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नहीं मान रहा चीन, LAC पर झड़प के बाद भारत पर 300% साइबर हमले बढ़े

aajtak.in
  • 30 जून 2020,
  • अपडेटेड 10:33 AM IST
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लद्दाख के गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन सेना में जारी तनाव के बीच देश के खिलाफ चीनी हैकरों के साइबर हमले में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. सिंगापुर स्थित साइबर रिसर्च फर्म, साइफिरमा के अनुसार, दोनों सेना के बीच हिंसक झड़प होने के बाद चीनी सेना द्वारा समर्थित हैकर्स के हमलों में  300 फीसदी की वृद्धि हुई है.

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15-16 जून को भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद इन साइबर हमलों की तीव्रता और आक्रामकता में तेजी आई है.

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हमारे सहयोगी चैनल इंडिया टुडे टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में साइफिरमा के चेयरमैन और सीईओ कुमार रितेश ने बताया कि उन्होंने शोध में पाया कि गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद ऐसे हमले बढ़ गए हैं.

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साइफिरमा ने भारत की नोडल एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) के साथ अपने शोध के निष्कर्षों को साझा किया है और सीमा पर गतिरोध के बीच भारत के खिलाफ बढ़ी हुई चीनी डार्क वेब गतिविधि की जानकारी दी है.

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कुमार रितेश ने कहा, "हमारे शोध में पता चला है कि 18 जून से चीन के लक्ष्य बदल गए हैं और भारत पर साइबर हमलों में 300 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है."

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उन्होंने आगे कहा, "अब हम जो देख रहे हैं वह टोही चरण है जिसके दौरान दुश्मन अपने लक्ष्यों के बारे में संवेदनशील जानकारी एकत्र कर रहा है और फिर उसकी प्रोफाइलिंग कर रहा है. दूसरे चरण में एक-एक करके इन प्रोफाइल पर साइबर हमले हो सकते हैं."

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साइफिरमा के CEO ने इस बात की भी पुष्टि की है कि 18 जून के बाद साइबर अटैक के पैटर्न में जो परिवर्तन आया है उसमें किए गए हमलों के दौरान स्वदेशी उद्योगों जैसे मोबाइल विनिर्माण, टायर, मीडिया कंपनियां और कुछ सरकारी एजेंसियों को भी निशाना बनाया गया है.

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कुमार रितेश ने बताया कि 18 जून के बाद से जो साइबर हमले किए जा रहे हैं वो पहले से काफी अलग हैं. हमले के दूसरे चरण में संवेदनशील जानकारी, संवेदनशील डेटा, ग्राहक जानकारी और बौद्धिक संपदा की चोरी करने के लिए वेबसाइट और कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने के लक्ष्य से हमले किए जा रहे हैं.

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पहले, चीनी हैकर्स पाकिस्तान और उत्तर कोरिया स्थित हैकर्स के माध्यम से भारत पर हमला किया करते थे. लेकिन अब चीनी हैकर्स ने सीधे तौर पर इस हमले में खुद को शामिल कर लिया है और लक्षित भारतीय संस्थाओं से संवेदनशील डेटा एकत्र करने की कोशिश कर रहे हैं.

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कुमार रितेश ने इंडिया टुडे टीवी को बताया, "पहले चीनी हैकर्स पाकिस्तान और उत्तर कोरिया स्थित हैकर्स के लिए एक सहायक की भूमिका में थे, लेकिन अब वे अग्रिम पंक्ति में हैं और साइबर हमलों के लिए एजेंडा चला रहे हैं."

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