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इस सऊदी महिला के iPhone की हैकिंग ने पूरी दुनिया में मचा दी थी हलचल, खुल गई थी NSO Group की पोल

NSO Group के जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus के बारे में सऊदी अरब की एक महिला को पता चला था. इस महिला का नाम Loujain al-Hathloul है.

Image: REUTERS Image: REUTERS
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 1:26 PM IST
  • जासूसी सॉफ्टवेयर बनाता है NSO Group
  • Pegasus के जरिए कई लोगों की जासूसी

NSO Group का स्पाईवेयर Pegasus अभी काफी चर्चा में था. NSO Group के जासूसी सॉफ्टवेयर का यूज करके दुनियाभर के सैकड़ों लोगों को निशाना बनाया गया. अब NSO Group की मुसीबत बढ़ गई है. इस पर Washington में कानूनी कार्रवाई और जांच की जा रही है. 

क्या आपको पता है इस स्पाईवेयर का कैसे पता चला?

जासूसी सॉफ्टवेयर की एक खामी के कारण सऊदी अरबिया की एक महिला को इस खतरनाक सॉफ्टवेयर के बारे में पता चला. सऊदी अरबिया की महिला एक्टिविस्ट Loujain al-Hathloul और प्राइवेसी रिसर्चर को ठोस सबूत मिले कि इजरायली स्पाईवेयर ने उनके iPhone को हैक किया था. 

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उनके फोन में स्पाईवेयर के द्वारा डाला गया एक फोटो गलती से रह गया था. Loujain al-Hathloul के फोन की जांच के बाद पिछले साल NSO ग्रुप पर सरकार ने एक्शन लिया और इसे कटघरे में खड़ा कर दिया. 

ये भी पढ़ें:-जानिए क्या है जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus जो WhatsApp भी कर सकता है हैक, ऐसे बनाता है निशाना

जानी-पहचानी एक्टिविस्ट हैं Al-Hathloul

आपको बता दें कि Al-Hathloul सऊदी अरबिया की एक जानी-पहचानी एक्टिविस्ट हैं जिन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी नहीं चलाने देने वाले कानून को खत्म करने के लिए कैंपेन किया था. उन्हें फरवरी 2021 में जेल से रिहा किया गया था. 

इसके बाद उन्हें Google की ओर से एक चेतावनी वाला ईमेल मिला था. जिसमें बताया गया था कि हैकर्स उनके जीमेल अकाउंट को हैक करने की कोशिश कर रहे थे. उनका iPhone भी हैक तो नहीं हो गया इस डर से उन्होंने कनाडा के प्राइवेसी राइट ग्रुप Citizen Lab से कॉन्टैक्ट किया और उन्हें डिवाइस चेक करने के लिए कहा. 

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Citizen Lab के रिसर्चर ने लगाया पता

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार 6 महीने तक iPhone रिकॉर्ड्स को चेक करने के बाद Citizen Lab के रिसर्चर Bill Marczak ने बताया कि उनके डिवाइस में एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर था. ये टारगेट के डिवाइस से मैसेज को चुरा लेता है. 

उन्होंने बताया कि कंप्यूटर कोड जो अटैकर्स ने छोड़ा था वो साफ इशारा करता है कि NSO ने इस टूल को बनाया था. Marczak ने कहा ये गेम चेंजर था. इसके बाद Apple ने हजारों स्टेट बैक हैकिंग विक्टिम के बारे में पता लगाया. 

यूएस ऑफिशियल के अनुसार NSO साइबर वेपन का यूज अमेरिकी डिप्लोमेट्स पर भी नजर रखने के लिए किया गया. NSO के स्पोक्सपर्सन ने ये नहीं बताया था कि सॉफ्टवेयर का यूज Al-Hathloul और दूसरे एक्टिविस्ट को टारगेट करने के लिए किया गया या नहीं. 

Project Raven के तहत पहले भी किया गया टारगेट

ये पहली बार नहीं था जब Al-Hathloul को टारगेट किया गया. Reuters investigation के अनुसार उन्हें साल 2017 में भी टारगेट किया गया था. उन्हें सीक्रेट प्रोग्राम Project Raven के तहत United Arab Emirates ने टारगेट किया था. 

उन्हें राष्ट्र के लिए खतरा बताया गया था और उन्हें तीन साल के लिए सऊदी अरबिया के जेल में बंद कर दिया गया. उन्हें फरवरी 2021 में छोड़ा गया और देश छोड़ने से मना कर दिया गया था. Citizen Lab के रिसर्चर के अनुसार उनके iPhone में जीरो-क्लिक स्पाईवेयर का यूज किया गया था. इससे टारगेट अगर किसी लिंक पर क्लिक ना भी करें फिर भी उसका डिवाइस इंफैक्ट हो सकता है. 

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