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क्या होते हैं Mule बैंक अकाउंट, जिन्हें ट्रैक करने के लिए सरकार करेगी AI का इस्तेमाल

What is Mule Account: गृह मंत्री अमित शाह ने म्यूल अकाउंट्स को ट्रैक करने के लिए AI का इस्तेमाल करने की बात कही है. उन्होंने सोमवार को हुई एक बैठक में ये जानकारी दी है. म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं. इन अकाउंट्स के ट्रैक होने से साइबर अपराधी की गतिविधि पर रोक लगाई जा सकेगी.

AI जनरेटेड फोटो AI जनरेटेड फोटो
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स की पहचान के लिए सरकार AI का इस्तेमाल करने की प्लानिंग कर रही है. इसकी जानकारी गृह मंत्री अमित शाह ने दी है. साइबर फ्रॉड्स के लगातार बढ़ते मामलों को रोकने के लिए सरकार इस कदम को उठाने पर विचार कर रही है. उन्होंने बताया कि 805 ऐप्स और 3,266 वेबसाइट लिंक को भारतीय साइबर अपराध कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) की सिफारिशों पर ब्लॉक किया गया है. 

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इसके अलावा 399 बैंक और वित्तीय संस्थान इसमें शामिल हुए और 6 लाख से अधिक संदिग्ध डेटा पॉइंट शेयर किए गए हैं. गृह मंत्री ने बताया कि 19 लाख से अधिक म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है और 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया है.

AI  से होगी म्यूल अकाउंट्स की पहचान 

गृह मंत्री ने कहा कि RBI और दूसरे बैंकों के साथ कॉर्डिनेशन में म्यूल अकाउंट्स को पहचानने के लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए एक प्रणाली स्थापित की जा जाएगी. शाह ने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि म्यूल अकाउंट्स को सक्रिय होने से पहले ही बंद कर दिया जाए. 

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क्या होता है म्यूल अकाउंट? 

म्यूल अकाउंट वे बैंक अकाउंट्स होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं. सामान्य भाषा में कहें, तो साइबर अपराधी आम लोगों से ठगे हुए पैसों को अपने अकाउंट में ट्रांसफर नहीं करते हैं. वे इन पैसों को पहले किसी म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर करेंगे. इसके बाद वे उस पैसों को अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर करते हैं. ये पूरी प्रक्रिया एक चेन की तरह काम करती है, जिससे ठगी के पैसों को ट्रैक कर पाना मुश्किल हो जाता है.

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गृह मंत्री ने बताया कि I4C पोर्टल पर कुल 1,43,000 FIR दर्ज की गई हैं, जिनका फायदा 19 करोड़ से अधिक लोगों को मिला है. साइबर ठगी से जुड़े अपराधों को ध्यान में रखकर '1930' हेल्पलाइन को जारी किया गया है, जिस पर लोग शिकायत कर सकते हैं.

साइबर फ्रॉड से कैसे बच सकते हैं आप 

स्कैमर्स लोगों को फंसाने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. इससे बचने का सबसे बेहतर विकल्प यूजर्स का जागरूक होना है. अगर आप जागरूक रहेंगे, तो साइबर अपराधी आपको अपना शिकार नहीं बना पाएंगे. किसी भी अनजान शख्स से आपको अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर नहीं करनी चाहिए. 

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किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक ना करें. वॉट्सऐप, टेलीग्राम या इंस्टाग्राम के माध्यम से मिलने वाली इन्वेस्टमेंट टिप्स को फॉलो करने से बचे. बेहतर होगा कि आप किसी एक्सपर्ट की सलाह पैसे इन्वेस्ट करने के लिए लें. अगर किसी अनजान नंबर से आपको पुलिस, TRAI या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के नाम पर फोन आता है, तो उस पर विश्वास ना करें. ऐसे लोग साइबर अपराधी हो सकते हैं, जो आपको डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगेंगे.

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