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जानिए क्या है जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus जो WhatsApp भी कर सकता है हैक, ऐसे बनाता है निशाना

Pegasus Spyware एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. इस जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए लोगों की जासूसी की जाती है. Pegasus को इजरायली कंपनी NSO Group ने बनाया है. लेकिन, क्या आपको इससे डरने की जरूरत है? आइए जानते हैं.

फोटो- रॉयटर्स फोटो- रॉयटर्स
सुधांशु शुभम
  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST
  • स्पाईवेयर यानी जासूसी सॉफ्टवेयर है पेगासस
  • NSO Group ने तैयार किया है इसे
  • लगभग 4-5 साल पहले देखा गया था

Pegasus Spyware को लेकर एक बड़ा दावा किया गया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Pegasus-Spyware को भारत सरकार को भी वेपन्स डील के जरिए बेचा गया. इसके बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है. 

Pegasus Spyware को लेकर पिछले साल बड़े खुलासे किए गए थे. इसमें बताया गया था कि इसके जरिए जर्नलिस्ट, विपक्ष और एक्टिविस्ट पर नजर रखी जा रही थी. अब ऐसे में सवाल उठता है क्या है ये जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस और कैसे करता है काम?

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क्या है पेगासस?

पेगासस एक तरह का स्पाईवेयर है. स्पाईवेयर यानी जासूसी सॉफ्टवेयर. इसे आपके डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप में बिना आपकी जानकारी के इंस्टॉल कर दिया जाता है. जो आपके डिवाइस से आपके पर्सनल डेटा को चुराता रहता है. 

Pegasus Spyware को इजरायली कंपनी NSO Group ने तैयार किया है. इससे टारगेट के डिवाइस का एक्सेस गेन कर लिया जाता है और बिना यूजर की जानकारी के इसे थर्ड पार्टी को डिलीवर किया जाता है. NSO Group का दावा है ये स्पाईवेयर का यूज सरकार को करने की परमिशन देता है ताकि टेररिस्ट और क्रिमिनल्स पर नजर रख कर उसे पकड़ा जा सके.

पहली बार कब देखा गया पेगासस?

इसे सबसे पहले लगभग 4 या 5 साल पहले देखा गया था जब एक United Arab Emirates के एक्टिविस्ट को एक टैक्सट मैसेज आया. ये टैक्सट मैसेज फिशिंग सेटअप था. जब मैसेज की जांच की गई तो सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया अगर वो मैसेज के लिंक को ओपन करती तो उनके फोन में पेगासस मैलेवेयर इंस्टॉल हो जाता. इसके बाद पेगासस को भी एडवांस बनाया गया और इसे बिना लिंक ओपन किए भी टारगेट डिवाइस पर इंस्टॉल किया जा सकता है. 

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Pegasus को कैसे किया जाता है इंस्टॉल?

Pegasus Spyware डिवाइस पर ऐसे अटैक करता है कि डिवाइस ओनर को इसके बार में खबर नहीं होती है. इसको लेकर कहा जाता है कि एक WhatsApp मिस्ड कॉल के जरिए भी इसे फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है. सिक्योर माने जाने वाले आईफोन में ये iMessage की सिक्योरिटी खामी का फायदा उठाकर अटैक करता था. 

सबसे खतरनाक बात ये है कि ये जीरो-क्लिक मैथेड का यूज करता है. यानी अगर डिवाइस ओनर किसी मैसेज या मेल में लिंक पर नहीं भी क्लिक करते हैं तब भी ये मैलवेयर काम करता है. अगर यूज को कोई मैसेज संदिग्ध लगता है और मैसेज को डिलीट कर देते हैं फिर भी ये स्पाईवेयर डिवाइस को इंफैक्ट कर सकता है. 

Pegasus कैसे करता है काम?

एक बार पेगासस आपके फोन में आ गया फिर आपके सारा डेटा को ये दूसरी पार्टी को भेजने लगता है. इसमें टैक्सट मैसेज, ईमेल, कॉन्टैक्ट, फोटो, पासवर्ड भी शामिल हैं. इसके अलावा ये डिवाइस के माइक और कैमरा को ऑन करके आसपास की फोटो और ऑडियो को कैप्चर कर सकता है. 

क्या आपको डरने की जरूरत है?

ये स्पाईवेयर वॉट्सऐप चैट्स को भी एन्क्रिप्टेड होने से पहले या डिक्रिप्टेड होने के बाद एक्सेस कर सकता है. इस स्पाईवेयर से नॉर्मल यूजर को डरने की जरूरत नहीं है. इसको लेकर जैसा कि पहले बताया जा चुका है इसको ऑपरेट करने में करोड़ों रुपये लगते हैं. लेकिन, इसका ये मतलब नहीं है कि आप पेगासस जैसे स्पाईवेयर से अपने आप को सेफ मान सकते है.

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अगर आने वाले टाइम में इसके और ज्यादा अफोर्डेबल बना दिया जाए तो इसका मिसयूज काफी ज्यादा होने लगेगा और लोगों की पर्सनल जानकारियां स्पाईवेयर के जरिए एक्सेस की जाने लगेगी. आप इससे पूरी तरह से बच नहीं सकते हैं लेकिन आपको अपनी प्राइवेसी का ख्याल रखना होगा. 

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