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भारत की आजादी को 75 साल पूरे हो गए. इसको लेकर पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. इस दौरान कई क्षेत्रों में भारत ने अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज करवाई. इसमें से एक क्षेत्र सुपर कंप्यूटर का भी है.
हालांकि, ऐसा नहीं है कि अभी हम सुपर कंप्यूटर में काफी आगे हैं. हम इसमें पिछड़े भी हैं. इस पर यहां पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं.
क्या है सुपर कंप्यूटर?
आगे बढ़ने से पहले सबसे पहले ये जान लेना जरूरी है कि सुपर कंप्यूटर होता क्या है. सुपर कंप्यूटर आम कंप्यूटर से काफी तेज डेटा को प्रोसेस करता है. इसकी प्रोसेसिंग स्पीड काफी ज्यादा होती है. इस पर कई यूजर्स एक साथ काम कर सकते हैं.
इसमें हजारों प्रोसेसर होते हैं जो किसी भी कैलकुलेशन को ना केवल हैंडल करते हैं बल्कि उसे काफी तेजी से कैलकुलेट भी कर सकते हैं. इसकी लंबाई और चौड़ाई नॉर्मल कंप्यूटर से कई गुना ज्यादा होती है. दुनिया में अलग-अलग तरीके के सुपर कंप्यूटर्स मौजूद हैं.
सुपर कंप्यूटर का यूज
सुपर कंप्यूटर को कई जगहों पर यूज किया जा सकता है. इसका यूज केमिस्ट्री फॉर्मूला बनाने, बायो-मेडिसिन, वेदर, स्पेस सैटेलाइट प्लेसमेंट और दूसरी कई जगहों पर होता है. जहां क्लासिकल कंप्यूटर कैलकुलेशन सॉल्व नहीं कर पाते हैं वहां सुपर कंप्यूटर काम आता है.
सुपर कंप्यूटर के भारत में आने की दिलचस्प कहानी
भारत में सुपर कंप्यूटर आने की कहानी काफी फिल्मी है. भारत ने पहले इसे अमेरिका से खरीदने की कोशिश. अमेरिकी सरकार ने भारत को झटका देते हुए सुपर कंप्यूटर बेचने से इन्कार कर दिया.
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसको लेकर वैज्ञानिकों के साथ मीटिंग बुलाई. इस मीटिंग भारत में ही सुपर कंप्यूटर बनाने की बात पर चर्चा की गई. वैज्ञानिक विजय पी भटकर की बातों से प्रभावित होकर राजीव गांधी ने सुपर कंप्यूटर बनाने की जिम्मेदारी उनको सौंपी.
भारत में सुपर कंप्यूटर बनाने वाली वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व विजय पी भटकर ने ही किया. उनकी टीम ने 1991 में भारत का पहला सुपर कंप्यूटर PARAM तैयार कर दिया.
आपको बता दें कि डॉ विजय भटकर को भारत के सुपर कंप्यूटर के जनक के रुप में जाना जाता है. वो C-DAC प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर चुके हैं. इसके तहत ही देश में परम 8000 सुपर कंप्यूटर बनाया गया था. कम लागत होने की वजह से बाद में इसे कई देशों ने खरीदा भी.
सुपर कंप्यूटर के मामले में अब भारत की स्थिति
आजादी के 75 साल बाद भी हम सुपर कंप्यूटर के मामले में उतना आगे नहीं बढ़ पाए है जितनी उम्मीद थी. पहला सुपर कंप्यूटर देश में तैयार होने के बाद भी भारत की स्थिति सुपर कंप्यूटर के मामले में काफी ज्यादा दयनीय है.
इस मामले में चीन और अमेरिका हमसे बहुत ज्यादा आगे हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में दुनिया के टॉप 100 सुपर कंप्यूटर में भारत के भी दो सुपर कंप्यूटर्स शामिल थे.
फंडिंग की कमी से स्थिति खराब
Top 500 की रिपोर्ट में बताया गया है कि दो साल बाद स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है. अब टॉप 500 सुपर कंप्यूटर में भारत के केवल तीन सुपर कंप्यूटर्स शामिल हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह फंडिंग है. कम फंडिंग होने की वजह से इस क्षेत्र में काफी तेजी से काम नहीं हो पा रहा है. जिसका खामियाजा हम उठा रहे हैं.
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चीन और अमेरिका इसमें काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. हमारा सुपर कंप्यूटर दुनिया मुकाबले स्लो हो रहा है. इसमें क्षेत्र में भी अब ध्यान देने की जरूरत है.