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Google को झटका! बड़ी तैयारी में अमेरिका, कंपनी को बेचना पड़ सकता है Chrome

Google को अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट से बड़ा झटका लग सकता है. DOJ गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट को अपना ब्राउजर Chrome बेचने के लिए मजबूर करवा सकती है. इसकी वजह गूगल के खिलाफ इस साल अगस्त में आया एक फैसला है, जिसमें अदालत ने माना है कि गूगल ने मार्केट में अपनी स्थिति का फायदा उठाया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

Google को बेचना पड़ सकता है क्रोम ब्राउजर (Photo: AI जनरेटेड) Google को बेचना पड़ सकता है क्रोम ब्राउजर (Photo: AI जनरेटेड)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:09 AM IST

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट गूगल पर क्रोम को बेचने के लिए दबाव बनवा सकता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, US जस्टिस डिपार्टमेंट, Google की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट पर Chrome ब्राउजर को बेचने का दबाव बनाने के लिए जज से कह सकता है. इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से ये जानकारी दी गई है. 

इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और गूगल के Android ऑपरेटिंग सिस्टम को लेकर भी डिपार्टमेंट महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है. इसके अलावा जज अमित मेहता दिग्गज टेक कंपनी के लिए डेटा लाइसेंसिंग को जरूरी कर सकते हैं. 

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गूगल के खिलाफ कोर्ट ने क्या कहा?

अगर ये सभी फैसले ले लिए जाते हैं, तो ये किसी भी टेक्नोलॉजी कंपनी के खिलाफ उठाया गया सबसे बड़ा कानूनी कदम होगा. अगस्त में आए एक फैसले में कोर्ट ने गूगल को एंटी-ट्रस्ट नियमों के उल्लंघन का दोषी माना था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गूगल ने सर्च और एडवर्टाइजमेंट मार्केट में अपने एकाधिकार का गलत फायदा उठाया है. 

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कोर्ट ने कहा था, 'सभी गवाहों और सबूतों को ध्यान से देखने और समझने पर अदालत इस फैसले पर पहुंची है कि गूगल एकाधिकारवादी है और उसने अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए काम किया है.'

मार्केट में Chrome की हिस्सेदारी

मौजूदा ग्लोबल ब्राउजर मार्केट पर नजर डाले तो Google Chrome की 65 परसेंट की हिस्सेदारी है. वहीं Apple Safari का मार्केट शेयर 21 फीसदी है. गूगल को Android OS को लेकर भी कड़े फैसलों का सामना करना पड़ सकता है. रिपोर्ट की मानें तो गूगल को Android OS को अपनी दूसरी सर्विसेस से अलग करना होगा. इसमें सर्च और Google Play Mobile सर्विसेस हैं. 

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अभी आप एक Android स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो उसमें गूगल की तमाम सर्विसेस प्री-इंस्टॉल्ड होती हैं. हालांकि, भविष्य में ये कहानी बदल सकती है. गूगल आपको सर्च इंजन से लेकर मेल सर्विसेस और दूसरी सर्विसेस को अलग से जोड़ने की सुविधा दे सकता है. इस मामले में फैसला होने में अभी वक्त लगेगा.

जज अमित मेहता गूगल के मामले में अगस्त 2025 में फैसला सुना सकते हैं. उसके बाद ही कंपनी इसके खिलाफ अपील कर पाएगी. Chrome गूगल के लिए एक महत्वपूर्ण असेट है. इसके जरिए कंपनी की बड़ी कमाई होती है. इन सब के अतिरिक्त अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का वापस सत्ता में आना इस मामले में बड़ा उल्टफेर कर सकता है. गूगल के खिलाफ इस केस की शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुई थी. हालांकि, इसमें फैसला बाइडेन के कार्यकाल में आया है.  

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