
बिस्तर पर पुरुषों को आनंद का एहसास जल्द हो जाता है जबकि इसके उलट महिलाओं को चरम सुख की अनुभूति कराना पुरुषों के लिए कठिन होता है.
इसकी कई वजहें हैं, जिनमें महिलाओं की शारीरिक बनावट सबसे अहम है. महिलाओं की अंदरूनी संचरना ऐसी होती है कि वे पुरुषों की तुलना में देर से चरम सुख तक पहुंच पाती है. वैसे पुरुषों के लिए महिलाओं को समझना तो हमेशा से ही 'टेढ़ी खीर' रहा है.
महिलाओं के शरीर में एक ऐसा अंग होता है, जो खास तौर से कामक्रीड़ा के दौरान सुख की अनुभूति कराने के लिए ही होता है. यह पुरुषों के अंग के 'विकल्प' की तरह होता है.
माना जाता है कि महिलाओं को चरम तक पहुंचने में काफी वक्त लगता है, पर एक रिसर्च में कई दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं. रिसर्च में शामिल 500 महिलाओं में से ज्यादातर ने माना कि वे केवल 5 मिनट में ही ऑर्गेज्म तक पहुंच जाती हैं. करीब 34 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे क्लाइमेक्स तक पहुंचने के लिए अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करती हैं. 14 फीसदी बाहरी साधनों पर निर्भर हैं.
कुल मिलाकर, यह एक 'दिमागी फितूर' है. कौन किस तरीके से ज्यादा सुख हासिल करता है, यह उसके नजरिए पर निर्भर है.