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वर्चुअल जेल, डिजिटल अरेस्ट और नकली अफसर, किस तरह लोगों को लूट रहे साइबर ठग!

What Is Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट के कई मामले पिछले दिनों देखने को मिले हैं. इस तरह के मामलों में स्कैमर्स लोगों को पुलिस की धमकी देकर डराते हैं. मामले को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए स्कैमर्स नकली अधिकारी बनकर बात करते हैं. इससे सामने वाला शख्स डर जाता है और खुद को पुलिस केस से बचाने के लिए आसानी से पैसे दे देता है. आइए जानते हैं पूरा मामला.

क्या होता है Digital Arrest? क्या होता है Digital Arrest?
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:32 AM IST

अनजान नंबर से आई एक कॉल न सिर्फ आपके अकाउंट को पूरी तरह खाली कर देगी, बल्कि आपको अपने जाल में कुछ इस तरह से फंसाएगी की बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आएगा. आखिर में आप सिर्फ वही करेंगे जो सामने वाला कहेगा. इसलिए वक्त रहते सावधान हो जाइए.

दिल्ली-NCR के इलाकों में ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों से अब इस तरह की कहानियां सामने आ रही हैं. जहां साइबर ठगों ने लोगों को मजबूर कर उनके पैसे हड़प लिए. ताजा मामला नोएडा का है. यहां पर साइबर ठगों ने एक महिला इंजीनियर को इतना डरा दिया की उसने खुद से ग्यारह लाख रुपये ठगों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए.

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कैसे स्कैमर्स ने फंसाया?

रीता यादव के मुताबिक कुछ दिनों पहले एक महिला इंजीनियर ने शिकायत दी कि उसके पास सुबह-सुबह एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने बताया कि वह ट्राई से बोल रहा है और अगले 2 घंटे में उसका फोन बंद हो जाएगा. इसके बाद उस शख्स ने महिला को एक नंबर दिया और बोला कि यह क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर का नंबर है इनसे बात कर लीजिए. 

महिला ने इंस्पेक्टर को तुरंत कॉल किया, वो शख्स तुरंत Skype काल पर आ गया, उसने महिला से कहा कि पहले तो आप कहीं जाएंगी नहीं. अब बैठ जाइए. आपसे लंबी पूछताछ करनी है.

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फिर उस नकली इंस्पेक्टर ने कहा की आपका आधार और मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग में आया है. एक अकाउंट खोला गया है जिसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई है और कमीशन के तौर पर महिला को 20 लख रुपये मिले हैं.

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पुलिस के मुताबिक, महिला ने कहा कि उसके आधार का कहीं कोई गलत उपयोग नहीं हुआ है. लेकिन उस नकली अधिकारी ने फिर एक नकली आईपीएस से भी इस महिला की बात करवाई.

वीडियो कॉल पर चला केस

ये सब कुछ वीडियो कॉल पर चल रहा था और उन दोनों ने मिलकर महिला इंजीनियर को इतना डरा दिया कि वह 8 घंटे से ज्यादा वक्त तक मोबाइल के सामने से हिल नहीं पाई. क्योंकि ऐसा करने पर जेल भेज देने की धमकी दी गई थी. अंततः जमानत और दूसरी कानूनी कार्रवाई के नाम पर महिला से 11 लाख रुपये लेने के बाद स्कैमर्स ने फोन कटा दिया.

इसके बाद महिला को शक हुआ कि कहीं वो फ्रॉड का शिकार तो नहीं हुई है.  महिला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां उसे पता चला कि साइबर ठगों ने उसे चुना लगा दिया है. पुलिस का कहना है कि मामले में FIR दर्ज की कर ली गई है.

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मनी ट्रेन और जिस नंबर से कॉल की गई उसकी जानकारी है. जल्दी ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा. पुलिस ने बताया है कि कानून की किताब में फिलहाल डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं है.

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क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

कानून की भाषा मे डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं, लेकिन ठगों की भाषा मे यह बेहद महत्वपूर्ण हो है. नोएडा और फरीदाबाद के मामलों में भी ऐसा ही हुआ. डिजिटल अरेस्ट के मामले में स्कैमर्स एक वर्चुअल लॉकअप भी बना देते हैं और अरेस्ट मेमो पर दस्तखत भी डिजिटल कराया जाता है.

फरीदाबाद में डरा-धमका कर इन ठगों ने 17 दिनों तक एक लड़की को घर के अंदर रहने को मजबूर कर दिया था. नोएडा के मामले में पीड़िता बिना खाए पिए करीब 9 घंटे फोन के सामने बैठी रही. डिजिटल अरेस्ट में ये फेक फॉर्म भी भरवाते हैं.

सब कुछ डिजिटल होता है लेकिन ये इतना डरा देते हैं कि पीड़ित घर के बाहर तक नहीं निकलता. इसके लिए स्कैमर्स बड़ी एजेंसियों और अधिकारियों के शामिल होने, सालों जेल में रहने जैसी बातों से डराते हैं.

डीपफेक वीडियो से बना रहे शिकार

27 नवंबर को गाजियाबाद में एक बुजुर्ग को रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर का फेक वीडियो इस्तेमाल कर ठगने का मामला सामने आया है. यहां पर रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी के नाम से फेक वीडियो बनाकर धमकी दी गई.

पुलिस को शक है कि AI की मदद से डीपफेक वीडियो बनाया गया है. पीड़ित की बेटी ने ईमेल के जरिए पुलिस में शिकायत की थी, जिस पर 27 नवंबर को पुलिस ने 66d आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है.

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वीडियो में बुजुर्ग से कहा गया कि अगर वो पैसा नहीं देगा तो उसके खिलाफ कई फेक केस दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा. वीडियो में उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी का चेहरा नजर आ रहा था. वीडियो की जांच के लिए उसे फॉरेंसिक लैब में भेज दिया है. फिलहाल इन दोनों मामलों की जांच जारी है.

इन सब से एक बात तो साफ है कि फ्रॉड्स पुलिस अधिकारी और बड़ी एजेंसियों के नाम पर लोगों को डरा कर पैसे लूट रहे हैं. इनसे बचने के लिए आपको थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. किसी भी अनजान नंबर से आई कॉल की जानकारी पर भरोसा ना करें. डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है, जिसके नाम पर ये स्कैमर्स लोगों को फंसा रहे हैं.

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