहजादी. कोई कहता है जो इसके प्रेम में फंसा वो जिंदा नहीं बचा. दिल्ली के तकरीबन 1,000 करोड़ रु. के जिस्मफरोशी के कारोबार की यह शहजादी कोई और नहीं, यहां की सबसे बड़ी दलाल 30 वर्षीय गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन है.
बात क्रिकेट विश्व कप फाइनल से एक दिन पहले की है. जब भारत को लेकर रोमांच चरम पर था. फार्म हाउसों और होटलों में क्रिकेट से जुड़ी पार्टियों के कारण शहर में जिस्मफरोश लड़कियों की आवक एकदम बढ़ गई थी. बस, इसी का फायदा उठाने के लिए कुछ लोग रात के अंधेरे में अपने काले धंधे को अंजाम देने में लगे थे. और लंबे समय से जिस्मफरोशी के धंधे का पर्याय बन चुकी शातिर सोनू पुलिस के बिछाए जाल में फंस गई.
पहली अप्रैल को लड़कियों और साथियों के साथ उसे पुलिस ने धर दबोचा. आलीशान जीवनशैली की आदी सोनू अब महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत सलाखों के पीछे है. लेकिन मासूमियत से वह कहती है, ''मेराकाम इतना बड़ा नहीं था, जितना मुझे बदनाम कर दिया गया.''
सोनू के साथ जिन पांच लड़कियों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि कतई कमजोर नहीं है और पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कुछ टेलीविजन स्टार भी सोनू के संपर्क में थीं. हालांकि उनके नाम उजागर नहीं किए गए हैं.
सोनू की गिरफ्तारी पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, ''सोनू के ग्राहकों में उद्योगपतियों, वीआइपी से लेकर कई बड़े नाम शामिल हैं जबकि उसके लिए मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया में कदम रखने की चाहत रखने वाली लड़कियां काम करती हैं. वह खुद सामने नहीं आती. अपने लोगों के जरिए काम को अंजाम देती है. उसे पकड़ना टेढ़ी खीर था.''
रोहतक की रहने वाली सोनू का अपराध के साथ रिश्ता काफी पुराना है. सोनू का नाम आठ साल पहले एक हत्या के सिलसिले में पहली बार सामने आया था. अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और, जो भी सोनू का हमदम बना, उसका जीवन सफर ज्यादा लंबा नहीं चल सका.
सोनू को रोहतक के नामी गैंगस्टर विजय सिंह से प्रेम हुआ और दोनों ने विवाह किया.लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला गिरोह के विजय सिंह को उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने गढ़ मुक्तेश्वर में मार गिराया था. इस सदमे से उबरने के दौरान सोनू के पास नजफगढ़ के दीपक का आनाजाना हुआ. फिर दोनों में दोस्ती हुई. लेकिन 2003 में गाड़ी चोर दीपक भी असम में पुलिस के हाथों मुठभेड़ में मारा गया.
आसरे की चाहत में सोनू ने दीपक के भाई हेमंत सोनू से विवाह रचा लिया. हेमंत गीता को दिल्ली ले आया. उसने हेमंत के रसूख और संबंधों का प्रयोग अपने जिस्मफरोशी के कारोबार को बढ़ाने के लिए किया. हेमंत के नाम पर ही गीता का नाम सोनू पड़ गया.
लेकिन यह कहानी भी ज्यादा दिन नहीं चल सकी. दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, ''उस समय तक हेमंत पुलिस की नजर में आ चुका था और मार्च 2006 में गुड़गांव में पुलिस ने उसे मुठभेड़ में मार गिराया.'' फिर सोनू ने अशोक बंटी नाम के बदमाश के पास पनाह पाई लेकिन बंटी भी अप्रैल 2006 में दिलशाद गार्डन में पुलिस के हाथों मारा गया.
इस सारे घटनाक्रम के दौरान सोनू अपराध की दुनिया से अच्छे से रूबरू होचुकी थी और उसके संपर्क भी मजबूत हो गए थे. सोनू ब्यूटी पार्लर के जरिए विभिन्न लोगों के संपर्क में आई थी. अब उसने अपनी अलग राह चुनने का मन बना लिया था. इसके साथ ही गीता कॉलोनी इलाके में उसकी बदनामी भी बढ़ने लगी थी. तब उसने दक्षिण दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया. एक समय पार्लर में 2,000 से 2,500 रु. प्रति ग्राहक कमाने वाली सोनू अब 10,000 से 15,000 रु. प्रति ग्राहक कमाने लगी थी.
