
भाषिणी (भाषा इंटरफेस ऑफ इंडिया) सरकार का उठाया एक कदम है, जिसके जरिए देश में मौजूद अलग-अलग भाषाओं की दिक्कत को दूर करने की कोशिश की गई है. इस AI मॉडल को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने नेशनल लैंग्वेज ट्रांसलेशन मिशन के तहत लॉन्च किया है.
भाषिणी 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है और ओपन सोर्स AI मॉडल का एक सूट ऑफर करता है, जिससे बिना किसी दिक्कत के कम्युनिकेशन को प्रमोट किया जा सकता है. भाषिणी के CEO अमिताभ नाग भी Business Today-India Today AI Conclave 2024 का हिस्सा बने.
उन्होंने भाषिणी के ट्रांसफॉर्मेटिव इम्पैक्ट पर चर्चा करते हुए बताया, 'हमारा सिस्टम हर दिन लगभग 60 लाख इंटरफेस को डिलीवर करता है. ये दुनिया का सबसे बड़ा लैंग्वेज सिस्टम बन जाता है.' उन्होंने बताया कि इस प्लेटफॉर्म ने सिंधी जैसी भाषा का डिजिटल डेटा क्रिएट किया है, जो कहीं और मौजूद नहीं है.
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भाषिणी की क्षमताएं ट्रांसलेशन के ज्यादा हैं. इसके API का इस्तेमाल करके टूल्स कई मुश्किलों को हल कर पाते हैं. ये प्लेटफॉर्म अंग्रेजी से लोकल भाषा में मुख्य बातों को ट्रांसलेट करके बैंकिंग सेवाएं इस्तेमाल करने में किसानों की मदद करता है. अमिताभ नाग ने ऐसे चैटबॉट्स का उदाहरण दिया जो भाषिणी का इस्तेमाल करके कम्युनिकेशन को आसान बनाते हैं.
इन चैटबॉट्स की मदद से किसानों को सरकारी स्कीम्स की जानकारी मिलती है. किसानों को इन सर्विसेस की जानकारी उनकी अपनी लोकल भाषा में मिलती है. इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दूसरे सेक्टर्स में भी किया जाता है. अमिताभ ने बताया कि भारत में कोर्ट्स की सुनवाई मुख्य रूप से अंग्रेजी में होती है, जो गैर-अग्रेंजी भाषा वाले लोगों के लिए एक चुनौती है.
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भाषिणी का इस्तेमाल करके लोग कोर्ट की सुनवाई रियल टाइम में लोकल भाषा में सुन सकते हैं. वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे के मौके पर भाषिणी ने रेलवे के मैन्युअल को अपडेट किया, जिससे उसे दृष्टि बाधित लोग भी एक्सेस कर सकते हैं. ये एक रियल टाइम कन्वर्सेशन टूल भी है. उन्होंने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर मल्टीलैंग्वेज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को जोड़ने की योजना है.