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अब मुजफ्फरनगर दंगा केस में फंसे BJP नेताओं को बचाने की तैयारी में योगी सरकार

जिलाधिकारी को 5 जनवरी को लिखे पत्र में यूपी के न्याय विभाग में विशेष सचिव राज सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है. इनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है.

सीएम योगी के साथ दंगे के आरोपी नेता (फाइल फोटो) सीएम योगी के साथ दंगे के आरोपी नेता (फाइल फोटो)
जावेद अख़्तर
  • लखनऊ,
  • 21 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने के बाद अब सूबे की सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान कानून के शिकंजे में आए बीजेपी नेताओं को राहत देने की तैयारी में है. सरकार ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा केस में बीजेपी नेताओं के खिलाफ अदालत में लंबित 9 आपराधिक मामलों को वापस लेने की संभावना पर सूचना मांगी है.

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यह जानकारी राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को लिखे गए पत्र में मिली है. दरअसल, दंगों के आरोप में मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, सांसद भारतेंदु सिंह, विधायक उमेश मलिक और पार्टी नेता साध्वी प्राची के खिलाफ केस दर्ज हैं.

5 जनवरी को लिखा गया पत्र

जिलाधिकारी को पांच जनवरी को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव राज सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है. इनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है. पत्र में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का विचार भी मांगा गया है.

हालांकि, पत्र में नेताओं के नाम का जिक्र नहीं है लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल संख्या का जिक्र है. बता दें कि समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार के दौरान पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में भीषण दंगा हुआ था. मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में अगस्त-सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से अधिक लोग बेघर हुए थे.

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इस दंगे के बाद बीजेपी ने सपा सरकार पर गलत ढंग से कानून कार्रवाई के आरोप लगाए थे. बीजेपी के कई नेताओं पर दंगों से जुड़े केस चल रहे हैं. जिन्हें खत्म करने पर योगी सरकार विचार कर रही है.

योगी के खिलाफ केस वापस

इससे पहले दिसंबर में सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस वापस लेने का आदेश जारी किया गया था. योगी के अलावा शिव प्रताप शुक्ल, विधायक शीतल पांडेय और 10 अन्य के खिलाफ धारा 188 के तहत लगे केस वापस लेने का आदेश जारी किया गया है. सरकार की तरफ से ये आदेश गोरखपुर जिलाधिकारी को केस वापस लेने के लिए दिया गया है.

बता दें कि यह मामला गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था. इस मामले में स्थानीय कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था.

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