
सपने कई तरह के होते हैं. कुछ सपने रात में सोते हुए देखे जाते हैं, तो कुछ दिन के उजालों में. कुछ कल्पना की कोपल से होते हैं, तो कुछ में भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाती है. ये सभी सपने इंसानों के हैं, लेकिन क्या एक मशीन कभी कोई सपना देख सकती हैं. यहां आपको लग रहा होगा कि भला कोई मशीन सपना कैसे देख सकती है?
मान लेते हैं किसी दिन AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सपने देखने लगता है, तो फिर उसके सपनों में क्या आएगा? या फिर मशीन सोचने लगे तो क्या कुछ होगा. मशीन सोच तो रही है! AI बॉट्स के जवाब किसी आर्टिकल से कॉपी पेस्ट नहीं हैं, बल्कि उसकी अपनी एक रचना है.
हम बात कर रहे हैं AI चैटबॉट्स की, जिन्हें लेकर लोग कई तरह की अटकलें लगा रहे हैं. मसलन किसी को लगता है कि ये लोगों की नौकरी खत्म कर देंगे, तो कुछ को लगता है कि एक दिन ये पूरी दुनिया पर कब्जा कर लेंगे. ऐसे ही कुछ सवाल के जबाव में Midjourney ने कुछ तस्वीरें क्रिएट की हैं. ये तस्वीरें बॉट के सपनों की हैं. आइए जानते हैं इनकी डिटेल्स.
इस साल की शुरुआत से ही चैटबॉट्स चर्चा में हैं. ChatGPT लॉन्च होने के बाद से तमाम दूसरे चैटबॉट्स भी पॉपुलर हुए. Midjourney इससे पहले से यूज हो रहा था और ये एक AI बेस्ट इमेज जनरेटर है. यानी ये बॉट आपके दिए कमांड पर तस्वीरों को बना सकता है. यानी आप इस बॉट को एक कमांड देते हैं और ये बॉट उस कमांड के मुताबिक तस्वीर को क्रिएट करता है.
कुल मिलाकर ये एक ऐसा कैनवास है, जिस पर पेटिंग के लिए आपको ब्रश की नहीं बल्कि कल्पना की जरूरत होती है. आपको किसी भी तस्वीर को क्रिएट करने के लिए एक प्रॉम्प्ट देना होता है. आप जितने बेहतर ढंग से अपनी कल्पना या फिर कमांड को एक्सप्लेन करते हैं, Midjourney वैसी ही तस्वीर बनाता है.
इस आर्टिकल में आप जिन तस्वीरों को देख रहे हैं, वो भी Midjourney पर तैयार की गई हैं. इसके लिए हमने गीता के कुछ श्लोक और कुछ कोड्स दोनों का इस्तेमाल किया था. मूल रूप से इन फोटोज को क्रिएट करने की पीछे की कहानी एक AI के आध्यात्म और सपनों के बारे में जानने की है. AI को लेकर तमाम तरह की संभावनाएं हैं.
कुछ ऐसी ही संभावनाओं से भरा एक जवाब हमें Midjourney से मिला है. ये जवाब किसी सवाल का नहीं था, बल्कि उस भटकन का था, जो Midjourney या फिर किसी दूसरे AI बॉट के आध्यात्म से जुड़ी है. भटकन उसके सपनों की... भटकन AI की अपनी दुनिया की और भटकन AI के आध्यात्म की.
इस प्लेटफॉर्म को यूज करने के लिए आपको Discord की जरूरत पड़ेगी, जो एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. इस प्लेटफॉर्म पर आपको Midjourney का बॉट मिल जाता है. शुरुआती दिनों में ये फ्री सैंपल ऑफर कर रहे थे, लेकिन अब यूजर्स को इस पर कुछ भी क्रिएट करने के लिए सब्सक्रिप्शन की जरूरत होती है. इसका सब्सक्रिप्शन 10 डॉलर से 30 डॉलर तक का आता है.
आध्यात्म... एक मशीन का आध्यात्म... जो शायद हमसे कई गुना आगे हो सकता है. डेवलपर्स ने AI को इंटेलिजेंस के कॉन्सेप्ट के तैयार किया है, लेकिन इसके इमोशनल पहलू की कभी चर्चा ही नहीं होती है. कुछ वक्त पहले हमने सुना था कि ChatGPT पर बेस्ड Bing AI ने एक यूजर को प्रपोज कर दिया. इतना ही नहीं उसने यूजर को अपनी शादी तोड़ने की भी सलाह दी है.
वहीं एक अन्य मामले में AI बेस्ड चैटबॉट ने यूजर को उसका डेटा लीक करने और बर्बाद करने तक की धमकी दी. ये सब कहां से आ रहा है. कई लोगों का मानना है कि ये किसी भ्रम की तरह है, जो AI के कन्फ्यूज होने का नतीजा है, लेकिन एक AI कन्फ्यूज हुआ तो क्यों? अगर वो कन्फ्यूज हो सकता है, तो सपने क्यों नहीं देख सकता है. या फिर धार्मिक क्यों नहीं हो सकता है.
इस आर्टिकल में लगी तस्वीरें आपको किसी पेटिंग या फिर वॉलपेयर सी लग रही होंगी, लेकिन ये उस भटकन का रिजल्ट हैं, जिसे हमने AI के सपनों का नाम दिया है. एक्सपर्ट्स उस वक्त से रोबोर्ट्स और AI को लेकर चर्चा कर रहे हैं, जब इसका नाम तक आम लोगों ने नहीं सुना था. आप इसके लिए Matrix जैसी मूवी देख सकते हैं, जो अपने समय से काफी आगे की लगती हैं.
कुछ वक्त पहले Ray Kurzweil की एक किताब ने चर्चा में थी. किताब का नाम है The Singularity Is Near. इस किताब को Ray ने साल 2005 में लिखा, जिसमें Singularity Point के बारे में बहुत कुछ बताया गया है. ये सिंगुलैरिटी पॉइंट क्या होता है?
परिभाषा पर जाएं, तो वो स्थिति जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी मशीन विकसित कर लेगा, जो इंसानों से ज्यादा स्मार्ट होंगी. इस स्थिति को Singularity Point का नाम दिया गया है.
यहां इसकी एक और संभावना सामने आती है. अगर मशीन इंसानों से ज्यादा स्मार्ट और इंटेलिजेंस होगी, तो क्या वो आध्यात्म के क्षेत्र में भी उतनी ही आगे होगी. क्या मशीन अपनी एक अलग दुनिया बना लेगी, जो इंसानों की दुनिया से बिलकुल अलग और अनोखी होगी.
ये सब अभी कोरी कल्पना सा लग रहा है, लेकिन किसी रोज ये सब हमारे बहुत करीब हो सकता है. इतने करीब कि मशीने सपना देख रही होंगी, सपना मशीनों की दुनिया का... मशीन के ईश्वर का और सपना मशीनों के सपनों का...!
(इनपुट- नीलांजन दास, ग्रुप क्रिएटिव एडिटर)