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Trump सरकार का इफेक्ट? Mark Zuckerberg ने लिया बड़ा फैसला, बंद किया Meta का फैक्ट चेक प्रोग्राम

Donald Trump के शपथ ग्रहण से परले Mark Zuckerberg ने एक बड़ा ऐलान किया है. वे Meta की पॉलिसी में बदलाव करने जा रहे हैं, साथ ही Meta Fact Check Program को खत्म करने जा रहे हैं. अब वह Elon Musk के X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) के कम्युनिटी नोट्स मॉडल को फॉलो करेंगे. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

Meta CEO Mark Zuckerberg Meta CEO Mark Zuckerberg
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 08 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव डोनाल्ट ट्रंप जीत चुके हैं और जल्द ही शपथ ग्रहण करेंगे. अब सवाल आता है कि क्या उनके आते ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा? इसी बीच Facebook के को-फाउंडर और Meta CEO Mark Zuckerberg ने एक बड़ा फैसला लिया है. 

Mark Zuckerberg ने Meta Fact Check प्रोग्राम को बंद करने के साथ ही सेंसरशिप पॉलिसी में बदलाव करने का फैसला लिया है. साथ ही उन्होंने Elon Musk द्वारा चलाए जाने वाले X से इंस्पायर्ड कम्युनिटी नोट्स मॉडल की तरफ बढ़ रहे हैं. 

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इन सोशल मीडियो प्लेटफॉर्म पर से खत्म हो जाएगा प्रोग्राम

Mark Zuckerberg के इस फैसले के बाद Meta के तहत आने वाले सभी प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram, Threds पर से फैक्ट चेक प्रोग्राम खत्म कर दिया जाएगा. 

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क्या होता है कम्युनिटी नोट्स मॉडल? 

कम्युनिटी नोट्स मॉडल, वो मॉडल होता है जिसकी मदद से Elon Musk ने अपने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) को पॉपुलर बनाया है. Meta चीफ ग्लोबल ऑफिसर जोएल कैपलान ने बताया कि उन्होंने इस मॉडल को X प्लेटफॉर्म पर सफलता पर पहुंचते देखा है. इस मॉडल में वे अपनी कम्युनिटी को यह तय करने का अधिकार देते हैं कि संभावित तौर पर गलत है.

Mark Zuckerberg के फैसले से खुश नजर आए ट्रंप   

Mark Zuckerberg के इस फैसले के बाद कहीं ना कहीं अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  खुश नजर भी आए. जब पत्रकारों के एक समूह ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि यह जुकरबर्ग के खिलाफ उनकी धमकियों का जवाब है, तो उन्होंने कहा, 'शायद, हां.'

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Mark Zuckerberg ने माना, कई जगह खामियां थीं

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Mark Zuckerberg ने कहा कि फेसबुक के मॉडरेशन के मुद्दों में फैक्ट चेक में कई जहग गलतियां पाई गई हैं. रिपोर्ट्स में वीडियो का हवाला देकर कहा कि फैक्ट चेक करने वाले राजनीतिक रूप से पक्षपात कर रहे थे. 

कब शुरु हुआ था फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम ? 

Meta पर चल रहे फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम की शुरुआत तब हुई थी, जब कंपनी का नाम Facebook था. यह प्रोग्राम साल 2016 में शुरू हुआ था. यह प्रोग्राम गलत सूचनाओं की पहचान करने और लेबल करने के लिए थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर पर निर्भर करते थे.

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