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Twitter पर दक्षिणपंथी विचारधारा को मिलती है प्राथमिकता, कंपनी ने माना

Twitter पर राइट विंग कंटेंट लेफ्ट विंग से ज्यादा तेजी से फैलता है. Twitter के एल्गोरिदम की वजह से ऐसा होता है. लेकिन, ऐसा क्यों होता है कंपनी को इस बारे में नहीं पता है.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST
  • Twitter पर राइट विंग कंटेंट लेफ्ट विंग से ज्यादा तेजी से फैलता है
  • इसको लेकर एक इंटरनल स्टडी की गई
  • Twitter ने साल 2020 के 1 अप्रैल से 15 अगस्त तक लाखों ट्वीट्स को चेक किया

माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट Twitter पर राइट विंग कंटेंट लेफ्ट विंग से ज्यादा तेजी से फैलता है. Twitter के एल्गोरिदम की वजह से ऐसा होता है. इसको लेकर खुद कंपनी ने बताया है. लेकिन, ऐसा क्यों होता है इसके बारे में ट्विटर को नहीं पता है. 

Twitter ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि किस तरह के पॉलिटिकल कंटेंट ट्विटर पर ज्यादा फैलते हैं इसको लेकर एक इंटरनल स्टडी की गई. कुछ कारणों से मशीन लर्निंग राइट विंग कंटेंट को ज्यादा रिकमेंड कर रहा था. 

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Twitter ने साल 2020 के 1 अप्रैल से 15 अगस्त तक लाखों ट्वीट्स को चेक किया. ये ट्वीट्स न्यूज  आउटलेट्स और इलेक्टेड ऑफिशियल्स के थे. इसमें फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, स्पेन, जापान, यूके और यूएस शामिल थे. 

सभी देश में (जर्मनी को छोड़कर) ट्विटर ने पाया कि उसका एल्गोरिदम राइट की ओर झुकाव वाले अकाउंट को पॉलिटिकल लेफ्ट पर प्रायोरिटी देता है. इस बायस की वजह से मीडिया आउटलेट्स जिन्होंने राइट विंग कंटेंट को पब्लिश किया उन्हें ज्यादा अट्रैक्शन मिला. 

इसके बावजूद ट्विटर को इस बात का जवाब नहीं दे पा रहा है कि इसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस राइट विंग कंटेंट को प्लटेफॉर्म पर कई देशों में क्यों बढ़ावा दे रहा है. इसपर ट्विटर ने कहा कि ये लोगों और प्लेटफॉर्म के बीच इंटरएक्शन का प्रोडक्ट है. 

इसको लेकर कोई ठोस उत्तर नहीं है लेकिन जर्मनी की बड़े टेक कंपनियों जैसे फेसबुक, गूगल और ट्विटर के साथ एग्रीमेंट की वजह से ऐसा हो सकता है. जर्मनी में कंपनियों को हेट स्पीच को 24 घंटे के अंदर प्लेटफॉर्म पर से हटाना पड़ता है. ये इंटरनल स्टडी आने के बाद कंपनी इसे कैसे फिक्स करती है वो देखने वाली बात होगी. 

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