बकरियों का बैंक...कभी सुना है आपने ऐसे बैंक के बारे में...जी हां, महाराष्ट्र के अकोला में एक पढ़े-लिखे किसान ने ऐसा ही बैंक खोला हुआ है. अकोला जिले के सांघवी मोहाली गांव से ऑपरेट हो रहे इस बैंक का नाम है- ‘गोट बैंक ऑफ कारखेड़ा’.
52 साल के नरेश देशमुख ने इस अनूठे बकरी बैंक को दो साल पहले खोला. अब इस बैंक के 1200 से ज्यादा डिपॉजिटर्स हैं. इस बैंक की ओर से 1200 रुपये लेकर लोन एग्रीमेंट किया जाता है और एक प्रेेग्नेंट बकरी सौंप दी जाती है. लोन एग्रीमेंट की शर्त के मुताबिक फिर 40 महीने में बकरी के चार बच्चे बैंक को लौटाने होते हैं. देशमुख ने आजतक से खास बातचीत में बताया कि ये बकरी बैंक कैसे काम करता है.
देशमुख को इस बैंक को खोलने की प्रेरणा बकरी पालन करने वाले मेहनती और ईमानदार मजदूरों के परिवारों से मिली. देशमुख ने इन परिवारों पर स्टडी के दौरान पाया कि ये लोग मजदूरी करने के साथ साथ बकरियां भी पालते हैं. बकरी पालन से इन्हें आर्थिक तौर पर सहारा मिलता है और ये छोटी-मोटी जमीन खरीदने के अलावा बच्चों की पढ़ाई और शादियां भी कर पाते हैं. इन परिवारों को गौर से ऑब्जर्व करने के बाद ही देशमुख ने बकरी बैंक खोलने का फैसला किया.
देशमुख के मुताबिक 4 जुलाई 2018 को इन्होंने 40 लाख रुपये के निवेश से ये काम शुरू किया. उन्होंने 340 बकरियां खरीदीं. फिर 340 श्रमिकों और छोटे किसानों के परिवारों की महिलाओं को ये बकरियां बाकायदा लोन एग्रीमेंट करके मुहैया कराईं. हर एक महिला को 1100 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस लेकर एक-एक प्रेग्नेंट बकरी दी गई. एग्रीमेंट की शर्त के मुताबिक एग्रीमेंट करने वाली महिला को 40 महीने में एक बकरी के बदले में बकरी के चार बच्चे बैंक को लौटाने होते हैं. जबकि उस महिला को औसतन इन 40 महीने में अपने पास की बकरियों से 30 बच्चे मिलते हैं. 4 बच्चे बैंक को देने के बाद भी महिला के पास 26 बच्चे बचे रहते. अनुमान के मुताबिक हर महिला को इस तरीके से करीब ढाई लाख रुपये का लाभ होता है.
बकरी या बकरे का औसतन जीवनकाल 8 से 12 साल का होता है. ये करीब 7 साल की उम्र तक जनन क्षमता बनाए रखते हैं. बकरी में प्रथम प्रजनन के लिए 7 से 10 महीने की उम्र का होना जरूरी होता है. वहीं बकरे में ये उम्र 4 से 8 महीने की होती है. बकरी का गर्भकाल 146 से 155 दिन के बीच होता है.
जब से देशमुख ने जुलाई 2018 से बैंक शुरू किया है उनके पास बकरियों के 800 बच्चे लौट कर आए हैं. इनके बड़े होने के बाद इन्हें बैंक ने कॉन्ट्रेक्टर को बेच कर करीब एक करोड़ रुपये कमाए हैं. बकरी की कीमत उससे वजन के हिसाब से तय होती है. इसका वजन 35 से 52 किलो तक हो सकता है. इसी हिसाब से इसकी कीमत भी 12,000 रुपए से लेकर 18,000 रुपये के बीच रहती है.
देशमुख ने अपनी इस कवायद का पेटेंट भी सरकार से हासिल कर लिया है. उन्होंने कारखेड़ा एग्री प्रोडूसर कंपनी स्थापित की है. देशमुख का इरादा आने वाले एक साल में महाराष्ट्र में 100 बकरी बैंक शुरू करने है. उन्होंने महिला आर्थिक विकास महामण्डल के साथ एमओयू पर दस्तखत किए हैं. एमओयू पर दस्तखत के वक्त महाराष्ट्र की महिला बाल कल्याण मंत्री यशोमति ताई ठाकुर और महिला आर्थिक विकास महामण्डल की अध्यक्ष ज्योतिताई ठाकरे की मौजूद रहीं. MOU के मुताबिक पूरे महाराष्ट्र में महिलाओ में बकरियों के वितरण और बकरियों के बच्चों के कलेक्शन की जिम्मेदारी महिला आर्थिक विकास महामण्डल ने ली है.
किराना स्टोर चलाने वाले 38 साल के मुकेश रामराव शेंडे ने अखबार में देशमुख के बकरी बैंक के बारे में पढ़ा. मुकेश की जिज्ञासा जागी और उन्होंने सांघवी मोहाली जाकर देशमुख का लेक्चर अटैंड किया. इसके बाद मुकेश ने बकरी बैंक में तीन लाख रुपये का निवेश किया. इसके बदले उन्हें बैंक से बकरियां मिल गईं. मुकेश से जब पूछा गया कि उन्हें बकरी बैंक पर इतनी जल्दी कैसे भरोसा हुआ और तीन लाख रुपये निवेश करने का फैसला किया. मुकेश के मुताबिक उनके सामने बैंक की ओर से अकोला जिले में 50 महिलाओं को उस्मान ब्रीड की 50 बकरियां सौंपी गईं. हर महिला से करार किया गया कि 40 महीने में बकरी के चार बच्चे बैंक को लौटाएं जाएंगे. मुकेश के मुताबिक सब कुछ इतना पारदर्शी था कि उन्होंने इस काम में निवेश का फैसला किया.