
5G सर्विस भारत में पिछले साल लॉन्च हुई थी. टेलीकॉम कंपनियां धीरे-धीरे अपनी 5G सर्विस का विस्तार कर रही है. हालांकि, 5G विस्तार में सिर्फ जियो और एयरटेल शामिल हैं, क्योंकि VI (वोडाफोन आइडिया) अब तक रेस में नहीं उतरी है. दोनों ही टेलीकॉम कंपनियों ने 3000 से ज्यादा शहरों में अपनी 5G सर्विस को लाइव कर दिया है.
वहीं कई देशों में 5G से आगे की तैयारी शुरू हो गई है. हम 6G की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि 5G और 6G के बीच के नेटवर्क की चर्चा कर रहे हैं. यानी 5.5G की तैयारी कई देशों में शुरू हो गई है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.
दरअसल, 5G को लेकर दुनियाभर के लोगों में उत्साह था, उन्हें वैसा रिजल्ट नहीं मिला है. इसकी वजह से टेलीकॉम कंपनियों ने एक अपग्रेड लाने का फैसला किया है, जिसमें 5.5G का नाम दिया गया है.
रिपोर्ट्स की मानें तो इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन ने 5G के लिए पीक स्पीड 20Gbps सेट की थी, लेकिन इसकी एवरेज ग्लोबल स्पीड टार्गेट के 1 परसेंट तक भी नहीं पहुंच पाई. मोबाइल कंपनियों की मानें तो नेक्स्ट जनरेशन 5G या 5.5G सर्विस साल 2025 तक लॉन्च होगी.
5G सर्विस कभी भी 20Gbps तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन हुवावे टेक्नोलॉजी के एक्सजीक्यूटिव की मानें तो 5.5G में यूजर्स को 10Gbps तक की स्पीड मिलेगी. रिपोर्ट्स की मानें तो दुनियाभर में जैसे-जैसे 5G नेटवर्क एडॉप्ट हो रहा है, इसकी एवरेज स्पीड कम होती जा रही है.
दि वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोर्ट Ookla के मुताबिक बताया है कि फरवरी महीने में आश्चर्यजनक तरीके से 5G स्पीड में गिरावट आई है. इस लिस्ट में नॉर्वे, स्विडन, ऑस्ट्रेलिया और यूके शामिल हैं. इन देशों में 5G नेटवर्क की स्पीड पहले से कम हुई है.
5.5G नेटवर्क के लॉन्च होने से लगातार घटती 5G स्पीड को रोका जा सकेगा. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस टेक्नोलॉजी से इंटरनेट स्पीड तो बढ़ेगी, लेकिन कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा. यूजर्स को 5.5G नेटवर्क यूज करने लिए कॉम्पैटिबल डिवाइस भी चाहिए होगा.
हुवावे जैसी कंपनियों की मानें तो 5G टेक्नोलॉजी भविष्य की पॉसिबिलिटी के सिर्फ जमीन तक ही पहुंच पाई है. आने वाली टेक्नोलॉजी हमें एक नए युग में लेकर जाएगी. सेल्फ ड्राइविंग ड्रोन, ऑटोमेटिक कार्स, ऑटोमेटेड फैक्ट्री और दूसरी टेक्नोलॉजी इस स्पीड पर संभव नहीं हैं. इसके लिए टेलीकॉम सेक्टर को और बेहतर काम करना होगा.