कहा जाता है डूबते को तिनके का सहारा, पर यहां डूबते को भगवान के मंदिर ने सहारा दिया. मंदिर के भगवान तो पानी में डूबे थे पर इंसान को भगवान ने बचा लिया. यह वाकया मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का है.
मध्य प्रदेश में उफनती नदी है, डूबते हुए पुल और किनारे हैं, चारों तरफ पानी ही पानी है. मंदिर डूबे हैं, उनके अंदर भगवान भी डूबे हैं. उनका जल अभिषेक हो रहा है. ऐसे में एक युवक डूबे हुए मंदिर के शिखर को पकड़े हुए हैं. लोगों ने जब यह देखा तो डूबते को बचाने की कोशिशें की गईं.
यह वाकया विदिशा की उफनती बेतवा नदी का है जहां बेतवा खतरे के निशान को पार कर गई है. जहां नदी के किनारे बने मंदिर जलमग्न हो गए हैं.
यहां एक युवक नहाने गया था और पैर फिसलने के कारण नदी में बह गया. किस्मत से उसे एक मंदिर का शिखर मिल गया और उसने शिखर को थाम लिया.
देखने वालों और होमगार्ड ने रेस्क्यू करके उसे निकाला. उसके पास टायर फेंके गए गए रस्सी बांधकर और पकड़कर उसे खींचा गया, तब इस युवक की जान बची. इसे कहते हैं डूबते को तिनके का नहीं मंदिर का सहारा.