जब सोनू के साथ यह सब चल रहा था, उसी दौरान दिल्ली के जिस्मफरोशी के धंधे के सबसे बड़े दलाल कंवलजीत को 2005 में नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया. सोनू को जिस्मफरोशी के कारोबार का बड़ा और कुख्यात नाम बनने में इस कारक ने अहम भूमिका अदा की है. बताया जाता है कि लगभग दो दशकों तक दिल्ली और भारत के अन्य राज्यों समेत विदेशों में जिस्मफरोशी का कारोबार चलाने वाले कंवलजीत की कमाई 1987 से 1995 के बीच कई गुना बढ़ कर तकरीबन 10 लाख रु. प्रति माह पहुंच गई थी.
कंवलजीत का पतन सोनू के काले कारोबार में उत्थान का एक बड़ा कारण बना. अब दिल्ली के जिस्म के कारोबार में सोनूअकेला बड़ा नाम रह गई थी क्योंकि कंवलजीत, अंकित धीर और रितिका ठाकुर जैसे कुख्यात नाम कानून के चक्रव्यूह में फंस चुके थे तो बॉबी जैसे दलाल सोनू के साथ हो लिए थे.
सोनू नेपथ्य में रहकर चमड़ी के कारोबार को आगे बढ़ा रही थी और उसने कई अन्य दलालों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था. सूत्रों के मुताबिक, ''राजू शर्मा को सोनू के धंधे का सर्वेसर्वा माना जाता है. वह उसके सारे कामों को बखूबी अंजाम देता है. सोनू किसी भी डील के दौरान खुद कुछ दूरी पर दूसरी कार में रहती जबकि उसके लोग ग्राहक के साथ सौदे को अंजाम देते.''
समय के साथ सोनू का नाम तेजी से फैलने लगा. ऐसा नहीं है कि सोनू पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ी है. इससे पहले वह 2007 में प्रीत विहार से और नवंबर 2008 में पीवीआर साकेत से पकड़ी जा चुकी है. साकेत से जब सोनू को पकड़ा गया था तो उस समय उसके साथ चार लड़कियां और दस दलाल थे जिससे उसके बड़े नेटवर्क का खुलासा बखूबी हो जाता है. उसने कभी भी काम से तौबा नहीं की.
सूत्र बताते हैं कि सोनू रोजाना लगभग एक लाखरु. कमाती थी जबकि उसने कई लड़कियों को 40,000 से 60,000 रु. प्रति माह पर रखा हुआ था. सोनू के नेटवर्क में लगभग 2,000 लड़कियों के जुड़े होने की बात कही जाती है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं, ''सोनू के लोग राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई और कोलकाता जैसे राज्यों से मॉडल या फिल्मी दुनिया में जाने की चाहत रखने वाली लड़कियों को फुसलाकर उस तक प'ंचाते थे.'' जिनसे सोनू दिल्ली में अपनी बादशाहत कायम किए हुए थी.
ऐसा नहीं था कि सोनू अकेले दिल्ली के जिस्मफरोशी के कारोबार को चला रही थी. कुछ लोग चोला बदलकर इस काम को अंजाम दे रहे थे. ऐसा ही एक नाम राजीव रंजन द्विवेदी उर्फ शिव मूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी बाबा का था.
महरौली पुलिस स्टेशन के एसएचओ पंकज सिंह बताते हैं, ''हमने इच्छाधारी बाबा को 2010 में गिरफ्तार किया था. वह धर्मगुरु के रूप में अपनी पहचान बना चुका था. लेकिन उसके एक मोबाइल नंबर का संदेह पैदा करने वाली वेबसाइट पर होना उसके गले की फांस बन गया. हमने उसे रंगे हाथ पीवीआर साकेत से धरा था.'' उसकी गिरफ्तारी के बाद हर किसी ने यही कहा कि बाबा की गिरफ्तारी में सोनू का हाथ है. हालांकि सोनू ने एक टीवी साक्षात्कार में बाबा को जानने की बात तो स्वीकार की थी लेकिन इस बात से इनकार किया कि उसका बाबा की गिरफ्तारी से कोई लेनादेना है. अब यह स्वघोषित बाबा मकोका के तहत जेल में है.
