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Cyber Crime के हो गए शिकार? बस डायल करें ये 4 अंक, वापस मिल जाएंगे पैसे

Cyber Crime की घटनाएं लगातर हो रही हैं. लेकिन, जानकारी के अभाव में कई लोग इसके बारे में शिकायत नहीं दर्ज करवा पाते हैं. हालांकि, इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी है. जिस पर कॉल करके आप साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. इसके लिए आपको केवल 1930 नंबर पर अपने फोन से कॉल करना है और साइबर क्राइम की पूरी जानकारी देनी है.

Cyber Crime होने की स्थिति में काम आएगा ये नंबर Cyber Crime होने की स्थिति में काम आएगा ये नंबर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

Cyber Crime की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इस वजह से लोगों को काफी आर्थिक नुकसान भी होता है. कई बार लोग समझ नहीं पाते हैं कि साइबर क्राइम होने की स्थिति में क्या करें. इससे वो इसकी शिकायत भी कहीं दर्ज नहीं करवा पाते हैं. जिसके कारण फ्रॉड में गए पैसे मिलने के चांसेज भी काफी कम हो जाते हैं. 

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आपको बता दें कि Cyber Crime की शिकायत करने का तरीका काफी आसान है. साइबर क्राइम से निपटने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है. इस नंबर पर डायल करके आप साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. 

डायल करना होगा ये नंबर

इसके लिए आपको केवल अपने फोन से 1930 नंबर पर कॉल करना है. इस नंबर पर साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है. इससे आपको साइबर ठगी के पैसे भी मिल सकते हैं. अगर आप किसी भी तरह के साइबर क्राइम के शिकार होते हैं तो आपको इसकी शिकायत 1930 पर दर्ज करवानी है. 

ये एक तरह से इमरजेंसी नंबर की तरह काम करेगा. इससे पहले यूजर्स को 155360 डायल करना होता था लेकिन, उस बंद करके अब 1930 नंबर से रिप्लेस कर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने DoT के साथ मिल कर इस नंबर को जारी किया था. 

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कैसे काम करता है हेल्पलाइन नंबर?

किसी तरह का साइबर क्राइम होने पर विक्टिम को हेल्पलाइन नंबर डायल करना होता है. इसके बाद कॉल करने वाले को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल में एक फॉर्मली कंप्लेंट दर्ज करने के लिए कहा जाता है. इसके बाद एक टिकट फाइनेंशियल इंटरमिडियरीज (FI) कंसर्न के साथ जेनरेट होता है. 

फ्रॉड ट्रांजैक्शन टिकट डेबिटेड (विक्टिम का बैंक अकाउंट) और क्रेडिटेड Fl (फ्रॉडस्टर का बैंक या वॉलेट) के डैशबोर्ड पर दिखता है. बैंक या वॉलेट जहां पर टिकट गया है वहां पर फ्रॉड ट्रांजैक्शन की डिटेल्स को चेक किया जा सकता है. 

अगर फंड को मूव किया जा चुका है तो फिर अगले Fl को इसकी डिटेल्स शेयर की जाती है. उसके बाद फिर से पहला वाला प्रोसेस रिपीट होता है. अगर फंड को मूव नहीं किया गया है तो उसे होल्ड कर दिया जाता है. साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में यूजर तुरंत सारी डिटेल्स साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें. इसमें देर करने से पैसे मिलने के चांसेज कम हो जाते हैं.

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