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US, सोवियत संघ के करीब आधी सदी बाद चीन उठाएगा चांद की मिट्टी, होंगे नए खुलासे

aajtak.in
  • 02 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST
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करीब आधी सदी के बाद चीन पहली बार चांद की धरती से पत्थरों का सैंपल कलेक्ट करेगा. इससे पहले ऐसा अमेरिका ने अपोलो काल में साल 1976 में किया था. चीन का स्पेसक्राफ्ट चांगई-5 भारतीय समयानुसार मंगलवार यानी एक दिसंबर की रात 8.45 मिनट पर चांद की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा. इस यान को 23 नवंबर को चीन ने चांद के लिए भेजा था. (फोटोः एपी)

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चीन का चांगई-5 रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) चांद पर ऐसी जगह पर उतरा है जहां पहले कोई मिशन नहीं भेजा गया. यह रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट कुछ हफ्तों के बाद धरती पर वापस आएगा. इसके साथ चांद की मिट्टी वापस लौटेगी. यानी 1976 के बाद पहली बार धरती के लोग चांद की मिट्टी देखेंगे. दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर रिसर्च करने के लिए तैयार रहेंगे. (फोटोः एपी)

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साइंस न्यूज वेबसाइट के अनुसार एरिजोना यूनिवर्सिटी की प्लैनेटरी साइंटिस्ट जेसिका बार्न्स कहती है कि लोग चांद के अलग-अलग हिस्सों पर अपोलो काल से ही जा रहे हैं. वहां से मिट्टी ला रहे हैं. इस बार चीन लेकर आएगा. खुशी की बात ये है कि काफी लंबे समय के बाद ऐसा हो रहा है. जेसिका बार्न्स अमेरिका और सोवियत संघ द्वारा लाई गई मिट्टी के सैंपलों पर रिसर्च कर चुकी हैं. (फोटोः रॉयटर्स)

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चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) 23 नवंबर की रात में साउथ चाइना सी से लॉन्च किया गया था. चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA) ने चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) को चांद की उस सतह पर उतारा है, जहां पर करोड़ों साल पहले ज्वालामुखी होते थे. ये चांद का उत्तर-पश्चिम का इलाका है, जो हमें आंखों से दिखाई देता है. चीन ने अपना मिशन चांद के अंधेरे वाले हिस्से में नहीं भेजा. (फोटोः एपी)

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वुहान स्थित चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ जियोसाइसेंस के प्लैनेटरी साइंटिस्स लॉन्ग जियाओ कहते हैं कि चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) में एक ड्रिलर और एक चम्मच लगा है जो चांद की सतह को खोदकर करीब 2 किलोग्राम मिट्टी और छोटे पत्थर कलेक्ट करेगा. इसका ड्रिलर चांद की सतह पर 2 मीटर की गहराई तक खुदाई कर सकता है. (फोटोः एपी)

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चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) के साथ एक दिक्कत भी है. इसमें किसी भी तरह का आंतरिक गर्मी देने वाला मैकेनिज्म नहीं लगा है. यानी चंद्रमा की माइनस 170 डिग्री सेल्सियस वाली रात को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. इसका पूरा मिशन एक लूनर दिन के लिए है. यानी धरती के हिसाब से उसके पास सिर्फ 14 दिन का समय ये काम करने के लिए. (फोटोः गेटी)

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14 दिन के अंदर चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट (Chang'e-5 Spacecraft) चांद की सतह खोदकर, उसमें से मिट्टी और पत्थर के 2 किलोग्राम सैंपल लेकर वापस धरती की ओर लौटना है. ऐसा माना जा रहा है कि 3 दिसंबर को एक छोटा रॉकेट लैंडर और सैंपल को लेकर वापस ऑर्बिटर से जुड़ जाए. हालांकि अभी तक चीन की स्पेस एजेंसी CNSA ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. (फोटोः गेटी)

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एक बार लैंडर और मिट्टी का सैंपल ऑर्बिटर पर पहुंच गया तो फिर वो उसे वापस आने वाले कैप्सूल में डाल देगा. जो 17 दिसंबर के आसपास मंगोलिया में लैंड कर सकता है. अगर यह पूरी जटिल प्रक्रिया सही से होती है चीन ऐसे करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन जाएगा. चांद की मिट्टी से खनिज, अन्य गैसों, रासायनिक प्रक्रियाओं और जीवन की संभावनाओं पर रिसर्च करने में मदद मिलेगी. साथ ही यह भी पता चलेगा कि चांद का भविष्य कैसा होगा. (फोटोः गेटी)

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सबसे पहले साल 1976 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपोलो मिशन ने चांद की मिट्टी का सैंपल लिया था. उसके बाद सोवियत संघ ने. अमेरिका और सोवियत संघ के मिशन से धरती पर चांद से अब तक 380 किलोग्राम मिट्टी, पत्थर और अन्य सैंपल लाए जा चुके हैं. दुनिया भर के साइंटिस्ट चांद की सतह पर करोड़ों साल पहले हुई ज्वालामुखीय गतिविधियों की वजह से पड़ने वाले असर को जानना चाहते हैं. इसलिए वहां के मिट्टी की जांच की जा रही है. (फोटोः गेटी)

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जेसिका बार्न्स बताती हैं कि अमेरिकी और सोवियत संघ की मिट्टी की जांच करने पर पता चला था कि वहां पर अलग-अलग स्थानों पर मौजूद मिट्टी और पत्थरों की उम्र अलग-अलग है. कोई 300 से 400 करोड़ पुराने हैं तो कुछ 130 से 140 करोड़ साल पुराने. चांद की सतह पर ज्वालामुखीय गतिविधियां बेहद जटिल रही हैं. उन्हें मिट्टी के सैंपल से समझने में शायद मदद मिले. (फोटोः गेटी)

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