
पिछले एक दशक में स्मार्टफोन हम लोगों की लाइफ का एक अहम हिस्सा बन गया है. ज्यादातर काम डिजिटल होते जा रहे हैं और हमारी निर्भरता स्मार्टफोन पर बढ़ती जा रही है. मनोरंजन से लेकर पढ़ाई तक सब कुछ धीरे-धीरे स्मार्टफोन (डिजिटल) पर आता जा रहा है.
ऐसे में दिन भर हमारी नजर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर होती है. खाली वक्त मिले तो एंटरटेनमेंट के लिए लोग Instagram Reels से लेकर YouTube वीडियो तक देखते रहते हैं. वहीं अकेला महसूस हो तो हम Facebook और Twitter पर डिजिटल सोशल लाइफ में गपशप कर आते हैं.
इन सभी कामों में एक चीज कॉमन है वह है स्मार्टफोन या किसी दूसरे डिवाइस की स्क्रीन, जो आपके शरीर को काफी नुकसान पहुंचाती है. घंटो स्क्रीन को 'घूरने' से आपकी आखें बहुत ज्यादा प्रभावित होती हैं. आइए जानते हैं स्मार्टफोन या दूसरे डिवाइसेस की स्क्रीन हमें कैसे नुकसान पहुंचा रही हैं.
2010 के दशक को स्मार्टफोन का दशक कहते हैं. इस क्षेत्र में पिछले 10 सालों में बहुत रिसर्च हुई हैं. इसमें साफ पाया गया है कि Blue Light हमारे लिए बेहद खतरनाक है. Blue Light उस लाइट को कहते हैं, जो हमारे फोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे गैजेट्स की स्क्रीन से निकलती है.
इससे हमारी आंखे खराब हो सकती हैं. ब्लू लाइट से आपकी Retina में मौजूद Photoreceptor सेल खराब हो सकती है. ये सेल्स शरीर के उन हिस्सों के तरह हैं, जो एक बार खराब हो जाएं, तो उन्हें दोबारा जनरेट नहीं किया जा सकता है.
इसके अलावा ब्लू लाइट Melatonin के प्रवाह को भी रोकती है. Melatonin वह केमिकल होता है, जिसकी वजह से आपको नींद आती है. यही कारण हैं कि देर रात तक फोन इस्तेमाल करने वालों को नींद नहीं आती है.
बहुत ज्यादा ब्लू लाइट के संपर्क में आने से AMD (age-related macular degeneration) की समस्या होती है. सामान्यतः यह दिक्कत 60 साल के बाद होती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मनना है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने से ये दिक्कते उम्र से पहले होने लगती हैं.
लगातार फोन इस्तेमाल करने या ज्यादा स्क्रीन टाइम से आपकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही सिर दर्द की समस्य, कंधे और गर्दन में दर्द, आखों का लाल होना और सूखना, ध्यान न लगा पाना जैसी कई दिक्कतें भी होती हैं. हमारी सलाह है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल अपनी जरूरत के लिए करें, न कि इसे अपनी आदत बनाएं.