
एक नए तरीके का साइबर फ्रॉड इन दिनों चर्चा में है. इस फ्रॉड को Pig Butchering Scam या Investment Scam कहा जा रहा है. इस स्कैम में बेरोजगार युवाओं, घरेलू महिला, छात्र और जरूरतमंद लोगों को टार्गेट किया जा रहा है. यानी आसान भाषा में कहें, तो हर वो शख्स जो जल्दी पैसे कमाना चाहता है वो इन स्कैमर्स के निशाने पर है.
गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. रिपोर्ट की मानें तो अपराधी इस तरह के स्कैम को अंजाम देने के लिए गूगल सर्विसेस का इस्तेमाल कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, 'गूगल ऐडवर्टाइजमेंट प्लेटफॉर्म टार्गेटेड विज्ञापन को सीमा के पार दिखाने की सुविधा देता है. ये स्कैम जिसे Pig Butchering कहा जा रहा है, एक वैश्विक घटना है, जिसमें बड़ी संख्य में मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर स्लेवरी जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं.'
इस स्कैम की शुरुआत साल 2016 में चीन से मानी जाती है. शुरुआत में इस तरह के स्कैम का शिकार कुछ लोग हुए, लेकिन धीरे-धीरे इन अपराधियों का हौसला बढ़ता गया. बीतते वक्त के साथ फ्रॉड्स ने क्रिप्टोकरेंसी या दूसरी स्कीम के जरिए लोगों को लुभाना शुरू किया.
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इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने गूगल के साथ पार्टनरशिप की है. इसके तहत गूगल किसी खतरे की जानकारी समय रहते देता है, जिस पर एजेंसी जरूरी एक्शन समय पर ले सके.
रिपोर्ट की मानें, तो साइबर क्रिमिनल्स स्पॉन्सर्ड फेसबुक पोस्ट का सहारा ले रहे हैं, जिससे ऐसे ऐप्स को प्रमोट किया जा रहा है. 'इस तरह की लिंक की पहचान तेजी से की जा रही है और फेसबुक से शेयर किया जा रहा है. साथ ही जरूरी फेसबुक पेज के खिलाफ की कार्रवाई की जा रही है.'
गृह मंत्रालय ने कहा है कि वॉट्सऐप अभी भी सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल भारत में साइबर क्रिमिनल्स कर रहे हैं. मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, वॉट्सऐप से जुड़ी 14746 शिकायतें हैं, जबकि टेलीग्राम से जुड़ी 7651, इंस्टाग्राम से जुड़ी 7152, फेसबुक से जुड़ी 7051 और यूट्यूब से जुड़ी 1135 शिकायतें मिली हैं. ये सभी शिकायतें मार्च 2024 तक की हैं.
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इन रिपोर्ट्स को सभी स्टेकहोल्डर्स से शेयर कर दिया गया है, जिससे प्लेटफॉर्म्स समय रहते जरूरी कदम उठा सकें. इसके अलावा मिनिस्ट्री ने एक साइबर वॉलंटियर फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया है. इसके तहत आम नागरिक खुद को इनरोल कर सकते हैं और इंटरनेट पर मौजूद ऐसे कंटेंट के खिलाफ रिपोर्ट कर सकते हैं.
इस फ्रेमवर्क के तहत 31 मार्च 2024 तक 54,833 लोगों ने खुद को रजिस्टर किया है. इसके साथ ही सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) को भी इस प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेट किया गया है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2021 में लॉन्चिंग के बाद से इस प्लेटफॉर्म ने 16 अरब रुपये फ्रॉडस्टर्स के हाथों में जाने से बचाए हैं. इससे 5.75 लाख लोगों को फायदा मिला है.