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सात समंदर पार से आए लाखों 'फ्लेमिंगो', कच्छ के रेगिस्तान का नजारा कुछ यूं दिखा

aajtak.in
  • 22 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST
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गुजरात राज्य में इस बार सबसे अधिक बारिश कच्छ जिले में हुई है. इस साल कच्छ की सभी नदी, नाले, बांध बारिश के पानी से लबालब भर चुके हैं. दूसरी ओर कच्छ का रेगिस्तान भी समुद्र की तरह बारिश के पानी से भर गया है. दक्षिण एशिया की एकमात्र सरखाब नगरी (फ्लेमिंगो सिटी) जो कच्छ के रेगिस्तान में स्थित है, वहां हर साल इस अवधि में 10 लाख से अधिक फ्लेमिंगो पक्षी मेहमान बनकर आते हैं.  इस साल भी लाखों फ्लेमिंगो पक्षी कच्छ इलाके में पहुंचे हैं जिसकी वजह से वहां का नाजरा और भी मनमोहक हो चुका है. (इनपुट-कौशिक कांठेचा)

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कच्छ के रेगिस्तान में फ्लेमिंगो पक्षी का झुंड लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. कच्छ का खड़ीर क्षेत्र फ्लेमिंगो पक्षी को लेकर काफी प्रसिद्ध है. यह जगह भारत में पक्षी प्रेमियों के लिए एक स्थायी आकर्षण का केंद्र है. इस बार भारी बारिश की वजह से फ्लेमिंगो पक्षियों के लिए इस इलाके में भोजन और अनुकूल वातावरण बन गया है. इसकी वजह से ये प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में कच्छ के रण में पहुंचे हैं. प्रजनन के लिए ईरान और अफ्रीका से लगभग 10 मिलियन फ्लेमिंगो आते हैं.

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आलम ये है कि कच्छ के खड़ीर इलाके के रेगिस्तान में दूर-दूर तक केवल फ्लेमिंगो पक्षी ही दिखाई दे रहे हैं. इस अद्भुत नजारे को देखने हर साल बहुत से पर्यटक आते हैं. पक्षी विशेषज्ञ रौनक गज्जर ने बताया कि अलग-अलग देशों और समुद्रों को पार करते हुए हर साल हजारों सुर्खाब (फ्लेमिंगो ) पक्षी रापर की शिरानीवांढ से अमरापर तक लगभग 15-16 किमी के क्षेत्र में प्रजनन के लिए आते हैं. फ्लेमिंगो कच्छ के रेगिस्तान में डेढ़ फीट ऊंचा मिट्टी का घोंसला बनाते हैं.

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पक्षी विशेषज्ञ रौनक गज्जर का कहना है कि भंजड़ा डूंगर और काला डूंगर के बीच, फ्लेमिंगो सिटी (हंजबेट) नामक क्षेत्र में अपने अंडे देती है. जहां वह मौसम अच्छा होने पर चार से पांच महीने के प्रवास के दौरान दो या तीन बार अपने अंडे देती है. फ्लेमिंगो के शावक बड़े हो जाते हैं, तो वह उन्हें अपने साथ ले जाते हैं और दूसरे देशों में लौट जाते हैं.
 

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वेस्ट कच्छ के डीसीएफ डॉ.तुषार पटेल का कहना है कि नवंबर से मार्च तक यहां विदेशी पक्षियों का साम्राज्य रहता है. सुबह और शाम ढलते समय पक्षियों का खूबसूरत दृश्य देखने योग्य होता है. पूरे दक्षिण एशिया में सुरखाब (फ्लेमिंगो) प्रजनन के लिए कच्छ के रेगिस्तान को ही क्यों चुनते है? इसके पीछे दिलचस्प कारण यह है कि बारिश होने पर नमक के रेगिस्तान में पानी भर जाता है. 

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डॉ. तुषार पटेल ने आगे बताया कि नमक वाली जमीन और ताजे पानी का एक आनुपातिक मिश्रण एक प्रकार के बैक्टीरिया को जन्म देता है. इन बैक्टीरिया (जीवाणु) द्वारा शैवाल (एल्गी) पैदा करता है. यह शैवाल और कीट फ्लेमिंगो का भोजन है और यह क्षेत्र मानव आबादी से कोसों दूर सुरक्षित जगह पर है. इसी वजह से फ्लेमिंगो यहां आते हैं क्योंकि उनकी बुनियादी भोजन और सुरक्षा जैसी सभी जरूरतें यहां पर अनुकूल है.

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