एशिया की सबसे बड़ी कुबेर की प्रतिमा विदिशा जिला संग्रहालय में रखी है जहां भगवान कुबेर की पूजा की गई. बताया जाता है भगवान कुबेर स्वर्ग के धन के देवता माने जाते हैं. जिले में धन की कोई कमी न आए, इसको लेकर विदिशा के लोगों ने जिला संग्रहालय में पूजा अर्चना की. (विदिशा सेे विवेक ठाकुर की रिपोर्ट)
साल 2005 से कुबेर देवता की पूजा यह शहर में लगातार करते आ रहे हैं. सबसे बड़ी खास बात तो यह है कि जिला संग्रहालय में कुबेर देवता की यह प्रतिमा एशिया में सबसे बड़ी प्रतिमा मानी जाती है. बताया जाता है देशभर में भगवान कुबेर की 4 प्रतिमाएं हैं. एशिया की सबसे बड़ी प्रतिमा विदिशा जिला संग्रहालय में रखी है.
विदिशा ऐतिहासिक दृष्टि से सम्राट अशोक की ससुराल कही जाती है. विदिशा का नाम पहले भेलसा था. सम्राट अशोक ने यहां की युवती देवी से विवाह किया था. यही कारण है कि विदिशा में समय-समय पर पुरातन संपदा मिलती रहती है. कभी खुदाई में तो कभी जंगलों में शैलचित्र विदिशा के इतिहास का प्रमाण देते हैं.
लोगों की मानें तो धन कुबेर की मूर्ति बेतवा नदी घाट पर लेटी हुई थी. शहर के लोग इसे विशाल चट्टान समझकर इस पर कपड़े धोने का काम किया करते थे. सालों से इस प्रतिमा पर कपड़े धोने का काम चलता रहा.
इतिहास के जानकारों ने बाद में इस प्रतिमा को जिला संग्रहालय में संरक्षित किया गया. आज यह प्रतिमा देश ही नहीं बल्कि विदेशी सैलानियों का आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. धनतेरस के मौके पर विदिशा के लोग करीब 2005 से जिला संग्रहालय में कुबेर देवता आस्था में जुड़ गए लोग भगवान की पूजा करते और परिक्रमा लगाने अब हर साल यहां धनतेरस के मौके पर आते हैं..