सोनू अब सलाखों के पीछे है और उसकी गिरफ्तारी ने दलालों और एस्कॉर्ट एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. दलाल और एस्कॉर्ट एजेंसियां चौकस हो गई हैं. ये सिर्फ अपने पुराने ग्राहकों या रेफरेंस के जरिए काम कर रहे हैं. अगर देखें तो समय के साथ तेजी से बढ़े इस कारोबार में जहां काम करने का ढंग बदला है, वहीं दलालों ने अपने ठिकाने भी बदले हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस के मुताबिक, 'हुआप दक्षिण दिल्ली की बात करेंगे तो वहां हाइ प्रोफाइल और विदेशी कॉल गर्ल की मांग है और इसी तरह के रैकेट सक्रिय हैं. उत्तरी दिल्ली में पूर्वोत्तर की लड़कियों की संख्या अधिक है. करोल बाग में मध्यमवर्गीय ग्राहकों को निशाना बनाया जाता है जबकि पूर्वी दिल्ली और रोहिणीसमेत बाहरी दिल्ली में 2,000 से 5,000 रु. तक की पेइंग कैपेसिटी वाले ग्राहकों को साधा जा रहा है.''
दिल्ली की पॉश कालोनियां इनके ठिकाने बन चुकी हैं, जहां से ये आसानी से अपने काम को अंजाम देती हैं. पीवीआर और मॉल दलालों के मीटिंग प्वाइंट बनते जा रहे हैं. छोटे दलाल अब बड़े दलालों के साथ काम कर रहे हैं तो ऐसी वेबसाइटों की भरमार है जो मसाज और एस्कॉर्ट सर्विस की पेशकश करती हैं. यहां फोन किया जाए तो कुछ देर बातचीत के बाद बात मुद्दे पर आ ही जाती है.
हालांकि इस धंधे में सारा खेल जबानी ही होता है. पांच सितारा होटल तो शुरू से इस धंधे के केंद्र में रहे हैं लेकिन आलीशान और भव्य फार्म हाउस इनके नए ठिकाने बन रहे हैं, जहां पार्टियां आयोजित की जाती हैं, और सामूहिक सेक्स या अन्य तरह के यौनाचारों को अंजाम दिया जाता है. दिल्ली में एक एस्कॉर्ट एजेंसी चलाने वाले विनोद (बदला हुआ नाम) कहते हैं, ''स्टैग पार्टी और सामूहिक सेक्स की अधिक डिमांड रहती है. इसके अलावा बैले डांस भी खूब चलन में है. हम भी डिमांड केअनुसार रेट तय करते हैं.'' जिस्म के इस कारोबार में मॉडल, टीवी स्टार, कॉलेज छात्राओं से लेकर गृहिणियां तक शामिल हैं.
अब जिस्म के इस धंधे में गोरी चमड़ी की मांग बढ़ने लगी है. विनोद बताते हैं, 'हुएक समय नेपाली लड़कियों की काफी मांग हुआ करती थी. अब इनकी जगह विदेशी लड़कियों की मांग की जाती है. इनके लिए वे 15,000 से 25,000 रु. तक देने को तैयार रहते हैं.'' पिछले कुछ समय में भारत में उ.ज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और यूक्रेन की लड़कियों की आवाजाही भी बढ़ी है. तभी फरवरी और मार्च 2011 में 8 विदेशी लड़कियों और उनकी दो विदेशी दलालों को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पकड़ा है.
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी)अपराध अशोक चांद बताते हैं, ''इन लड़कियों में से कुछ कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान यहां आई थीं. फायदा देखते हुए इन्होंने दोबारा से यहां का रुख किया.'' भारतीय बालाओं की अपेक्षा ये 3040 फीसदी अधिक पैसे लेती हैं और एक माह में दो लाख रु. तक कमाती हैं. सूत्रों की मानें तो दिल्ली में लगभग 150200 दलाल हैं जो गोरीचमड़ी के कारोबार को अंजाम दे रहे हैं. इस काले कारोबार से जुड़ी विदेशी आंटियां खुद ही धंधा चलाने में यकीन करती हैं. इसलिए अखबारों के क्लासीफाइड के पन्नों पर नंबरों की भरमार है जो पूर्ण संतुष्टि का दावा करते हैं.
