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ऑस्ट्रिया के इस गांव का नाम है F***ing, बदनामी की वजह से अब बदला जाएगा नाम

aajtak.in
  • 30 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:36 AM IST
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अगर आपके गांव या शहर का नाम सामाजिक तौर पर मान्य किसी आपत्तिजनक शब्द पर हो तो आपको उसका नाम बताने में शर्म आती है. ऑस्ट्रिया में ऐसा ही एक गांव है, जहां के लोग उसका नाम लेने में बेइज्जती महसूस करते हैं. क्योंकि इस गांव का नाम फकिंग (F***ing) है. अब इस गांव के टाउन काउंसिल ने इसका नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की है. कुछ दिन बाद इसे फगिंग (Fugging) के नाम से जाना जाएगा. (फोटोः डायचे वेले)

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मेयर आंद्रिया होल्जनर ने बताया कि यूरोपीय या अन्य देशों के पर्यटकों को जब इस गांव का नाम पता चलता था तो वो इस गांव की सीमा पर लगे साइन बोर्ड के पास आकर तस्वीरें खिंचवाते थे. उसके बाद उसे सोशल मीडिया पर डालते थे. इससे फकिंग (F***ing) गांव की बदनामी हो रही थी. इसलिए अब इसका नाम बदलकर फगिंग रखने का फैसला लिया गया है. 1 जनवरी 2021 से ऑस्ट्रिया के फकिंग (F***ing) गांव का नाम फगिंग (Fugging) हो जाएगा. (फोटोः डायचे वेले)

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जर्मनी के मीडिया संस्थान डायचे वेले के अनुसार अपर ऑस्ट्रिया के इनवर्टेल इलाके के टार्सडॉर्फ (Tarsdorf) म्यूनिसिपिलटी में फकिंग (F***ing) गांव आता है. यह साल्जबर्ग (Salzburg) से 33 किलोमीटर दूर है. यह जर्मनी की सीमा पर स्थित है. इस गांव में पर्यटकों का आना-जाना साल 2005 के बाद बढ़ा. पर्यटक इसके साइन बोर्ड के नीचे तस्वीरें लेते और उसे वायरल करते. कुछ ने साइन बोर्ड ही चोरी कर लिया. (फोटोः डायचे वेले)

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साल 2020 की गणना के अनुसार फकिंग (F***ing) गांव में मात्र 106 लोग रहते हैं. यहां पर 32 घर हैं, जिनमें ये लोग रहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस गांव की स्थापना 6ठीं शताब्दी में बवेरियन समुदाय के एक शख्स फोको (Focko) ने की थी. उस समय ऑस्ट्रिया के इस इलाके में ऑस्ट्रोगॉथ्स साम्राज्य का राज था. पहली बार इस गांव के नाम का दस्तावेजीकरण साल 1070 में किया गया. (फोटोः डायचे वेले)

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शुरूआत में इसका नाम लैटिन में रखा गया. तब इसका नाम था एडेलपर्टस डे फसिंनजिन. धीरे-धीरे लोगों ने नाम को बदलना शुरू कर दिया. साल 1303 में इसका नाम फकचिंग (Fukching) हो गया. 1532 में फगखिंग (FugKhing) हो गया. 18वीं सदी तक आते-आते लोग इसे फकिंग (F***ing) बुलाने लगे. जबकि ऑस्ट्रियन इतिहास और किताबों के अनुसार इसे फूकिंग बुलाना चाहिए. क्योंकि इस गांव को फोको (Focko) ने स्थापित किया था. (फोटोः डायचे वेले)

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सेकेंड वर्ल्ड वॉर के समय जर्मनी के सैनिकों ने जब आना-जाना शुरू किया तब उनकी नजर इस गांव पर पड़ी. उसके बाद इसका नाम यूरोपीय देशों में लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा. लोग इसके साइन बोर्ड के नीचे फोटो खिंचवाते थे और उन्हें चाव से दिखाते थे. इस गांव को देखने ब्रिटिश पर्यटक सबसे ज्यादा आते हैं. कई बार तो बसों से लोग आते हैं, सिर्फ गांव और उसका साइन बोर्ड देखने. (फोटोः डायचे वेले)

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इस गांव में कोई अपराध नहीं होता. पिछले डेढ़ दशक में सबसे ज्यादा अपराध जो रिकॉर्ड किया गया है वो है इस गांव के नाम का साइनबोर्ड का चोरी होना. हालांकि, इस गांव के एक युवा जोसेफ विंकलर ने ऑनलाइन टीशर्ट बेचना शुरू किया था. उसने प्रसिद्ध फैशन मैगजीन मैक्सिम से बात की थी प्रमोशन के लिए लेकिन गांव के लोगों ने उसे ये बिजनेस करने से मना कर दिया. (फोटोः डायचे वेले)

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