
ISRO ने चंद्रमा के ऑर्बिट में चंद्रयान-3 को पहुंचा दिया है, जिसके बाद वहां से उसने कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं. इन तस्वीरों में चांद के सतह को दिखाया है. जैसा कि हम जानते हैं चांद की खूबसूरती को लेकर अब तक बहुत से गाने, कविताएं और शायरी बन चुकी हैं. सभी में चांद की सुंदरता का जिक्र किया गया है. अब जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें चांद की सतह पर ढेरों गड्ढे दिखाए गए हैं.
चांद की नई तस्वीरों को लेकर जब हमने ChatGPT से शायरी करने को कहा, तो उसने कुछ ऐसा रिजल्ट दिया.
चंद्रयान ने चांद से भेजी तस्वीर नई,
नए चांद की पहली झलक, बहुत खूबसूरती सही.
अब तो रातों में भी उसकी यादें होगी सजीव,
नई चांदनी में खोकर, नये ख्वाब बुनाने का दौर है आया.
जब चांद की गड्ढों को देखा हमने,
कुछ अलग सा रंग लगा हम सभी.
उसकी बदसूरत गड्ढ़ों में छिपी,
एक खूबसूरती को पाया हम सभी.
मोहब्बत के रंग में गढ़े हैं वो,
चांद की रूपविन तस्वीरें हम सभी.
सुंदरता से नहीं जुड़ी हैं वो,
पर उसमें छिपी खासी हैं खूबसूरती.
चांद के गड्ढों में हैं अनजानी सी खासियत,
वो बदलते रंगों में बसी एक रहस्यमयी सजगत.
देखने वाले को जीता देती उसकी बेख़ुदी,
जिसे समझ न पाए, उसके लिए वही सच्ची अदाएं बेहद महत्वपूर्ण.
ज़िन्दगी के इन गड्ढों में छिपी हैं सच्ची खुशियां,
जो नज़रों से छिपती हैं और दिलों में बसती हैं.
इसरो की तस्वीरें बदसूरत नहीं, बल्कि रहस्यमयी हैं,
जो भारत के अंतरिक्ष की कहानी सभी से कहती हैं.
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ChatGPT एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम है, जो आजकल काफी चर्चित है. इस प्लेटफॉर्म पर यूजर्स लॉगइन करके अपनी जरूरत के हिसाब से सवाल पूछ सकते हैं. अधिकतर सवाल के ये प्लेटफॉर्म जवाब दे देता है. इतना ही नहीं कई लोग इससे लेटर, होमवर्क और कई सजेशन तक मांगते हैं.
ISRO ने 5 अगस्त 2023 को चंद्रमा के ऑर्बिट में चंद्रयान-3 को पहुंचा दिया. अब चंद्रयान-3 चांद के चारों तरफ 1900 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चांद के चारों तरफ घूम रहा है. फोटो में एक गोल्डन कलर का सोलर की मशीन भी नजर आ रही है, जो असल में चंद्रयान-3 का सोलर पैनल है.
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आने वाले समय में चंद्रयान-3 को कई नए पढ़ाव से गुजरना है. 9 अगस्त की दोपहर करीब दो बजे इसके ऑर्बिट को बदलकर 4 से 5 हजार किलोमीटर की ऑर्बिट में डाला जाएगा. 14 अगस्त की दोपहर इसे घटाकर 1,000 किलोमीटर किया जाएगा. पांचवें ऑर्बिट मैन्यूवर में इसे 100 किलोमीटर की कक्षा में डाला जाएगा. 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे.18 और 20 अगस्त को डीऑर्बिटिंग होगी. इसके बाद 23 की शाम को चंद्रयान की लैंडिंग कराई जाएगी.