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मेनस्ट्रीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार बैन होने और बढ़ती स्क्रूटनी की वजह से आतंकी संगठन अब इंटरनेट के दूसरे हिस्से का इस्तेमाल कर रहे हैं. वैसे तो इंटरनेट के जिस हिस्से को हम जानते हैं, वो मजह कुछ परसेंट ही है. इंटरनेट की दुनिया के तमाम संदिग्ध काम डार्क वेब पर होते हैं.
पिछले कुछ वक्त में डिसेंट्रलाइज्ड ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स का चलन बढ़ा है. आतंकी संगठन TRF (द रेजिस्टेंस फोर्स) मेन स्ट्रीम सोशल मीडिया के बजाय अब इन डिसेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा है. इस तरह से प्लेटफॉर्म्स पर TRF अकेला नहीं है, बल्कि अल कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन भी अपना प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं.
इस तरह के आतंकी संगठन रॉकेट चैट और मैट्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं, जो डिसेंट्रलाइज्ड हैं. यानी इनके सोर्स कोड को किसी भी डेवलपर्स द्वारा मॉडिफाई किया जा सकता है. जहां किसी भी सेंट्रलाइज्ड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्क्रूटनी आसानी से की जा सकती है.
वहीं डिसेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म्स पर ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है. इन प्लेटफॉर्म्स के डेटा का कोई केंद्र नहीं होता है. आतंकी संगठन इसका फायदा अपना प्रोपेगेंडा फैलाने और लोगों को ट्रेनिंग देने में भी कर रहे हैं.
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इंडिया टूडे को TRF के एक सीक्रेट चैट रूम का एक्सेस मिला है, जो Matrix पर मौजूद है. हमने इस प्लेटफॉर्म पर TRF की बातचीत को कई दिनों तक मॉनिटर किया है. TRF के इस चैट रूम में कुल 65 मेंबर्स मौजूद हैं. इस कन्वर्सेशन को दो एडमिन्स रेगुलेट करते हैं, जो भारतीय राज्यों, सरकारी अधिकारियों और कश्मीर के मामलों पर भारत के पक्ष में बोलने वालों को लेकर बयान जारी करते रहते हैं.
सिर्फ TRF ही नहीं बल्कि अल कायदा का चैनल भी Matrix पर मौजूद है, जिसमें 59 मेंबर्स हैं. इनमें से कुछ सदस्य एक और चैनल चलाते हैं, जिसका नाम Curriculum Book है. इस चैनल पर मुस्लिमों को भड़काया जाता है. उन्हें हमले की ट्रेनिंग और गोरिल्ला युद्ध के बारे में समय-समय पर जानकारी दी जाती है.
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इन चैनल्स पर गाइड बुक भी शेयर की जाती है, जिसमें से कुछ का टाइटल- 'Physical exercise before jihad' (जिहाद से पहले फिजिक्ल एक्सरसाइज), 'How to confront and deal with intelligence' (इंटेलिजेंस का सामना कैसे करें और उससे कैसे निपटें), 'Military training for mujahid' (मुजाहिद के लिए मिलिटरी ट्रेनिंग) और 'Explosive engineering course' (एक्सप्लोसिव इंजीनियरिंग कोर्स) शामिल हैं.
इसी तरह से एक चैनल Rocket Chat पर मौजूद है, जो IS से जुड़ा हुआ है. इस प्लेटफॉर्म पर भी एक वेब मैगजीन मौजूद है, जिसमें भारत के खिलाफ तमाम रेफरेंस दिए गए हैं.
जहां फेसबुक, X, इंस्टाग्राम, WhatsApp और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन आंतकी संगठनों को आसानी से ट्रैक किया जा सकता था. वहीं मैट्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर इन्हें ट्रैक करना मुश्किल है. ये प्लेटफॉर्म्स ज्यादा ट्रांसपैरेंसी और कंट्रोल यूजर को ऑफर करते हैं. इनका फोकस एन्क्रिप्शन और कम से कम डेटा इकट्ठा करने पर होता है.