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लद्दाख तक नई सड़क, दुश्मन की नजर में आए बिना सीमा तक पहुंचेंगे जवान

aajtak.in
  • 20 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST
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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से तनानती के बीच भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है जिससे अब दुर्गम पहाड़ी सीमा तक पहुंचने में सैनिकों को मदद मिलेगी. अब दुश्मन की नजर में आए बिना लद्दाख में पाकिस्तान और चीन के मोर्चे पर सैनिकों और टैंकों को पहुंचाने के प्रयास में सफलता मिली है.

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मनाली से लेह तक एक नई सड़क बनाने पर तेजी से काम चल रहा है. ये सड़क उच्च ऊंचाई वाले पर्वतीय केंद्र शासित प्रदेश के बीच तीसरी कड़ी प्रदान करेगा जिससे ये देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएगा.

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भारत पिछले तीन वर्षों से दौलत बेग ओल्डी और अन्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करने पर भी काम कर रहा है. इसके लिए दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड खारदुंग ला पास से काम शुरू हो चुका है.

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न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने बताया कि मनाली से लेह तक वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं. ये नई सड़क श्रीनगर से जोजिला दर्रे से गुजरने वाले मौजूदा मार्गों और मनाली से लेह तक सरचू के माध्यम से अन्य मार्गों की तुलना में समय बचाने में मदद करेगा.  

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मनाली से लेह की यात्रा के दौरान सड़क लगभग तीन से चार घंटे की यात्रा के समय को बचाएगी. इतना ही नहीं टैंक और आर्टिलरी गन जैसे भारी हथियारों और सैनिकों की तैनाती के दौरान भी वो दुश्मनों की नजर में आने से बचे रहेंगे.

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मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और रसद के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मार्ग ज़ोजिला से है, जो द्रास-कारगिल से लेह तक जाता है. 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानियों द्वारा उसी मार्ग को भारी निशाना बनाया गया था और सड़क के साथ-साथ ऊंचाई वाले पहाड़ों में दुश्मनों ने लगातार बमबारी और गोलाबारी की थी.

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सूत्रों ने कहा कि इस परियोजना पर काम शुरू हो चुका है और नई सड़क मनाली को नीम के पास लेह से जोड़ेगी जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चीन के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान दौरा किया था.

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इसी तरह, रणनीतिक रूस से महत्वपूर्ण दौलत बेग ओल्डी सड़क के विकल्प के तौर पर भारत पुराने ग्रीष्मकालीन मार्ग को विकसित करने पर काम कर रहा है, जिस पर सैन्य काफिला पश्चिमी तरफ से पूर्वी लद्दाख क्षेत्रों तक पहुंचता था.

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सूत्रों ने कहा कि 14वीं कोर को DSDBO सड़क का विकल्प खोजने और सियाचिन शिविर के पास से DBO क्षेत्र की ओर आने वाली सड़क की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी, और एक इकाई को परीक्षण के आधार पर वहां से भेजा गया था.

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