क्रिकेट में भी सेक्स का तड़का लग चुका है. विश्व कप के दौरान फार्म हाउसेस और होटलों में नई किस्म की पार्टियां 'ईं. अब आइपीएल को लेकर भी काफी उत्साह है. कम्पेनियन के तौर पर लड़कियों को मैच की अवधि या फिर रात भर के लिए बुलाया जा रहा है. एक पार्टी के लिए 56 लड़कियां लाई जाती हैं और जिसके लिए 60,000-1,00,000 रु. तक वसूले जा रहे हैं.
एस्कॉर्ट एजेंसियों ने काम करने का अपना अंदाज बदला है. एजेंसियां अपने पुराने ग्राहकों को ही एंटरटेन कर रही हैं और अगर कोई नया ग्राहक आता भी है तो उससे रेफरेंस के बिना बात नहीं की जाती. इसकी पुष्टि के लिए इंडिया टुडे ने एक दलाल को फोन किया. उससे उसके एक पुराने ग्राहक का हवाला देकर बात की गई.
पूरी पड़ताल के बाद दलाल बात करने पर राजीहुआ और उसने कहा कि वह कुछ देर में पूर्वी दिल्ली के एक व्यस्त स्थान पर दो लड़कियां लेकर पहुंचेगा. उसने एक लड़की के साथ दो घंटे बिताने के लिए 5,000 रु. बताए. वह लड़कियां लेकर मीटिंग प्वाइंट पर पहुंचा लेकिन फिर हमने लड़कियां पसंद न आने की बात कहकर उसे टाल दिया. हालांकि उसने 1,000 रु. ले ही लिए.
अगर इससे जुड़े कानून को देखें तो उसमें सजा का कड़ा प्रावधान नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक मामलों के वकील जुबेर अहमद बताते हैं, ''अवैध देह व्यापार (निरोधक) कानून (आइटीपीए) को भारत में पुनर्वास की दृष्टि से बनाया गया है. भारतीय मान्यता यह है कि इस धंधे में लड़कियां अपनी मर्जी से नहीं आतीं, उन्हें जबरन धकेला जाता है.'' और इस बात की पुष्टि अनिता (बदला हुआ नाम) की कहानी से हो जाती है.
रात के समय अपने दिन की शुरुआत करने वाली 26 वर्षीया अनीता बताती है, ''बंगलुरू में रहती थी लेकिन पिता की मौत के बाद कमाने वाला कोई था नहीं. जहां काम करती थी, वहां मालिक अश्लील हरकतें करता था. बस, सहेली दिल्ली में काम मिलने की बातकह ले आई. लेकिन यहां यह काम करना पड़ा. कोई दुख नहीं. मुफ्त में नोचे जाने से तो यह अच्छा ही है.''
हालांकि चांद कहते हैं, 'हुआ इटीपी के तहत 2010 में दिल्ली में 28 मामले दर्ज हुए थे जिसमें 96 लोग गिरफ्तार किए गए. 2011 के पहले तीन माह में 9 मामले दर्ज हो चुके हैं जिनमें 32 गिरफ्तारियां हुई हैं. हमारी कोशिश इस धंधे पर लगाम कसने की है.''
पुलिस के प्रयास जारी हैं. इसका नतीजा जिस्मफरोशी के दो बड़े नाम सोनू पंजाबन और इच्छाधारी बाबा के सलाखों के पीछे जाने के रूप में सामने आता भी है. वहीं दूसरा कुख्यात नाम अंकित धीर इस कारोबार से तौबा कर चुका है. इस काले कारोबार का बादशाह रहा कंवलजीत आरोप सिद्ध नहीं होने से दिसंबर 2010 में बरी हो चुका है. दूसरी ओर, बॉबी छक्का और नगमा उर्फ अरीबा जैसे नाम तेजी पकड़ रहे हैं. मतलब यह कि कभी भी मंद न पड़ने वाले इस कारोबार की बादशाहत का नया नाम जल्द सामने होगा.